बिहार में 15 अप्रैल के बाद बनेगी नई सरकार मुख्यमंत्री नीतीश कुमार 14 तक देंगे इस्तीफा

बिहार में 15 अप्रैल के बाद बनेगी नई सरकार मुख्यमंत्री नीतीश कुमार 14 तक देंगे इस्तीफा

 

जे टी न्यूज, पटना: बिहार में नई सरकार के गठन को लेकर तेज हुई हलचल के बीच मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बुधवार को कैबिनेट की बैठक की अध्यक्षता की। यह बैठक इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि इसे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अंतिम कैबिनेट बैठक के तौर पर देखा जा रहा है। इससे पहले फरवरी में कैबिनेट की बैठक हुई थी। उसके बाद करीब डेढ़ महीने तक कोई बैठक नहीं हुई थी। इस बीच मुख्यमंत्री के इस्तीफे को लेकर अटकलें भी तेज हो गई हैं। सत्ता के गलियारे में चर्चा है कि नीतीश कुमार 14 अप्रैल तक मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे सकते हैं। उसके बाद नई सरकार के गठन की प्रक्रिया शुरू होगी। मुख्यमंत्री गुरुवार को दोपहर में दिल्ली जाएंगे, जहां वह जदयू की बैठक में हिस्सा लेंगे और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से बातचीत करेंगे। नीतीश कुमार 10 अप्रैल को राज्यसभा सदस्य के तौर पर शपथ लेंगे। जबकि 10 अप्रैल को ही दिल्ली में बिहार भाजपा की कोर कमेटी की अहम बैठक होगी।इस बैठक में राज्य के अगले मुख्यमंत्री के नाम पर आम सहमति बनायी जायेगी। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की अध्यक्षता में होने वाली इस बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी शामिल हो सकते हैं। नीतीश कुमार राज्यसभा की सदस्यता ग्रहण कर पटना लौटने के बाद राज्य में नई सरकार के गठन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाएंगे। पटना वापसी पर वह किसी भी दिन एनडीए विधायक दल की बैठक बुलाकर उसमें मुख्यमंत्री पद छोड़ने की जानकारी विधायकों को देंगे। इसके बाद वह राज्यपाल कों अपना इस्तीफा सौपेंगे। नई सरकार के गठन के पहले एनडीए के सभी घटक दलों के विधायक दल की अलग-अलग बैठक होगी। इसके बाद एनडीए विधान मंडल दल की संयुक्त बैठक में जो गठबंधन के नये नेता चुने जायेंगे वे सरकार बनाने का प्रस्ताव राज्यपाल को सौंपेगें। इसके साथ ही अब लगभग यह तय हो गया है कि राज्य में भाजपा अपना मुख्यमंत्री बनाने जा रही है। इसके लिए दिल्ली से लेकर पटना में हलचल तेज हो गई है। दिल्ली में 10 अप्रैल को बिहार भाजपा कोर ग्रुप की बैठक बुलाई गई है, जिसकी अध्यक्षता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन करने वाले हैं। इस बैठक में बिहार प्रदेश के शीर्ष नेताओं के अलावा क्षेत्रीय संगठन मंत्री नागेंद्र जी और प्रदेश संगठन महामंत्री भीखू भाई दलसानिया शामिल होंगे। बैठक के लिए बिहार प्रदेश भाजपा के जिन नेताओं को बुलाया गया है, उनमें प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी, उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा, केंद्रीय गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ. संजय कुमार जायसवाल, बिहार सरकार में मंत्री और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष दिलीप जायसवाल, मंत्री मंगल पांडेय शामिल हैं। इस बैठक में प्रदेश कोर ग्रुप से मुख्यमंत्री का नाम सुझाने को कहा जा सकता है। बैठक में इस बात की कोशिश होगी कि आम सहमति से कोई एक नाम तय हो जाए। इस बैठक में जो फैसला होगा, उसी के आधार पर पार्टी आलाकमान अंतिम फैसला लेगा। पार्टी आलाकमान की ओर से मुख्यमंत्री का नाम फाइनल किए जाने के बाद गठबंधन के नेताओं को इस बारे में राजी करने की कोशिश की जाएगी और उसके बाद पटना में एनडीए विधायक दल की बैठक में नए मुख्यमंत्री के नाम का ऐलान कर दिया जाएगा।

इस बीच मंत्री विजय चौधरी ने साफ कहा कि मुख्यमंत्री का शपथ ग्रहण तय कार्यक्रम के अनुसार होगा और उसके बाद ही सरकार गठन की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ लेने के लिए निर्धारित समय पर जाएंगे और 10 अप्रेल को शपथ ग्रहण करेंगे। इसके बाद वे मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देंगे। इस्तीफे के बाद राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के सभी दलों की बैठक होगी, जिसमें नए नेता का चयन किया जाएगा और उसी आधार पर नई सरकार का गठन होगा। जब विजय चौधरी से नए मुख्यमंत्री के बारे में सवाल किया गया, तो उन्होंने गोल मटोल जवाब देते हुए कहा कि “जरा स्थिर होकर पूछिए कि अगला मुख्यमंत्री कौन होगा? जिन-जिन को आप लोग रेस में लगा देते हैं, वही होंगे।” दरअसल, पिछले कुछ समय से मीडिया और राजनीतिक चर्चाओं में सम्राट चौधरी का नाम लगातार प्रमुखता से सामने आ रहा है। उन्हें मुख्यमंत्री पद का मजबूत दावेदार माना जा रहा है। खास बात यह है कि खुद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी अपनी यात्रा के दौरान कई बार ऐसे संकेत दिए हैं, जिनसे यह कयास लगाए जा रहे हैं कि वे सम्राट चौधरी को आगे बढ़ा सकते हैं। ऐसे में सियासत के जानकारों का मानना है कि विजय चौधरी भले ही सीधे तौर पर किसी नाम का ऐलान नहीं कर रहे हों, लेकिन उनके बयान में छिपे संकेत काफी कुछ साफ कर रहे हैं। उल्लेखनीय है कि बिहार की सियासत में यह बदलाव काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इससे राज्य की सत्ता और राजनीतिक समीकरणों पर दूरगामी असर पड़ सकता है। अब सभी की निगाहें राज्यसभा में नीतीश कुमार के शपथ ग्रहण,सीएम पद से उनके इस्तीफे और उसके बाद होने वाली एनडीए बैठक पर टिकी हैं, जहां बिहार के नए मुख्यमंत्री के नाम पर अंतिम मुहर लगेगी।

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