भाई – बहन के प्रेम का लोकपर्व सामा – चकेवा की हुई शुरुआत, गांवों में गूंजने लगे गीत

भाई – बहन के प्रेम का लोकपर्व सामा – चकेवा की हुई शुरुआत, गांवों में गूंजने लगे गीत

जे टी न्यूज़
ताजपुर ,समस्तीपुर :जिले के ताजपुर प्रखंड एवं नगर परिषद क्षेत्र में छठ पर्व के समापन के साथ ही भाई – बहन के प्रेम का लोक पर्व सामा – चकेवा शुरू हो गया है। इस पर्व को लेकर गांव – गांव में शाम से देर रात तक सामा – चकेवा के गीत गूंजने लगे हैं। कार्तिक पूर्णिया तक प्रत्येक दिन शाम ढ़लते ही घरों की महिलाएँ सामा – चकेवा की गीत गाती है। उसी दिन विभिन्न नदियों व कई जगह खेतों में सामा – चकेवा की प्रतिमा का विसर्जन किया जाता है। रक्षाबंधन व भैया दूज की तरह सामा – चकेवा भी भाई – बहन के पवित्र प्रेम का प्रतीक पर्व है। छोटी – छोटी बच्चियों के साथ ही उम्रदराज महिलाएं भी इस पर्व को बड़े ही उल्लास से मनाती है। इस पर्व को मनाने के लिए छोटी छोटी बच्चियाँ व महिलाएं टोली बनाकर मिट्टी के बने सामा – चकेवा की मूर्तियों को डाले में सजाकर रखती है। इसके बाद कार्तिक पूर्णिया तक पूरे विधि – विधान से गीत नाद के साथ सामा – चकेवा खेलकर पर्व मनाते हैं।इस पर्व के माध्यम से बहने अपने भाई की खुशहाल जीवन के लिए मंगल कामना करती है।

 

यह पर्व भाई – बहन के प्रेम और स्नेह को मजबूत करता है। प्रखंड एवं नगर परिषद क्षेत्र के विभिन्न गांव एवं वार्ड में मनाया जाता है । इधर पूछे जाने पर कारीगर लक्ष्मी पंडित , महेश पंडित आदि ने बताया कि हम लोगों को सामा चाकेवा बनाने में जितना मेंहनत और लागत पड़ता है उसके हिसाब से मजदूरी नहीं मिल पाता है। उन्होंने बताया कि गांव घर में सामा चकेवा मात्र 60, 70 रुपया में बिकता है।

 

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