सांप्रदायिकता संसद में भी सर चढ़ कर बोलने लगा
सांप्रदायिकता संसद में भी सर चढ़ कर बोलने लगा

आलेख : प्रभुराज नारायण राव
बसपा सांसद कुंवर दानिश अली के साथ भारतीय जनता पार्टी के दक्षिण दिल्ली के सांसद तथा दिल्ली के अपराध जगत के ख्याति प्राप्त शख्सियत जिसके कार गुजारियों से तुगलकाबाद की जनता वाकिफ रमेश बिधूड़ी जो संसद के अंदर जिस असंसदीय शब्दों का इस्तेमाल किया और भारतीय जनता पार्टी की मंत्री परिषद सहित उनका पूरा संसदीय कुनबा यह देख चेहरे पर मुस्कान भरता रहा । बगल में बैठे पूर्व कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद या स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन के मुस्कुराते चेहरे यह साबित करते रहे थे कि यह असंसदीय शब्द रमेश बिधूड़ी का नहीं बल्कि भारतीय जनता पार्टी और मोदी सरकार के शब्द हैं । जिस तरीके से संसद के अंदर में सांप्रदायिकता का माहौल रमेश बिधूड़ी ने बनाया , जिस तरीके से एक मुसलमान सांसद को गालियां दी , आतंकवादी तथा उग्रवादी करार दिया।यह स्पष्ट कर रहा था कि भारतीय जनता पार्टी और केंद्र की मोदी सरकार सांप्रदायिकता का खेल न केवल देश के अंदर बल्कि संसद में भी खुल्लम खुल्ला खेलना शुरू कर दिया है।
ब्रिटिश हुकूमत के मिला एफ के खिलाफ आजादी के लड़ाई जब देश लड़ रहा था तो 1915 में मदन मोहन मालवीय ने हिंदू महासभा बनाई और तभी से देश में हिंदू राष्ट्र और मुस्लिम राष्ट्र की बातें होने लगी क्योंकि उसके पहले 1906 में मुस्लिम लीग की भी स्थापना हो चुकी थी जिसे मुस्लिम राष्ट्र की कल्पना की थी पूरी आजादी की लड़ाई में 1915 में बनी हिंदू महासभा या फिर 1925 में बनी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के किसी भी नेता में देश की आजादी के संग्राम में हिस्सा नहीं लिया बल्कि अंग्रेजों की फूट डालो और राज करो नीति को मजबूती प्रदान करने के लिए देश में हिंदू राष्ट्र की स्थापना की मांग करते रहे सच है आजादी की लड़ाई के दौर में जो एक कतरा खून तक नहीं बढ़ाया लाखों लोगों के शहादत के बाद लाखों लाख लोगों की गिरफ्तारियां के बाद देश को आजादी मिली लेकिन संघ और हिंदू महासभा का एक भी कोई कार्यकर्ता स्वाधीनता आंदोलन का सेनानी नहीं हुआ जिसने 15 अगस्त 1947 मैं मिला आजादी के बाद मंत्र 5 महीने बाद 30 जनवरी 1948 को देश की आजादी के नायक महात्मा गांधी की हत्या कर दी इस विचारधारा के लोग आज देश की गाड़ी पर बैठकर शासन चला रहे हैं जिनका आदर्श हिटलर है और जो धार्मिक उन्माद के आधार पर सत्ता को कब्जा कर करना एक मात्र मकसद समझते हैं इनका चरित्र दोहरी नीति वाली है ये जो कहते हैं , वह करते नहीं है और जो करते हैं , वह करते नहीं है।
बाबा साहब भीमराव अंबेडकर के नेतृत्व में बनी बना भारत का संविधान जो इस देश की आत्मा है आजादी के बाद इस संविधान के रास्ते पर देश आगे बढ़ रहा है । आज उस बाबा साहब के संविधान को पूरी तरह मिटा कर हिंदुत्व वादी संविधान मनुस्मृति को स्थापित करना चाहते हैं ।जो मनुस्मृति में साफ लिखा गया है कि भगवान के मुंह से छत्रीय , हृदय से ब्राह्मण , जांघ से वैश्य तथा पैर से शुद्ध पैदा हुए हैं ।यानी मनु स्मृति के अनुसार हमारा धर्म वर्णों में बटा हुआ है। यानी की जातियों में बटा हुआ है। दुनिया के मात्र दो ऐसे देश है । जिस देश में हिंदू हैं और वहां जाति व्यवस्था के आधार पर मानव को देखा जाता है। ये दोनों हैं भारत और नेपाल। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भारतीय जनता पार्टी मोदी सरकार के माध्यम से देश में हिंदुत्व को स्थापित करना चाहती है यानी मनु स्मृति को लागू करना चाहती है । जिस के खिलाफ देश के समाज सुधारकों की धारा ने जाति उत्पीड़न , महिला उत्पीड़न के खिलाफ , शिक्षा के लिए लड़ाइयां लड़ी । राजा राममोहन राय , ज्योति बा फूले , पेरियार , सावित्रीबाई फुले , बाबासाहेब अंबेडकर , संत रविदास , संत कबीर जैसे समाज सुधारक लोग इसके अगवा के रूप में संघर्ष किए।
बाबा साहब भीमराव अंबेडकर द्वारा लिखित भारत के संविधान में धर्मनिरपेक्षता का सार्वजनिक जीवन में बड़ा ही महत्व है। जबकि संघ और भाजपा सांप्रदायिकता के समर्थक धर्मनिरपेक्षता के विरोधी , पूंजीपति जमींदार समर्थक मजदूर किसान विरोधी , मनु स्मृति समर्थक शुद्ध विरोधी , फासिस्टवाद के समर्थक समाजवाद के विरोधी , एकात्मक वाद के समर्थक संघीय ढांचे के विरोधी विचारधारा को लेकर के पूरे समाज को एक विकृत दिशा देने में लगे हुए हैं । किसी असंतुलित मानसिकता वाले व्यक्ति के द्वारा एक मूर्ति को तोड़ने के सवाल को पूरे समुदाय से जोड़कर यानी कि एक धर्म विशेष के द्वारा मूर्ति को तोड़ने का मुद्दा बना दिया जाता है और जब केंद्र की मोदी सरकार के केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह के द्वारा खुलेआम यह कहना कि मुसलमान ने मूर्ति को तोड़ा है और इसमें विपक्षी एकता इंडिया के लोगों का उनको सहयोग है । तो यह क्या साबित करता है । इस तरीके के समाज तोड़क विचार वाले लोग आज पूरे देश में नफरत के बीच हो रहे हैं ।सांप्रदायिक उन्माद फैलाकर उसके आग में देश को जला रहे हैं और यह देश जलाने वाली पार्टी की सरकार के मंत्री , सांसद खुलेआम लोकसभा में इस आग की चिंगारियां फैला रहे हैं । तो ऐसी स्थिति में देश को बचाने का काम देश के धर्मनिरपेक्ष शक्तियां बाबा साहब भीमराव अंबेडकर के संविधान के सहारे एकजुट होकर इस सरकार को देश की गद्दी से उतारने के लिए विपक्ष की गठबंधन इंडिया के नेतृत्व में मजबूत संघर्ष खड़ा किए बगैर हम अपना देश जिसकी अनेकता में एकता ही विशेषता रही है। हमारी सभ्यता और संस्कृति की रक्षा खुद को करनी है और हमें अपनी देश की सार्वभौमिकता की रक्षा भी खुद को करने के लिए मोदी सरकार को गद्दी से उतरना ही होगा ।
