संयुक्त किसान मोर्चा और केंद्रीय ट्रेड यूनियनों का 25 सितम्बर को बेतिया में पश्चिम चम्पारण जिला कन्वेंशनp

संयुक्त किसान मोर्चा और केंद्रीय ट्रेड यूनियनों का 25 सितम्बर को बेतिया में पश्चिम चम्पारण जिला कन्वेंशन


जे टी न्यूज, बेतिया: 24 अगस्त को नई दिल्ली ताल कटोरा स्टेडियम में संयुक्त किसान मोर्चा और केंद्रीय ट्रेड यूनियनों का संयुक्त सम्मेलन आयोजित हुआ था। सम्मेलन ने सर्व समिति से संयुक्त आंदोलन चलाने और उसे अपने जुझारुपन और बुलंदियों तक ले जाने का निर्णय लिया है । उसने तय किया की हम केंद्र सरकार के मजदूर और किसान विरोधी नीतियों के खिलाफ इस आंदोलन को देश के कोने-कोने तक ले जाएंगे। किसानों के ऐतिहासिक संघर्ष चल रहे थे , तो उस समय मजदूर वर्ग ने उन आंदोलनों को सक्रिय रूप से समर्थन दिया था। एसकेएम के नेतृत्व में आयोजित धरना, प्रदर्शनों ,आंदोलन आदि के तमाम कार्यक्रमों को संपूर्ण मजदूर वर्ग ने भी अपना जबरदस्त समर्थन दिया था । बाद के अवसरों पर एसकेएम ने भी ट्रेड यूनियनों के संयुक्त मंच द्वारा आयोजित संघर्षों तथा आंदोलन को अपना अविचल समर्थन दिया था ।
देश के इन तमाम उत्पादक वर्गों के इन संघर्षों तथा आंदोलन ने अपना साझा शत्रु सरकार की कॉर्पोरेट सांप्रदायिक धूरी के खिलाफ कार्रवाई में मजदूर किसान एकता को और सुदृढ़ बनाया। यही थी वह पृष्ठभूमि जिसमें गत 13 जुलाई को केंद्रीय ट्रेड यूनियन तथा एसकेएम की एक संयुक्त बैठक हुई थी। जिसमें इन दोनों मंचों ने मोदी सरकार की मजदूर विरोधी, किसान विरोधी तथा जन विरोधी नीतियों के खिलाफ संयुक्त रूप से लड़ने के अपने संकल्प को दोहराया था और मोदी सरकार के नीतिगत हमले का मुकाबला करने के लिए अब तक की इस ऐतिहासिक संयुक्त कन्वेंशन को आयोजित करने का निर्णय लिया था। सम्मेलन ने यह नोट किया कि संयुक्त किसान मोर्चा के शानदार संघर्ष का दुनिया में कोई मिशाल नहीं है ।इसके चलते सरकार को अपने कृषि कानून को निरस्त करना पड़ा था ।मजदूरों के एकजुट संघर्ष बीपीसीएल , सी ई एल और इस्पात संयंत्र जैसे अनेक सार्वजनिक क्षेत्र के उपकरणों में निजीकरण की प्रक्रिया को रोकने में सफल रहे । हालांकि यह प्रक्रिया इस समय के लिए रुकी रही है । विशाखापट्टनम इस्पात संयंत्र को निजीकरण से बचाने का संघर्ष अब जन संघर्ष बन गया है । महाराष्ट्र , उत्तर प्रदेश , पुडुचेरी , जम्मू कश्मीर , चंडीगढ़ तथा हरियाणा में बिजली कर्मचारियों के संघर्ष ने सरकारों को अपना कदम पीछे खींचने पर मजबूर कर दिया है । अपने जुझारू संघर्षों के जरिए विभिन्न राज्यों में योजना मजदूरों ने अपनी मानदेय राशि में बढ़ोतरी करवाने समेत अपनी अनेक मांगे मनवाने में सफलता पाई है । किसानो और मजदूरों के प्रतिरोध आंदोलन के अनुभवों का आकलन करते हुए सम्मेलन ने जोर देकर कहा कि करोड़ों मेहनतकशों को शामिल करते हुए यह एक संयुक्त एकजुट संघर्ष ही सरकार के नीतिगत हमलो को रोक सकता है ।
केंद्र की मोदी सरकार और इसी पार्टी के नेतृत्व करने वाली राज्य सरकारों को बनाए रखने के लिए समाज में जहर भर कर सांप्रदायिक और विभाजनकारी ध्रुवीकरण को सक्रिय रूप से पाल पोस हो रही है और मजदूर किसानों तथा आम जनता को विभाजित कर रही है । ताकि उनका ध्यान ज्वलंत मुद्दों से हटाया जा सके और कॉर्पोरेट के लाभ के लिए एकजुट संघर्षों को कमजोर किया जा सके । कॉरपोरेट की मिल्कियत वाले मुख्य धारा के मीडिया तथा शासक पार्टी के अंध भक्तों की सक्रिय समर्थन से इसे अंजाम दिया जा रहा है । मणिपुर की सांप्रदायिक झड़पें अभी भी जारी है । इन दोनों के चलते जान माल की भारी हानि हुई है और महिलाओं का उत्पीड़न हुआ है । हरियाणा के नूहू में हाल के सांप्रदायिक दंगे और देश के अन्य हिस्सों में भी हुई इसी तरह की उकसावेवाजी , इसी तरह के विभाजनकारी तथा धुर्वीकरणों मुखी नीतिगत निजाम द्वारा अंजाम दिया जा रहा है । कन्वेंशन ने देश के संघीय ढांचे पर बढ़ते हमले का भी संज्ञान लिया ।कन्वेंशन ने जोर देकर कहा कि कानूनी न्यूनतम वेतन बढ़ाने और सामाजिक सुरक्षा कदमों का सार्वभौमीकरण करके और किसान समुदाय में व्याप्त बदहाली को समाप्त करने के लिए सरकारी फंडिंग तथा ऐसे ही दूसरे कदमों जैसे कि कृषि लागतों समेत किसानों को सब्सिडी देने , सरकारी बाजारों को पुन बहाल करने और समुचित एमएसपी आदि के जरिए उसे आम आदमी जो हमारी राष्ट्रीय दौलत का निर्माण करता है और राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था को गतिमान रखता है के हाथों में और ज्यादा पैसा देने के जरिए नव उदारवादी नीतियों के व्यवस्थित संकट की बुराई से राष्ट्रीय अर्थ व्यवस्था की रक्षा की जाय। कन्वेंशन ने कहा कि कॉर्पोरेट घरानों तथा पूंजीपत्तियां पर लगने वाले करो में बढ़ोतरी करके तथा उत्तराधिकार कर को बहाल करना चाहिए। यहां तक की नोबेल पुरस्कार विजेता भी इसी तरह की सलाह दे रहे हैं । कन्वेंशन का यह भी मानना है कि यह आवश्यक होगा की हम सब अपने-अपने ढंग से कम करें । ताकि हमारे साझा अनुभव आम जनता के समक्ष यह संदेश बनकर सामने आए कि सत्ता में बैठे जो लोग देश और उसकी जनता को अभूतपूर्व संकट और बर्बादी में धकेल रहे हैं । उनके खिलाफ हवा को मोड़ा जा सके। मजदूर किसानों के संयुक्त कन्वेंशन ने सर्व समिति से मेहनतकश जनता की मांगों से संबंधित एक मांग पत्र सभी मजदूरों के लिए स्वीकृत किया । जिसके अनुसार 26000 रुपए प्रतिमाह न्यूनतम वेतन तथा 10000 रुपए पेंशन सुनिश्चित किया जाय , किसानों के उपज की खरीद की गारंटी के साथ सी 2 +50% पर सभी कृषि फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य एम एस पी की गारंटी , चार श्रम संहिताओं तथा बिजली संशोधन विधेयक 2020 को निरस्त करने 600 रुपए दैनिक मजदूरी पर मनरेगा के तहत 200 दिन काम की गारंटी करने , शहरी क्षेत्र तक इसका विस्तार करने , गरीब , मध्यम वर्ग के किसानों और खेत मजदूरों को कृषि कर्ज से मुक्ति दिलाने की मांगे शामिल हैं। इन सभी मांगों को शोषित पीड़ित लोगों तक ले जाने के लिए हमें प्रखंडों तथा गांवों तक जाना होगा । कन्वेंशन ने आगामी 26 से 28 नवंबर को देश के सभी राज्यों के राजभवनों पर रात दिन होने वाले महापड़ाव में बड़ी संख्या में पटना चलने का प्रस्ताव पारित किया। कन्वेंशन ने यह भी प्रस्ताव लिया कि दिसंबर और अगले जनवरी महीने में पश्चिम चम्पारण के गांव गांव में बड़े पैमाने जन कारवाइयां आयोजित किया जाय ।

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