सुसरुपुर की घटना शर्मसार करने वाली
सुसरुपुर की घटना शर्मसार करने वाली

जे टी न्यूज़ , पटना : निर्वस्त्र कर के बेरहमी से पीटा गया एक दलित महिला को। इतने पर भी गुस्सा शांत नहीं हुआ तो मुँह पर पेशाब भी कर किया गया।ये घटना है खुसरुपुर की जो पटना से 22-२३ किलोमीटर की दूरी पर अवस्थित है।और ये है 21वीं सदी की सभ्य समाज की कहानी।इसप्रकार की घटना सुनते ही मन घृणा से लबलबा जाता है।ये इकलौती घटना नहीं है।आये दिन ऐसी घटनाओं से आखबार के पन्ने भरे रहते हैं।बहुत सारे वारदात तो इससे भी घृणित होते हैं लेकिन प्रकाश में नहीं आते हैं। हिन्दी भाषी राज्यों में खासकर बिहार और यु पी सामंती संस्कृति वाला राज्य रहा है।जहाँ सामंती सोंच होती है वहाँ मानुवाद का अपेक्षाकृत अधिक प्रभाव देखने को मिलता है।खास बात ये है कि बिहार में सरकार तो बदल गयी लेकिन सिस्टम तो वही पुराना है! नहीं तो पुलिस प्रशासन की लापरवाही ऐसी नहीं होती।पुलिस विभाग में भी मनुवादी सोंच जहाँ जड़ जमाए बैठा है वहाँ शोषित तबके को न्याय मिलना दूर की बात हो जाती है। मैंने देखा दलित समाज के कुछ नौजवान घटना के विरुद्ध नारेबाजी कर रहे हैं।

न्याय की माँग कर रहे हैं।माकपा का एक जाँच दल भी वहाँ पहुँच कर मुआईना कर रहा है।भाजपा वालों की जुबान पर ताला लटका हुआ है।चूँकि यहाँ हिन्दू-मुस्लिम वाला जा़यका तो है नहीं !खुसरुपुर में उसी व्यवस्था का एक नमूना दिखाई दिया जिस व्यवस्था को पूरे भारत में ये लागू करना चाहते हैं।अतः वो चुप रहना ही मुनासिबा समझते हैं। चाहे जो भी हो।घटना की जितना निन्दा की जाय कम है।प्रशासन को सुसरुपुर में उचित जाँचोपरान्त सख्त होने की आवश्यकता है।साथ ही जनवादी ताकतों को सामाजिक न्याय के संघर्ष को भी तेज करना होगा ताकि ऐसी घटना की पुनरावृत्ति न हो।

