सीयूएसबी की शोद्यार्थी संजुक्ता जेना को अंतर्राष्ट्रीय कांफ्रेंस में मिला बेस्ट पेपर पुरुस्कार

सीयूएसबी की शोद्यार्थी संजुक्ता जेना को अंतर्राष्ट्रीय कांफ्रेंस में मिला बेस्ट पेपर पुरुस्कार

जे टी न्यूज़, गया :दक्षिण बिहार केन्द्रीय विश्वविद्यालय सीयूएसबी के भौतिकी विभाग की शोधार्थी छात्रा संजुक्ता जेना को भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान धनबाद झारखंड में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय कांफ्रेंस में बेस्ट पेपर पुरुस्कार मिला है | जन सम्पर्क पदाधिकारी पीआरओ‌मो. मुदस्सीर आलम ने बताया कि “एडवांस इन स्पेक्ट्रोस्कोपिक टेक्निक्स एंड मैटेरियल्स-2024” विषय पर संजुक्ता ने अपने शोध पर्यवेक्षक डॉ. विजय राज सिंह सह प्राध्यापक,

भौतिकी विभाग के संरक्षण में पत्र प्रस्तुत किया है | इस शोध पत्र में संजुक्ता ने उन्नत तकनीक का उपयोग करके सघन मेमोरी स्टोरेज डिवाइस के रूप में एमएनएसआई के उपयोग को विस्तार से समझाने की कोशिश की है। बेस्ट पेपर पुरस्कार मिलने पर संजुक्ता को प्रमाण पत्र, स्मृति चिन्ह और 2000/-.रुपये के नकद पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।

संजुक्ता की उपलब्धि पर कुलपति प्रो. कामेश्वर नाथ सिंह के साथ विभाग के अध्यक्ष प्रो वेंकटेश सिंह, प्रयवेक्षक डॉ. विजय राज सिंह एवं अन्य प्राध्यापकों ने बधाई तथा शुभकामनाएं दी है । फ़िलहाल संजुक्ता यूजीसी-डीएई सीएसआर इंदौर द्वारा स्किर्मियन से संबंधित प्रायोजित परियोजना में डॉ. विजय राज सिंह की देखरेख में काम कर रही हैं ।

 

आईआईटी धनबाद में आयोजित इस सम्मेलन में आठ देशों, अमेरिका, जापान, चिली, दक्षिण अफ्रीका, ताइवान, नेपाल, कोरिया और भारत आईआईटी वाराणसी, आईआईटी पटना, आईआईटी धनबाद, बीएचयू, इलाहाबाद विश्वविद्यालय, इंडियन ऑयल लिमिटेड, असम सेंट्रल यूनिवर्सिटी, बीआईटी मेसरा, डीआरडीओ दिल्ली, आईआईटी गुवाहाटी, एनपीएल दिल्ली, पुणे यूनिवर्सिटी आदि के प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। इस सम्मेलन में 300 शोध पत्रों में से केवल 100 शोध पत्र ही अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में प्रस्तुतीकरण हेतु स्वीकार किये गये। संजुक्ता द्वारा प्रस्तुत शोधपत्र को जूरी द्वारा कई मापदंडों पर मूल्यांकन किया गया है

 

। सलाहकार समिति में विभिन्न राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय विश्वविद्यालयों के प्रोफेसर शामिल थे। विस्तृत जानकारी देते हुए डॉ. विजय राज सिंह ने बताया कि स्किर्मियन भौतिकी में एक आकर्षक घटना है जिसमें टोपोलॉजिकल रूप से स्थिर सॉलिटॉन, या एक जटिल आकार वाले एकल कण का निर्माण शामिल है। स्किर्मियन विभिन्न सामग्रियों में जैसे मैग्नेट, सुपरकंडक्टर्स और यहां तक कि बोस-आइंस्टीन कंडेनसेट में भी पाए जा सकते हैं। स्किर्मियन्स की कल्पना करना आसान नहीं है।लेकिन उन्हें टोपोलॉजिकल इंडेक्स का उपयोग करके गणितीय रूप से वर्णित किया जा सकता है, जो एक गैर-शून्य पूर्णांक है जो फ़ील्ड लाइनों की घुमावदार संख्या को मापता है। स्किर्मियन्स में सकारात्मक या नकारात्मक घुमावदार संख्याएं हो सकती हैं, और वे परमाणुओं के एक समूह से दूसरे समूह में फिसलकर छोटे कणों की तरह घूम सकते हैं।

 

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