आक्रोषपूर्ण माहौल में किसान महापंचायत का हुआ समापन

आक्रोषपूर्ण माहौल में किसान महापंचायत का हुआ समापन


जे टी न्यूज़, पटना: गांवों में घुसकर रोज-रोज हो रहे पुलिसिया तांडव पर अविलंब रोक लगाओ। बनारपुर,कोच्चाढ़ी और मोहनपुरवां के गिरफ्तार किसानों को वेशर्त अविलंब रिहा करो। चुनाव बाद बैठकर सारे मुद्दे पर संजीदगी के साथ बात हो,पूरी घटना की निष्पक्ष जांच हो और दोषी को कठोर सजा दी जाए। किसानों की 11 सूत्री मांगों को पूरा किया जाए। वर्ना चुनाव बाद चौसा के किसानों के साथ न सिर्फ बिहार बल्कि यूपी और संपूर्ण भारत के किसान चौसा पहुंचेंगे और चौसा का मैदान एक बार फिर रणक्षेत्र बनेगा और जुझारू किसान आंदोलन का गवाह बनेगा। जिसकी सारी जवाबदेही इस कांड का सबसे बड़ा खलनायक,दोषी,महाभ्रष्ट अनुमंडलाधिकारी बक्सर और जिला समाहर्ता बक्सर होंगे। यूपी के किसान हजारों-हजार ट्रैक्टर लेकर जब कर्मनाशा नदी को पार करेंगे, तो चौसा में आर-पार की लड़ाई होगी। उक्त बातें बक्सर के होमगार्ड मैदान में विशाल किसान महापंचायत को संबोधित करते हुए संयुक्त किसान मोर्चा के राष्ट्रीय नेता भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहीं। उन्होंने बनारपुर, कोच्चाढी और मोहनपुरवां के किसानों को ललकारते हुए कहा कि पुलिस से डरो मत,गांव छोड़कर भागो मत, गांव में डटे रहो। अभी तो लड़ाई शुरू हुई है,आगे भीषण लड़ाई हमे लड़ना है।अपनी चट्टानी एकता के बल पर हम लड़ाई जीतेंगे। हम लड़ेंगे,हम जीतेंगे। उन्होंने कहा कि टूटे हुए सामानों को संजोकर रखो,उसे प्रदर्शनी के रूप में संपूर्ण बिहार में घूमाएंगे, किसानों को दिखाएंगे और उन्हें गोलबंद करेंगे। मोदी-नीतीश के राज में किसानों पर कैसे-कैसे जुल्म हो रहे हैं। किसानों से जबरन जमीन छीनना मोदी की पहली गारंटी है। इनकार करने पर बनारपुर,कोच्चाढी और मोहनपुरवा की तरह पुलिसिया तांडव की दुसरी गारंटी है। 90 साल की बुढी माता पर जिस तरह से लाठियों की वर्षा की गई और घरों में घुसकर जवान लड़कियों के साथ जिस तरह की बदसलूकी की गई। 2 साल के बच्चों को भी नहीं बक्शा गया। इन सभी घटनाओ को देखकर सभी किसान नेताओं की आंखों से आंसू की अश्रु धारा बहने लगी। किसान महापंचायत को संबोधित करते हुए संयुक्त किसान मोर्चा के नेता और ऑल इंडिया किसान सभा के राष्ट्रीय सचिव बलदेव सिंह निहालगढ़ ने गुरु गोविंद सिंह के साथ ही बिहार और पंजाब के रिश्ते की चर्चा करते हुए,चौसा में जिला प्रशासन की देखरेख में हुई शर्मनाक और दर्दनाक घटना की घोर निंदा करते हुए कहा कि क्या आजाद भारत में अन्नदाता के साथ ऐसा सलूक हो? इसीलिए लाला लाजपत राय,उधम सिंह और शहीदे आजम सरदार भगत सिंह ने अपने प्राणों की आहुति दी थी। शायद गुलाम भारत में भी ऐसी घटना नहीं हुई थी,जो कुछ बक्सर का डी एम,एस पी और एस डी ओ ने यहाँ करवाया है। मोदी जी के गाय को भी नहीं बक्सा गया बल्कि लाठियों की वर्षा कर उसे भी बुरी तरह पीटा गया। चौसा थर्मल पावर के सीईओ,अनुमंडलाधिकारी, एस पी, जिला समाहर्ता और सत्ता के दलालों ने मिलकर जिस तरह से भूमि अधिग्रहण में लूट मचाया।

भारत सरकार के कैग रिपोर्ट ने किसानों की ऑंखे खोल दी। किसान भुमि अधिग्रहण मे हुई लुट की जांच और दोषी लोगों पर कार्रवाई की मांग कर रहे थे। इसीलिए किसानों का मुंह बंद करने हेतु जिला प्रशासन ने जलियांवाला बाग कांड से भी भयानक कांड को अंजाम दिया।आतंकवादी, नक्सलवादी की तरह सुनियोजित साजिश के तहत चुनाव आचार संहिता लगने का इंतजार कर रही थी और ज्योही आचार संहिता की घोषणा हुई और होली मे कोर्ट बंद होने के बीच इस कांड को अंजाम देने का तिथि तय किया।उससे साफ है कि मोटी रकम लेकर यह कांड करवाया गया है।अभी तक देश के पश्चिम में हरियाणा-पंजाब में किसान आंदोलन का केंद्र था।संयुक्त किसान मोर्चा का अब चौसा नया केंद्र खुलेगा। चौसा ने पुरे बिहार को आंदोलित कर दिया है। संयुक्त किसान मोर्चा पंजाब हरियाणा बॉर्डर की तरह बक्सर में नया मोर्चा खोलेगा। इतनी बड़ी घटना के बाबजूद बिहार दौड़े पर रोज- रोज आने बाले मोदी और नीतीश की जुबान बंद क्यो है?क्या किसानों से जबरन जमीन छीनना और दाम मांगने पर चौसा जैसी घटना करना ही मोदी-नीतीश की सबसे प्रधान गारंटी है।

ऑल इंडिया किसान महासभा के सचिव ईश्वरी प्रसाद कुशवाहा ने किसान महापंचायत को संबोधित करते हुए कहा कि जिस तरह से बनारपुर में गोदी के बच्चों को भी नहीं बक्सा गया।पालतू जानवरों को भी नहीं छोड़ा और जिस तरह से घरों में घुसकर तोड़-फोड़ और लूट-पाट मचाई गई है।जिला प्रशासन ने एक षड्यंत्र के तहत जो कुछ गांवों में घुसकर नंगा नृत्य किया है। वह दिल दहलाने बाली घटना है।यह मणिपुर की घटना से भी ज्यादा क्रूर और हृदय विदारक है। इन घटनाओं को देख सुनकर लोगों के रोंगटे खड़े हो जाते हैं। आज पूरे देश के किसान चौसा की घटना से आक्रोशित हैं। मोदी-नीतीश की सरकार अविलंब कार्रवाई नहीं की तो भारी कीमत उन्हें चुकानी होगी। बक्सर ही नहीं संपूर्ण बिहार से डबल इंजन की सरकार का हम पोल खोलेंगे।उन्हें बेनकाब करेंगेऔर उन्हें दंडित करेंगे।किसानों को उन्हें सबक सिखाना होगा और दंडित करने के लिए किसानों से हम आह्वान करेंगे। झारखंड किसान सभा के नेता के डी सिंह ने कहा कि चौसा के किसान तुम मत घबराना। अब जिला प्रशासन को घबराने दो। जिस दिन चौसा के मैदान में किसानों के जंग का ऐलान होगा और यूपी से हजारों ट्रैक्टर कुच करेंगे,तो पलामू के रास्ते झारखंड से भी हजारों ट्रैक्टर सासाराम के रास्ते चौसा कूच करेंगे। उन्होंने कहा कि जब जिला प्रशासन अपनी पूरी ताकत से इस महापंचायत को विफल करने की पुरजोर कोशिश की,फिर भी उनके हर चाल को नाकाम करते हुए आज हजारों-हजार की संख्या में सरदार भगत सिंह के उत्तराधिकारी के रूप में आज यहां आप पधारे हैं। हम आपके जज्बात को सलाम करते है। उन्होंने जिला प्रशासन को चुनौती देते हुए कहा कि किसानों के मसीहा स्वामी सहजानंद सरस्वती की यह कर्मभूमि है।तुम लाख प्रयास करोगे किसानो को दबाने की,हम उससे भी दोगुनी ताकत के साथ उठ खड़े होंगे,तुम से मुकाबले के लिए।भौरे के खोते में ढेला फेक कर तुमने हमें उत्तेजित करने की कोशिश किया है।अन्नदाता से जब अंग्रेज नहीं जीत सके, तो तुम किस खेत के मूली हो।अन्नदाता से लड़ाई मे जब रावण की तरह अहंकारी मोदी को भी झुकना पड़ा। तो बक्सर जिला प्रशासन की क्या औकात है? किसान महापंचायत की अध्यक्षता बनारपुर की महान वीरांगना बूढी माता तेतरी देवी ने की। जबकि मंच संचालन बिहार राज्य किसान सभा के महासचिव अशोक प्रसाद सिंह ने की।

किसान महापंचायत को भारतीय किसान यूनियन के बिहार प्रभारी दिनेश सिंह,क्रांतिकारी किसान यूनियन के शशिकांत, ऑल इंडिया किसान मजदूर सभा के राम कैलाश कुशवाहा, पंजाब किसान सभा के सरदार गुरप्रीत सिंह,अखिल भारतीय खेत मजदूर किसान सभा के अशोक बैठा, भारतीय किसान मजदूर विकास संगठन के अनिल कुमार सिंह,ए आई के के एम एस के इंद्रदेव सिंह,ऑल इंडिया अग्रगामी किसान सभा के रामायण सिंह,ऑल इंडिया किसान महासभा के उमेश सिंह,उत्तर बिहार संयुक्त किसान संघर्ष मोर्चा के प्रो आनंद किशोर,ऑल इंडिया किसान फेडरेशन के भूप ना सिंह, कैमूर किसान यूनियन के अभिमन्यु सिंह, जय किसान आंदोलन के ऋषि आनंद,बिहार प्रदेश लोक समिति के शिवाजी सिंह, मेगा औद्योगिक पार्क प्रभावित किसान संघर्ष मोर्चा के गोपाल शर्मा,बिहार प्रदेश लोक समिति के शिवजी सिंह,एन ए पी एम के महेंद्र यादव,प्रगतिशील किसान संघ के रामचंद्र आजाद, लोक संघर्ष मोर्चा के देव कुमार यादव,भारत भूमि संघर्षशील किसान यूनियन के भोला यादव,किसान एकता मंच मसौढ़ी के उमेश सिंह,जन मुक्ति संघर्ष वाहिनी के मणिलाल, बिहार किसान संघर्ष मोर्चा के कमलेश सिंह, किसान संघर्ष समिति कजरा के डॉ दिनकर सिंह आदि ने किसान महापंचायत को संबोधित किया और अपना महत्वपूर्ण सुझाव भी दियाऔर
आंदोलन को तेज करने का संकल्प लिया।

जिला प्रशासन ने किसान महापंचायत को विफल करने की हर तरह के तिकड़म एवं लोगों को भयभीत करने डराने धमकाने की कोशिश की। देशभर के किसान नेताओं के बीच उनके द्वारा भूमि अधिग्रहण में किए गए करोड़ों-करोड़ रुपए की लूट का पोल न खुले। देशभर में उनकी काली करतूत की चर्चा न हो।इस लिए अनुमति नही दी जा रही थी। परंतु संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा महापंचायत को हर हालत में अनुमति नहीं मिलने पर भी दिल्ली की तरह सड़कों पर ही महापंचायत लगाने का ऐलान से और आई बी की रिपोर्ट से डर कर जिला प्रशासन ने एक दिन पहले शाम में शहर से दूर महा पंचायत लगाने की अनुमति दी। ताकि हम स्थान विशेष का प्रचार-प्रसार भी नहीं कर सके।शाम मे अनुमति देने के साथ ही दर्जनों गाड़ी पुलिस लेकर अनुमंडलाधिकारी चल पड़े किसानो को डराने ताकि न किसान आयेगे न पंचायत सफल होगा।बनारपुर,कोच्चाढी और मोहनपुरवा जाकर घरों का दरवाजा तोड़कर जबरन घरों में घुसकर मारपीट करना शुरू किया।तोड़-फोड़,गाली-गलौज और गोली मारने की धमकी दिया गया कि कोई भी कल किसान महापंचायत में नहीं जाएगा। जो भी जाएगा उसको गोली मार देंगे। रातभर घर-घर जाकर लोगों को आतंकित करना, मारपीट करना और जान से मारने की धमकी देना ताकि लोग डर से गांव छोड़ दें। पुलिस के आतंक से भयभीत होकर लोगों ने गांव से पलायन करना ही मुनासिब समझा। राष्ट्रीय नेता राकेश टिकैत,बलदेव सिंह निहालगढ़ सहित सभी राष्ट्रीय नेताओं की अगवानी में हजारों किसानों ने सैकड़ो गाड़ी लेकर कर्मनाशा नदी के किनारे स्वागत में खड़े थे। वहां से विशाल काफिला जब चौसा के लिए कुच किया तो रास्ते में तीन जगह सघन जांच के नाम पर जानबूझकर महापंचायत को विफल करने के नियत से विलंब करने की कोशिश की गई। एक-एक गाड़ी को जांच के नाम पर 10 से 15 मिनट लगाया जाता था। ताकि समय पर यह नहीं पहुंच सके। फलतः आधा गाड़ी रास्ते में ही रह गई और घंटों विलंब के बाद किसी तरह टिकैत जी के साथ हमारे राष्ट्रीय नेता बनारपुर पहुंचे। सभी गांवों में जाकर सैकड़ो घरों में घूम-घूम कर उन्होंने अपनी आंखों से पुलिसिया नंगा नाच को देखकर दंग रह गए। विभिन्न क्षेत्रों से गाड़ी मे सवार होकर इस महापंचायत में भाग लेने के लिए आ रहे लोगों जांच के नाम पर गाड़ी को बक्सर नहीं पहुंचने दिया।शहर वासियों को आतंकित करने के लिए शहर के सभी चौक-चौराहों पर भी पुलिस का कैंप लगाया गया। लोग भयभीत होकर घरों से नहीं निकले। फिर भी अपने को छुपते-छुपाते हजारों-हजार किसान महापंचायत मे पहुंचे।आज किसानों का महा पंचायत में शामिल होना,अजूबा घटना थी। किसानों पर हुए जुल्मो-सितम को हम योंही भुला नहीं देंगे।चौसा अब किसान आंदोलन के लिए ध्रुव तारा बन कर सुबे बिहार के किसानों को आलोकित करेगा। किसानों को लड़ने के लिए उत्प्रेरित करेगा।अपना हाथ तुड़ाए 80 साल की बूढी तेतरी देवी हाथ में प्लास्टर लगे जब अपनी बातें कहने उठी तो पूरे मैदान में सन्नाटा छा गया। उनके मुख से घटना की आंखों देखा वर्णन सुनकर लोगों के रोंगटे खड़े हो गए। लोग काफी आक्रोशित हो गए।किसान नारे लगाने लगे अब तक जिसका खून न खौला,खून नहीं वह पानी है। पुरे

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