ऐप आधारित कैब चालकों (ओला,उबर) का सम्मेलन पटना में आयोजित
ऐप आधारित कैब चालकों (ओला,उबर) का सम्मेलन पटना में आयोजित

जे टी न्यूज, पटना: पटना के ईको पार्क के गेट नंबर 1 के पास ऐप आधारित कैब चालकों (ओला,उबर)का सम्मेलन ऑल इंडिया रोड ट्रांसपोर्ट वर्कर्स फेडरेशन बिहार के महासचिव राजकुमार झा की अध्यक्षता में संपन्न हुई! इस सम्मेलन के माध्यम से कैब चालकों ने अपनी समस्याओं के निवारण हेतु एक नए यूनियन का निर्माण किया जिसका नाम “बिहार स्टेट मोटर कैब चालक संघ” रखा गया ! इस नए संगठन को CITU एवं AIRTWF की और से संबद्धता प्रदान की गई !इस सम्मेलन में चालकों ने सर्वसम्मति से कन्हैया कुमार को महासचिव एवं गौरव कुमार को अध्यक्ष के रूप में मनोनित किया ! उपाध्यक्ष के रूप में प्रभात कुमार को मनोनित किया गया !सम्मेलन में मौजूद चालकों ने OLA कम्पनी पर आरोप लगाते हुए कहा की मौजूदा समय में ये कंपनी सिर्फ चालकों का शोषण करने का काम कर रही है और इसको सुनने वाला कोई नहीं है!पहले यहां कंपनी का ऑफिस हुआ करता था जहां चालक अपनी शिकायत लेकर जाते थे मगर कंपनी ने पटना से अपना ऑफिस भी हटा लिया! आज कंपनी चालक की कमाई से 40% तक कमीशन काट लेती है!

OLA कंपनी के पदाधिकारियों और दलालों के मिली भगत से नियम कानून को ताक पर रखकर प्राइवेट नंबर की गाड़ियों को भी OLA में जोड़ा जा रहा है! साथ हीं कंपनी की ओर से राइडिंग किलोमीटर की चोरी भी की जा रही है! कैब चालकों ने ये आरोप लगाया की हम राइडिंग तो ज्यादा करते हैं परंतु कंपनी की ओर से हमे पैसा काम दिया जाता है!यूनियन के नवनिर्वाचित महासचिव कन्हैया कुमार ने कहा की आज हमने CITU एवं AIRTWF से संबद्धता ली है तो निश्चित रूप से हमारे संगठन को एक मजबूत ताकत मिली है और हम अपने संगठन की ओर से परिवहन विभाग से ये मांग करते है OLA एवं उबर कंपनियों की मनमानी पर अगर जल्द अंकुश नहीं लगाया गया तो कैब चालक आंदोलन करने को मजबूर हो जाएंगे! संगठन के अध्यक्ष गौरव कुमार एवं उपाध्यक्ष प्रभात कुमार ने कहा की ओला एवं उबर कंपनियों की मनमानी पर रोक लगाते हुए परिवहन विभाग को ओला कैब का यात्री किराया एवं कंपनी का कमीशन जल्द तय करना चाहिए! फेडरेशन के महासचिव राजकुमार झा ने सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा की ये पूंजीपतियों की सरकार है और इस सरकार में हर तरफ गरीबों को लुटा जा रहा है! श्री झा ने कहा की अगर वाहन चालक से एक छोटी सी गलती भी हो जाती है तो उसे तुरंत चालान काट दिया जाता है मगर एक पूंजीपति एक ऐप बनाकर हजारों चालकों की खून पसीने की गाढ़ी कमाई का 40% कमीशन के रूप में लूट लिया जाता है और सरकार के नुमाइंदे चुप हैं! श्री झा ने सरकार से ये मांग किया की केरल के तर्ज पर यहां भी सरकार की ओर से एक ऐप लांच करनी चाहिए ताकि यात्रियों को सुविधा भी मिले और चालकों का शोषण भी बंद हो!


