अंधेर नगरी चौपट राजा ,यह कहावत चरितार्थ होती है समस्तीपुर कॉलेज समस्तीपुर में।

यूजीसी के गाइड-लाइन को ठेंगा दिखाने का कार्य करवाया प्राचार्य व कुलपति ने, बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार के संकेत ।

अंधेर नगरी चौपट राजा ,यह कहावत चरितार्थ होती है समस्तीपुर कॉलेज समस्तीपुर में।

यूजीसी के गाइड-लाइन को ठेंगा दिखाने का कार्य करवाया प्राचार्य व कुलपति ने, बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार के संकेत ।

जेटी न्यूज
समस्तीपुर:अंधेर नगरी चौपट राजा जी हां, यह कहावत आज सत्य प्रतीत हो रही जिले के नामचीन महाविद्यालय समस्तीपुर कालेज समस्तीपुर में। ज्ञात हो कि समस्तीपुर कालेज, समस्तीपुर के एक मात्र प्रोफेसर एवं पीजी रसायन शास्त्र विभाग के छात्रों का संबल प्रोफेसर (डा.) कुशेश्वर यादव‌ का प्रिंसिपल के रूप में स्थानांतरण जीएमआरडी कालेज, मोहनपुर, समस्तीपुर किया जा चुका है। वे 21/09/2024 को वहां का प्रभार भी ले चुके हैं। इधर 20/09/2024 से 23/09/2024 तक पीजी रसायन शास्त्र के दूसरे एवं चौथे सेमेस्टर की प्रायोगिक परीक्षा संपादित होने की तिथि भी जारी की जा चुकी थी‌ और प्रधानाचार्या के हस्ताक्षर से एक्सटर्नल लोगों को पत्र भी जारी हो चुका था। डा. यादव ने द्वितीय सेमेस्टर (2023-25) की प्रायोगिक परीक्षा दिनांक 20/09/2024 को ही संपन्न करा लिया था। चतुर्थ सेमेस्टर (2022-24) की दोनों स्पेशल प्रायोगिक परीक्षा 22/09/2024 को वर्तमान प्रधानाचार्या के आदेशानुसार गेस्ट फैकल्टी डा. अनिल कुमार सिंह द्वारा ली गई ,

जबकि एक्सटर्नल के रूप में श्री निर्मल प्रसाद सिंह एवं श्री कृष्ण कुमार सिंह उपस्थित थे। ज्ञातव्य है कि स्नातकोत्तर की कोई भी परीक्षा स्नातकोत्तर के छात्रों को पढ़ाने वाले शिक्षक ही ले सकते हैं और वे दूसरे विश्वविद्यालय से होने चाहिए। विदित हो उक्त दोनों एक्सटर्नल जीवन में कभी भी स्नातकोत्तर का कोई क्लास नहीं लिया है। अनिल कुमार सिंह को भी मात्र अण्डरग्रेजुएट तक का ही अनुभव प्राप्त है। इन तीनों को चुकि स्नातकोत्तर के सिलेबस की भी जानकारी नहीं है अतः इन तीनों ने अंधेर नगरी चौपट राजा वाली कहानी को ही चरितार्थ किया है। सिलेबस के अनुसार इनोरगेनिक एवं ऑर्गेनिक दोनों स्पेशल में 25-25 मार्क्स के दो-दो प्रश्न, जिनमें दोनों में एक-एक प्रिपरेशन भी होने चाहिए। वो भी मौखिक प्रश्न के लिए 15 मार्क्स एवं नोट बुक के लिए 5 मार्क्स आवंटित हैं। उक्त शिक्षकों ने दोनों स्पेशल से प्रिपरेशन वाले प्रश्न को ही उड़ा दिया तथा इनोर्गेनिक केमेस्ट्री में इंटर-फेयरिंग रेडिकल भी नहीं डाला, जबकि सिलेबस अनुसार पीजी फाइनल के छात्रों के लिए यह आवश्यक है। छात्रों के अनुसार इन तीनों ने सिलेबस के इतर एक अपना ही स्पेशल मार्किंग पेटर्न अपनाया है जो इस प्रकार है: (i) दो के जगह मात्र एक प्रश्न — 15 मार्क्स (ii) मौखिकी — 50 मार्क्स (iii) नोट बुक — 05 मार्क्स। सूत्रों की माने तो अन्य विषयों में बॉटनी, जूलॉजी, फिजिक्स एवं साइकोलॉजी विभाग में भी इसी प्रकार परीक्षा ली गई है ।


वाह रे एक्सपर्ट एक्सटर्नल एवं इन्टर्नल आप ने तो यूजीसी एवं सिलेबस कमीटी के मेंबर्स को भी मूर्ख सावित कर दिया। विषय विशेषज्ञ हों तो आप लोगों जैसे! इसमें मात्र और मात्र प्रिंसिपल लोगों का दोष है। जहां उनको कम से कम छः शिक्षकों को यात्रा भत्ता एवं होलटेज के साथ पारिश्रमिक देना पड़ता जो निश्चय ही एक मोटी रकम होती! जबकि आप लोगों को शायद आधा पारिश्रमिक पर ही खटवा लेगी। वाह रे बिहार की शिक्षा व्यवस्थऐसे में दोष केवल प्राचार्य का ही नहीं बल्कि ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के कुलपति का भी है क्योंकि कुलपति के नेगन में सारी प्रक्रियाएं पूरी होती है सारी बातों की जानकारी कुलपति को पत्राचार के जरिए दी जाती है बावजूद आखिर कुलपति ने ऐसा होने कैसे दिया ज्ञात हो कि कुलपति स्वयं में विद्वान आदमी होते हैं बावजूद आखिर क्यों कहीं ना कहीं कुलपति प्राचार्य एवं कॉलेज के वरीय पदाधिकारी के मिली भगत से ऐसा खेल खेला गया जिन्होंने यूजीसी के गाइडलाइन को भी ठेंगा दिखाते हुए कुकरित किया क्या इस पर कार्रवाई होगी यह तो आने वाला समय ही बताएगा

Related Articles

Back to top button