प्रधानाचार्य प्रोफेसर (डा.) कुशेश्वर यादव‌ ने महाविद्यालय परिसर में राष्ट्रीय ध्वज फहराया

प्रधानाचार्य प्रोफेसर (डा.) कुशेश्वर यादव‌ ने महाविद्यालय परिसर में राष्ट्रीय ध्वज फहराया


जे टी न्यूज़, समस्तीपुर : गणतंत्र दिवस के शुभ अवसर जी.एम.आर.डी. कालेज मोहनपुर, समस्तीपुर के प्रधानाचार्य प्रोफेसर (डा.) कुशेश्वर यादव‌ ने महाविद्यालय परिसर में राष्ट्रीय ध्वज फहराया। इस अवसर पर उपस्थित कालेज एनसीसी यूनिट ने तिरंगा झंडे को सलामी दी।
शिक्षक, शिक्षकेत्तर कर्मचारियों, छात्र-छात्राओं एवं आगत सम्मानित अतिथियों को संबोधित करते हुए प्रधानाचार्य ने कहा कि 26 जनवरी हमारे लिए एक गौरवशाली दिन है। इसी दिन 1950 को हमारे प्रथम राष्ट्रपति डॉ राजेन्द्र प्रसाद ने 21 तोपों की सलामी के साथ तिरंगा झंडा फहराकर भारत को पूर्ण गणतंत्र घोषित किया, जो एक ऐतिहासिक क्षण था। उसके बाद से हर वर्ष इस दिन को गणतंत्र दिवस के रूप में मनाया जाता है क्योंकि आज ही के दिन 1950 में लम्बे संघर्ष के बाद आजाद भारत का संविधान लागू हुआ था। आज हम सौभ्रेण रिपब्लिक हैं अर्थात ऐसा रिपब्लिक जो अपना फैसला खुद ले सकता है, किसी के दबाव एवं दहशत में आकर नहीं। उन्होंने ने आगे कहा कि यह संविधान ही है जो देश के नागरिकों को लोकतांत्रिक तरीके से अपनी सरकार चुनने का अधिकार देता है। यह संविधान ही है जो हमें मौलिक अधिकारों की गारंटी देता है। देश की सरकार किन नियमों पर चलेगी व बनेगी, उसकी शक्तियां एवं सीमाएं क्या होंगी, कानून कायदे क्या होंगे; इन सब का उल्लेख संविधान में ही तो होता है। संविधान से ही ये सारी व्यवस्थाएं चलती हैं। भारतीय संविधान के तहत नागरिकों को सबसे से पहले समानता का अधिकार मिला। मौलिक अधिकारों के रूप में स्वतंत्रता का अधिकार, शोषण के विरुद्ध अधिकार, शिक्षा एवं संस्कृति का अधिकार और संवैधानिक उपचारों का अधिकार भी मिला। लेकिन स्वतंत्रता के लगभग आठ दशक बाद भी क्या हम अपने आप को संविधान के अनुरूप बना पाए हैं? आज भी यह एक यक्ष प्रश्न बना हुआ है। इसके लिए हमें अपने सामाजिक, सांस्कृतिक एवं राजनीतिक स्तर पर व्याप्त जाती व्यवस्था, वर्ण व्यवस्था एवं पोषण व्यवस्था के जटिल ताना बाना को धराशाई करना होगा अन्यथा बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर सपना कभी पूरा नहीं हो पाएगा। उन्होंने ने ठीक ही कहा है कि संविधान चाहे जितना ही अच्छा हो, यदि उसे कार्यान्वित करने वाले लोग बुरे हैं, तो वह निस्संदेह बुरा हो जाता है। आज जब हम गणतंत्र दिवस मनाते हैं तो यह मात्र एक राष्ट्रीय पर्व नहीं होता, वल्कि यह हमारे भीतर देश भक्ति, जिम्मेदारी और एकता का भाव जागृत करता है। आज हमें यह संकल्प लेना चाहिए कि हम भारत को एक ऐसा राष्ट्र बनाएंगे, जहां पर हर व्यक्ति को अपने सपनों को पूरा करने का समान अवसर मिले। उन्होंने ने शिक्षक एवं कर्मचारी बंधुओं से कहा कि उनकी उपादेयता छात्र-छात्राओं को लेकर ही है। अतः वे उनके हित को सर्वोपरि स्थान दें। शिक्षकों के लिए उन्होंने ने टीचर्स डायरी लागू की बात कही। जिसमें शिक्षक प्रत्येक दिन अपने वर्किंग आवर रिकॉर्ड करते रहेंगे। इस प्रकार प्रत्येक दिन प्रत्येक घंटी में उनके द्वारा छात्रों के साथ संपादित कार्यों का ब्योरा मिलता रहेगा।उन्होंने ने आगे बताया कि अब महाविद्यालय को नया फुटबॉल स्टेडियम एवं एनसीसी यूनिट मिल चुका है जो यहां के छात्र-छात्राओं के लिए अनेक सेवाओं में जाने का मार्ग प्रशस्त करेगा। मेरा प्रयास है कि यहां एन.ओ.यू. इग्नू एवं प्राक्क शिक्षा केन्द्र भी स्थापित हो ताकि यहां के बच्चे सेवाओं में रहते हुए ऊंची शिक्षा प्राप्त कर और ऊंचे ओहदे पा सके। इस पावन अवसर पर उपस्थित सभी अतिथियों से उन्होंने छात्र-छात्राओं को महाविद्यालय भेजने का आग्रह किया ताकि महाविद्यालय परिसर में उनके द्वारा चलाए गए मुहिम “शैक्षिक माहोल की पुनर्स्थापना” पूर्णतः सकार हो सके। कार्यक्रम समापन के पूर्व विगत दो सत्रों के हरेक विषय में महाविद्यालय में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले, साइन्स एवं आर्ट्स दोनों स्ट्रीम के ओभर आल टापर्स, एनसीसी एवं एनएसएस के बेस्ट कैडेट्स तथा खेल में महाविद्यालय को अलग पहचान दिलाने वाले छात्र-छात्राओं को मेडल, मोमेंटो एवं प्रशस्ति पत्र देकर उनकी हौसला अफजाई की गई।

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