महाकुंभ में चाक-चौबंद के बावजूद भगदड़, तो यहाँ भी भगदर हो सकती है(वीडियो को ध्यानसे देखिए)?*

महाकुंभ में चाक-चौबंद के बावजूद भगदड़, तो यहाँ भी भगदर हो सकती है(वीडियो को ध्यानसे देखिए)?*

 

जे टी न्यूज, रोसड़/ समस्तीपुर:
ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय,दरभंगा की एक अंगीभूत इकाई यू. आर. कॉलेज, रोसड़ा में बीए प्रथम सेमेस्टर, सत्र 2024-2028 की परीक्षा के अंतिम दिन दिनांक: 29/01/2025 को प्रथम पाली में लगभग 2500/ परीक्षार्थी परीक्षा देकर बाहर आ रहे हैं ( *वीडियो को ध्यान से देखिए*) तथा द्वितीय पाली में लगभग 1500 परीक्षार्थी परीक्षा देने के लिए प्रवेश कर रहे हैं। एक साथ 4000/ चार हजार परीक्षार्थियों को नियंत्रित करना कॉलेज प्रशासन के लिए चुनौती भरा कार्य बना हुआ है। कॉलेज में मात्र एक ही दरवाजा है। कॉलेज के सामने सिंगल लेन सड़क है। सत्तर प्रतिशत से अधिक छात्राएं हैं। उनके अभिभावक सड़क के दोनों ओर अपने वाहन लेकर खड़े रहते हैं। जिसके कारण सड़क पर दोनों ओर से दो घंटे तक जाम लग जाता है।
( *पुलिस प्रशासन का सहयोग नहीं के बराबर)*


प्रथम पाली की परीक्षा समाप्त होने के बाद सभी परीक्षार्थियों को मैदान में लाकर खड़ा कर दिया जाता है। इसके बाद द्वितीय पाली के परीक्षार्थियों को अंदर बुलाया जाता है। इसके बाद प्रथम पाली के परीक्षार्थियों को बाहर निकाला जाता है। मेरे प्रभारी प्रधानाचार्य बनने से पहले यहाँ 1000/1200 परीक्षार्थी होन पर बगल के एक निजी विद्यालय को किराए पर लेकर परीक्षा कराई जाती थी। अप्रैल 2024 में मैंने कार्यभार संभाला। उसके बाद चार-पांच परीक्षाएं हो चुकी हैं। लगातार पच्चीस सौ से अधिक छात्रों का परीक्षा केंद्र रहा है। हमारे आंतरिक संसाधनों से काम हुआ है। पहले से बने भवनों से काम हो रहा है।
– सवाल यह है कि अगर अब तक कोई बड़ी घटना नहीं हुई है तो यह कॉलेज प्रशासन की सक्रियता और जिम्मेदारी का नतीजा है।
– लेकिन भविष्य में कोई बड़ी भगदड़ या अप्रिय घटना न हो इसकी गारंटी कौन लेगा?
– अगर कोई अप्रिय घटना होती है तो उसके लिए कौन जिम्मेदार होंगे?
– हमने तत्काल आदेश दिया है कि वैकल्पिक व्यवस्था के तहत दूसरा गेट खोला जाए।
– स्टाफ काउंसिल की बैठक में हम निर्णय ले चुके हैं। यहां दिक्कत यह है कि काम मत करो।
– अगर काम करो तो छात्र संघ/आरटीआई/विश्वविद्यालय/सरकार/राजभवन/विजिलेंस आदि आपको चारों तरफ से घेर लेते हैं कि तुमने यह कैसे किया? नतीजतन कोई काम नहीं करना चाहता।
– महाविद्यालय के विकास के लिए ऐतिहासिक काल से कहीं से कोई धनराशि नहीं मिली है।

– 70% छात्राओं की फीस माफ है। सरकार ने पिछले चार सत्रों का भरपाई यानि बकाया राशि नहीं दिया है।
– छात्राओं को परिचय पत्र, एनएसएस ड्रेस, टेबल, बेंच, बिजली, पानी, साफ-सफाई आदि किसके पैसा से दिया जाए, जो सारी सुविधा दी जा रही है ?

– सभी छात्र संगठन/आरटीआई कार्यकर्ता/संवेदनशील नागरिक आदि उपरोक्त मुद्दों पर मौन हैं। यानी इन लोगों की नजर में कक्षाएं चले या न चले, महाविद्यालय का काम चले या न चले – इससे कोई फर्क नहीं पड़ता।

– सभी संवेदनशील और न्यायप्रिय संगठनों और नागरिकों की जिम्मेदारी है कि आम लोगों के दान और सहयोग से खोला गया उच्च शिक्षण संस्थान आज मरणासन्न स्थिति में है।
जागरूक और सतर्क रहने की जरूरत है।*

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