कालाजार उन्मूलन अभियान को लेकर 6 प्रखंडों में 60 दिनों तक होगा छिड़काव
कालाजार उन्मूलन अभियान को लेकर 6 प्रखंडों में 60 दिनों तक होगा छिड़काव
जे टी न्यूज, सुपौल:
जिले में कालाजार उन्मूलन कार्यक्रम के तहत अभियान लिए सिंथेटिक पायरोथायराइड (एसपी) कीटनाशक छिड़काव जिले के कालाजार प्रभावित 6 प्रखंडों में शुरुआत की गई अभियान 18 फरवरी से शुरू होकर 19 अप्रैल तक अगले 60 दिनों तक प्रथम चरण का छिड़काव होगा सिविल सर्जन डॉ ललन कुमार ठाकुर ने बताया अभियान के दौरान लोगों को मच्छरदानी लगाकर सोने, घरों के आसपास साफ-सफाई रखने और नालियों को साफ रखने के लिए स्वास्थ्य कर्मी के माध्यम से लोगों को जागरूक किया जाएगा . ताकि, लोगों को वेक्टर जनित रोग जैसे कालाजार, मलेरिया, डेंगू से बचाव के लिए प्रेरित किया जा सके। उन्होंने बताया छिड़काव के पूर्व घर की अन्दरूनी दीवार की छेद/दरार बंद कर दें, घर के सभी कमरों, रसोई घर, पूजा घर, एवं गोहाल के अन्दरूनी दीवारों पर छः फीट तक छिड़काव अवश्य कराएं एवं छिड़काव के दो घंटे बाद घर में प्रवेश करें, छिड़काव के पूर्व भोजन सामग्री, बर्तन, कपड़े आदि को घर से बाहर रख दें,ढाई से तीन माह तक दीवारों पर लिपाई-पोताई ना करें, जिसमें कीटनाशक (एस.पी) का असर बना रहे. जिला में 6 प्रखंड में कालाजार नियंत्रणार्थ होगा एस. पी. छिड़काव:
जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. दीप नारायण राम ने बताया जिला में 6 प्रखंड के 15 राजस्व ग्रामों में कालाजार नियंत्रणार्थ एस. पी. छिड़काव किया जाएगा .जिसमें सदर सुपौल, किशनपुर, राघोपुर, त्रिवेणीगंज, बसंतपुर, निर्मली के 26,289 घरों के,152107 पापुलेशन के बीच छिड़काव किया जाएगा. जिसके लिए कुल 1426 किलो एस.पी. उपलब्ध कराई गई है तथा कुल 9 दल बनाए गए हैं. कालाजार के कारण :
भीडीसीओ विपिन कुमार ने बताया कालाजार मादा फ्लेबोटोमस अर्जेंटिपस (बालू मक्खी) के काटने के कारण होता है, जो कि लीशमैनिया परजीवी का वेक्टर (या ट्रांसमीटर) है। किसी जानवर या मनुष्य को काट कर हटने के बाद भी अगर वह उस जानवर या मानव के खून से युक्त है तो अगला व्यक्ति जिसे वह काटेगा वह संक्रमित हो जायेगा। इस प्रारंभिक संक्रमण के बाद के महीनों में यह बीमारी और अधिक गंभीर रूप ले सकती है, जिसे आंत में लिशमानियासिस या कालाजार कहा जाता है। कालाजार उन्मूलन के लिए भारत सरकार का मानक प्राप्त :
भीडीसीओ सिकंदर कुमार ने बताया जिले में लगातार छिड़काव के कारण कालाजार उन्मूलन के लिए भारत सरकार का जो मानक है उसे प्राप्त किया जा चुका है। मरीजों की संख्या शून्य करने के लिए लगातार प्रयास किया जा रहा है। जिले में वर्ष 2021 में 3, 2022 में 10, 2023 में 5, 2024 में 3 मरीज मिले हैं। सरकार द्वारा रोगी को मिलती है आर्थिक सहायता :
भीडीसीओ अनीसा भारती ने बताया कालाजार से पीड़ित रोगी को मुख्यमंत्री कालाजार राहत योजना के तहत श्रम क्षतिपूर्ति के रूप में पैसे भी दिए जाते हैं। बीमार व्यक्ति को 6600 रुपये राज्य सरकार की ओर से और 500 रुपए केंद्र सरकार की ओर से दिए जाते हैं। यह राशि वीएल (ब्लड रिलेटेड) कालाजार में रोगी को प्रदान की जाती है। वहीं चमड़ी से जुड़े कालाजार (पीकेडीएल) में 4000 रुपये की राशि केंद्र सरकार की ओर से दी जाती है। कालाजार के लक्षण :
– लगातार रुक-रुक कर या तेजी के साथ दोहरी गति से बुखार आना।
– वजन में लगातार कमी होना।
– दुर्बलता।
– मक्खी के काटे हुए जगह पर घाव होना।
– व्यापक त्वचा घाव जो कुष्ठ रोग जैसा दिखता है।
– प्लीहा में नुकसान होता है।

