बिहार के अतिथि सहायक प्राध्यापकों का 6 मार्च से धरना सारी तैयारियां पूरी
बिहार के अतिथि सहायक प्राध्यापकों का 6 मार्च से धरना सारी तैयारियां पूरी
जे टी न्यूज, पटना:
बिहार राज्य विश्वविद्यालय सहायक अतिथि प्राध्यापक संघ के आह्वान पर 6 मार्च से राज्य के विभिन्न विश्वविद्यालयों में कार्यरत अतिथि प्राध्यापकों द्वारा धरना प्रदर्शन की शुरुआत की जाएगी। यह धरना उनके द्वारा वर्षों से दी जा रही सेवाओं को नियमित करने की प्रमुख मांग को लेकर आयोजित किया जा रहा है। प्रमुख मांगें,अतिथि प्राध्यापकों की सेवा नियमितीकरण
विगत कई वर्षों से बिहार राज्य के विश्वविद्यालयों में कार्यरत अतिथि प्राध्यापकों ने उच्च शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इनकी नियुक्ति विश्वविद्यालय चयन समिति द्वारा यूजीसी मानदंडों के अनुसार आरक्षण-रोस्टर का पालन करते हुए की गई थी। पिछले छह वर्षों से लगातार शिक्षक की कमी के बावजूद इन्होंने बिना किसी विघ्न के गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान की है। अतिथि प्राध्यापकों की मेहनत और समर्पण को देखते हुए अब उनकी सेवा को स्थायी किया जाए। उनकी मांग है कि उन्हें 65 वर्ष की आयु तक नियमित कर उनके भविष्य को सुरक्षित किया जाए। सकारात्मक कदम की अपील
अतिथि प्राध्यापक संघ का कहना है कि अगर सरकार उनकी सेवाओं को नियमित करती है, तो यह न केवल इन शिक्षकों के लिए एक सराहनीय कदम होगा, बल्कि राज्य के शिक्षा क्षेत्र को भी नई दिशा और मजबूती मिलेगी। इसके साथ ही यह कदम उच्च शिक्षा के क्षेत्र में सुधार के रूप में देखा जाएगा। धरना कार्यक्रम धरना कार्यक्रम विश्वविद्यालयों के अध्यक्षों द्वारा आह्वान किए जाने पर शांतिपूर्ण तरीके से आयोजित किया जाएगा। यह धरना दो दिनों तक चलेगा, जिसमें प्रदेश के प्रमुख नेता और सामाजिक कार्यकर्ता इस आंदोलन को समर्थन देने के लिए उपस्थित रहेंगे। समर्थन में शामिल होने वाले प्रमुख :- बीएन मंडल विश्वविद्यालय के अध्यक्ष और संयोजक डॉ. सतीश कुमार दास
तिलका मांझी विश्वविद्यालय, भागलपुर के अध्यक्ष डॉ. आनंद आजाद
कामेश्वर सिंह संस्कृत विश्वविद्यालय के अध्यक्ष डॉ. मुकेश प्रसाद निराला
मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा के अध्यक्ष डॉ. बच्चा रजक
बीआर अंबेडकर बिहार विश्वविद्यालय के अध्यक्ष डॉ. ललित किशोर
पटना विश्वविद्यालय के अध्यक्ष डॉ. विद्यानंद विधाता
वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय, आरा के अध्यक्ष डॉ. आदित्य आनंद
सरकार से अपेक्षाएं
अतिथि प्राध्यापकों की यह भी मांग है कि उनके कार्य के आधार पर उन्हें राज्य विश्वविद्यालय सेवा आयोग द्वारा दी गई स्थायी नियुक्तियों में वेटेज दिया जाए, ताकि उनके भविष्य में कोई असमंजस न हो। इनकी नियुक्तियों में समय-समय पर दिए गए योगदान को ध्यान में रखते हुए सरकार को शीघ्र निर्णय लेना चाहिए।
इस धरने के माध्यम से अतिथि प्राध्यापकों ने अपनी आवाज़ उठाई है और सरकार से अपनी सेवा को स्थायी बनाने की अपील की है। यह आंदोलन न केवल उनके लिए बल्कि बिहार की शिक्षा व्यवस्था के सुधार के लिए भी महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है। अतिथि प्राध्यापकों का मानना है कि यदि सरकार उनके इस उचित और सटीक अनुरोध पर ध्यान देती है, तो शिक्षा क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव आ सकता है।



