अनुभव हीन कंपनी को टेंडर देने का परिणाम  : ऑनलाइन परीक्षा में व्यापक गड़बड़ी, नियम के विरुद्ध मिले प्रश्न, उत्तर विकल्प, और उनके क्रम भी समान

एक छात्र ने कहा बदल दिया गया उत्तर पत्रक 

नई दिल्ली। हाल ही में राष्ट्रीय स्तर पर संपन्न सीबीटी (कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट) परीक्षा में एक हैरतअंगेज मामला उजागर हुआ है। जिसमें राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित होने वाले परीक्षाओं केलिए तय मानक और नियमों घोर अवहेलना किये जाने का मामला प्रकाश में आया है। बताते चलें कि 22 फरवरी, 2025 को पूरे भारत में कंप्यूटर आधारित टेस्ट यानी CBT की परीक्षा आयोजित की गई थी। जिसमें एक बड़े घोटाले की कहानी सामने आ रही है।

पिछले महीने हुए सीबीटी परीक्षा के दौरान पाया गया कि सभी प्रश्नों का क्रम और उत्तर विकल्प और विकल्पों के क्रम सभी परीक्षा केंद्रों में समान पाए गए। जिससे पूरी परिक्षा और मूल्यांकन प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो गए हैं। जानकार सुत्रों के मुताबिक एचयूआरएल जूनियर इंजीनियर अस्सिटेंट की ऑनलाइन भर्ती परीक्षा विगत 22 फरवरी, 2025 को देश के चार राज्यों दिल्ली, यूपी, बिहार और झारखंड में आयोजित की गयी। कंप्यूटर आधारित टेस्ट यानी सीबीटी की इस परीक्षा केलिए दिल्ली, लखनऊ, रांची और पटना में परीक्षा केन्द्र बनाए गये थे। सभी केन्द्रों पर प्रश्न, प्रश्नों के क्रम, उत्तर विकल्प एवं उनके क्रम तक में कोई बदलाव नहीं किया गया। यह कारनामा बेहद चिन्तित करने वाला है। भला यह कैसे संभव हुआ यह सवाल हर जुबान पर तैर रहा है।

जानकार बताते हैं कि हर ऑनलाइन या ऑफलाइन परीक्षा के नियमों के अनुसार इस तरह की परीक्षाओं में प्रश्न एक समान हो सकते है मगर प्रश्नों के क्रम या उत्तर विकल्प एवं विकल्पों के क्रम एक समान कभी नहीं हो सकते।

निःसंदेह यह परीक्षा आयोजक संस्थान और परीक्षा के नीति नियंताओं के भ्रष्टाचार मे लिप्त होने और पूरी प्रक्रिया में तय नियमों व मानकों के खुल्लम खुल्ला अनदेखी किये जाने की ओर इशारा करता है और पूरी कहानी देश में चल रहे परीक्षा एवं मूल्यांकन प्रक्रिया पर सवाल खड़ा करता है।

 

करीबी व जानकार सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक एचयूआरएल जूनियर इंजीनियर असिस्टेंट की ऑनलाइन भर्ती परीक्षा करवाने का टेंडर जयपुर की कंपनी डीसीएस टेक्नोसिस प्राइवेट लिमिटेड. को दिया गया था। सूत्रों की माने तो इस कंपनी को ऑनलाइन परीक्षा प्रक्रिया कराने का टेंडर नियमों को ताक पर रखकर दिया गया था। इसकेलिए एफओआई में उपरोक्त क्लॉज डालकर हेरफेर किया गया है जो आमतौर पर किसी भी सरकारी टेंडर का मानक हिस्सा नहीं होता है। नियमानुसार सीबीटी यानि कंप्यूटर आधारित ऑनलाइन परीक्षा कराने वाली कंपनी का अनुभव कम से कम 5 वर्ष का होना चाहिए, जबकि डीसीएस टेक्नोसिस प्राइवेट लिमिटेड. के पास इस तरह की परीक्षा आयोजित कराने का सिर्फ 2 साल का ही अनुभव था। यह आज तक के इतिहास में पहली बार हुआ है कि महज दो साल का अनुभव रखने वाली कंपनी को इतनी बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गयी। इसके पुर्व न्यूनतम 5 साल का अनुभव रखने वाली कंपनियां ही इस तरह की परीक्षा आयोजित कराती रही हैं। सुत्र बताते हैं इसके अलावा भी उक्त कंपनी को टेंडर देने केलिए टेंडर के नियमों में भी कई तरह की गड़बड़ी की गई। जो पूरी प्रणाली पर एक बड़ा सवाल खड़ा करता है।

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