क्या लॉक डाउन पार्ट 2 की व्यवस्था शक्ति से लागू है कोरोना से जंग जितने के लिए?

अगर ऐसी ही स्थिति रही तो लॉक डाउन 3 और 4 के लिए भी हमें रहना होगा तैयार

आर.के.रॉय/संजीव मिश्रा

नई दिल्ली :

लॉकडाउन-1 की सफलता के बाद भारत सरकार ने एक बार फिर मंगलवार को 3 मई तक के लिए यानिब19 दिनों के लॉकडाउन की घोषणा की है।अमेरिका,इटली,स्पेन,ब्रिटेन सहित कई अन्य देशों में जहाँ आज कोरोना संक्रमितों की संख्या लाखों में है, मृतकों की संख्या बढ़ती ही जा रही है, वहीं मात्र लॉकडाउन से हमारे देश में संक्रमितों की संख्या 14 हजार के करीब है और मृतकों की संख्या करीब 415 ।ये सच है कि जिस प्रकार हमारे देश में स्वास्थ्य व्यवस्था के साधन काफी सीमित हैं,वैसे में यदि आंकड़ा बढ़ जाए तो यहां भारी तबाही मच सकती है।

हमने देखा कि 21 दिनों के पहले लॉकडाउन के बाद हमारी थोड़ी सी लापरवाही ने हमें 14 हजार के आंकड़े के करीब पहुंचा दिया है।हमने देखा कि लॉकडाउन-1 में जमातियों की नासमझी और फिर दिल्ली,मुंबई और कई शहरों से लाखों की संख्या में कोरोना को आमंत्रण देते हुए लोगों का पैदल ही अपने घरों को प्रस्थान करना।परिमाण,संक्रमितों की संख्या में बहुत बड़ा हिस्सा नासमझी और लापरवाही का है।इतनी बड़ी लापरवाही के लिए आखिर कौन लोग जिम्मेदार हैं ? आज नहीं तो कल दोषियों की खोज होनी चाहिए।

19 दिनों के लॉकडाउन-2 की घोषणा के साथ ही दिल्ली,मुंबई,अहमदाबाद सहित कई महानगरों में सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जी उड़ाते हुए लोग विभिन्न जगहों पर इकट्ठे हो गए। अभी दो दिन पूर्व ही हमने देखा कि कैसे लोग बांद्रा रेलवे स्टेशन पर हजारों की संख्या में लोग जमा हो गए ।
हम देख रहे हैं कि बैंकों में पैसे निकालने के लिए लंबी कतारें लग रही है, जनवितरण प्रणाली की दुकानों और सब्जी मंडियों में भीड़ लग ही रही है। ग्रामीण इलाकों में खेती से जुड़े मजदूर,अन्न के दानों को तरसती आबादी,या शहरों से लौटे ऐसे लोग जिनके पास रहने को मात्र दो कमरा है और अभी घर में 10-12 लोग मौजूद हैं,लॉक डाउन से बेपरवाह हैं।गांव और छोटे शहरों में सुबह और शाम ग्रामीण सड़कों पर झुंड के झुंड लोग आसानी से दिख जाते हैं।भागलपुर जिले के सबौर थाने क्षेत्र में एनएच 80 पर हाट लगवाया जा रहा जहां हजारों हजार की संख्या में लोग जमा हो रहे हैं ।


ऐसे में लॉकडाउन-2 कितना सफल हो पाएगा,कहना कठिन है।ये सच है कि लॉकडाउन की सफलता आम लोगों के सहयोग पर निर्भर करती है।परंतु क्या सरकार को लॉकडाउन-1 से सीखते हुए और लॉकडाउन-2 के होने वाले दुष्परिणामों पर विचार करते हुए, घोषणा से पूर्व इसे सफल बनाने के लिए हर संभव प्रयास नहीं करने चाहिए थे ?देश के कई हिस्सों में मजदूर आक्रोशित हैं,वो हिंसा पर उतारू हैं।देश के विभिन्न हिस्सों में छात्रावास में रहने वाले बच्चे अपने घर जाने को बेताब हैं।इसकी एक महत्वपूर्ण वजह है कि उन सबों को खाने की दिक्कत हो रही है।सरकार ने इस ओर बिल्कुल ही विचार नहीं किया।
न ही लॉकडाउन-1 और लॉकडाउन – 2 की घोषणा से पूर्व सरकार ने इसकी सफलता के लिए समुचित इंतजाम किए।
मध्यम वर्गीय लोग भी अब भारी दिक्कतों का सामना कर रहे हैं, उन्हें देखने वाला कोई नहीं ।


सरकारी गोदामों में अनाज सड़ रहा है,परंतु अफसोस कि सरकार उसे जरूरतमंदों तक पहुंचा पाने में अब तक असफल रही है।सरकार द्वारा किए गए प्रयास अब तक नाकाफी रहे हैं।
देश की वर्तमान स्थिति है कि सरकार मात्र लॉकडाउन की घोषणा कर कोरोना मुक्त हिंदुस्तान की बात कर रही है।इसमें कोई आश्चर्य की बात नहीं कि यदि वर्तमान स्थिति कायम रही तो देशवासियों को लॉकडाउन-3 और 4 का भी सामना करने के लिए तैयार रहना होगा। ऐसा ना हो हम केवल ये बता रहे हैं कि अगर स्थितयां नहीं बदली तो ये भी हो सकता है।


कोरोना से जंग में विभिन्न प्रदेशों और केंद्र की सरकार के द्वारा की जा रही तैयारी पर्याप्त नहीं है। स्वास्थय विभाग किस हालात में चल रहीं है किसी से छिपी नहीं है वेल्टीनेटर कि कितनी कमी है हमारे यहां सभी जानते हैं। हमे अपने संसाधनों को मजबूत करना ही होगा । केवल लॉक डाउन के सहारे नहीं रहा जा सकता है । ऐसे में लॉक डाउन पार्ट 2 जो शुरू हो चुकी है इसमें
वर्तमान हालात देख कर ये सवाल उठना लाजिमी है कि क्या ऐसे में कोरोना से जंग जीत पाएंगे हम ?

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