*सुनो मोदी सरकार, लॉक डाउन है अचूक इलाज, क्या इसी भरोसे बैठी सरकार?*

ठाकुर वरुण कुमार।

समस्तीपुर::- यह सवाल-वैश्विक महामारी कॅरोना की चपेट में पूरा विश्व है। मरनेवालों की संख्या के लिहाज से देखे तो सबसे ज्यादा तबाही अमेरिका में हो रही और फिर इटली, फ्रांस, स्पेन बगैरह। इस लिहाज से देखे तो भारत इसकी मार कम झेल रहा लॉक डाउन अचूक इलाज है इसी के भरोसे सरकार बैठी है स्वयम पीएम ने स्वीकारा है कि सीमित संसाधन है हमारे पास खैर लॉक डाउन का एक चरण पूरा कर दूसरे चरण का सामना कर रहे हैं देश मे तीन वर्ग है अमीर मध्यम गरीब। अमीरों को कोई फर्क नही पड़ता इस लॉक डाउन से माध्यम और गरीब बर्ग कई कई समस्याओं से जूझने लगा है।

रोज कमाने रोज खानेवालों की संख्या आधी आवादी की है तो किसी तरह कमाई कर जीवन यापन करनेवाले करोड़ो में है। इस लॉक डाउन में गरीब तबके की मदद के नाम पर राज्य सरकारें ऊंट के मुह में जीरा के समान सहायता कर रही मतलब जिनके पास राशन कार्ड है उन्हें परिवार के हर सदस्य को 5-5 किलो अनाज और परिवार के मुखिया को कोई 1 हज़ार तो कोई 5 हज़ार दे रही है मतलब कुछ हो रहा है पर मध्यवर्ग इस संकटकाल में सर्वाधिक संकट झेल रही न सरकार मदद कर रही न कोई और नतीजा है कि घरों में चूल्हे नही जल रहे अन्न अनाज के अभाव में भूखों मार रहे बच्चे दूध के लिये बिलख रहे है। कही इनसब का ख्याल किया बिना लॉक डाउन में बड़ी समस्या भुखमरी की समस्या कोरोना से भी ज्यादा भयावह न हो जाय।

कोरोना से ज्यादा भुखमरी से मौते होने लगे इस बीच पीएम ने राष्ट्र के नाम कई बार संबोधित किया पर इस गम्भीर विषय को छुआ नही। मतलब इस तबके की चिंता से खुद को अलग रखा या यह विषय उनके लिये कोई मायने नही रखता। जरूरत इस बात की है कि सरकार इस देश के असहाय लाचार गरीब मजदूर बेरोजगार किसान दिहाडी मजदूर निर्धन मध्यवर्ग की भी चिंता करे उनके घरों के चूल्हे जले अनाज दूध दवाई मिल अन्यथा इस देश मे कॅरोना से मरनेवालों की संख्या पर भुखमरी की तादाद भारी पड़ जाएगी।

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