अनुदान नहीं, वेतन और पेंशन चाहिए

बिहार के डिग्री कॉलेजों में शिक्षाकर्मियों का फिर आंदोलन

अनुदान नहीं, वेतन और पेंशन चाहिए / बिहार के डिग्री कॉलेजों में शिक्षाकर्मियों का फिर आंदोलन जे टी न्यूज, पटना :
बिहार के 220 अनुदानित संबद्ध डिग्री महाविद्यालयों में कार्यरत लगभग 25 हजार शिक्षक एवं शिक्षकेतर कर्मचारी एक बार फिर अपनी वेतन और पेंशन बहाली की मांग को लेकर आंदोलन की राह पर हैं। फैक्टनेब – बिहार राज्य संबद्ध डिग्री महाविद्यालय शिक्षक-शिक्षकेतर कर्मचारी महासंघ ने मई से चरणबद्ध तरीके से राज्यव्यापी जनजागरण और विरोध अभियान चलाने की घोषणा की है।

यह निर्णय मंगलवार को पटना के बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन, कदमकुआं में हुई फैक्टनेब की राज्य समिति की बैठक में लिया गया, जिसकी अध्यक्षता डॉ. शंभुनाथ प्रसाद सिन्हा ने की।

मांग: अनुदान नहीं, नियमित वेतन और पेंशन

फैक्टनेब के महासचिव प्रो. राजीव रंजन ने बताया कि राज्य के शिक्षकों को परीक्षा परिणाम आधारित अनुदान प्रणाली से हटाकर नियमित वेतन भुगतान और पेंशन सुविधा बहाल की मांग को लेकर शिक्षाकर्मी फिर से एकजुट हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन सिर्फ अधिकारों की लड़ाई नहीं, बल्कि उच्च शिक्षा की गरिमा बचाने का प्रयास भी है।

आंदोलन की रूपरेखा तय: चार जिलों में सभा

आगामी आंदोलन के तहत शिक्षाकर्मियों की जागरूकता और समर्थन जुटाने के लिए चार प्रमुख स्थानों पर आम सभाएं आयोजित होंगी:
12 मई – वीर कुंवर सिंह महाविद्यालय, विक्रमगंज (रोहतास)
13 मई – राजेन्द्र मंडप, गया
16 मई – बिहार विश्वविद्यालय गेस्ट हाउस, मुज़फ्फरपुर
18 मई – अल शम्स मिल्लिया डिग्री कॉलेज, अररिया

राजनीतिक और प्रशासनिक उदासीनता पर चिंता

बैठक को संबोधित करते हुए प्रो. अरुण गौतम (मीडिया प्रभारी) ने कहा कि पिछले वर्षों से शिक्षाकर्मियों की यह मांग लंबित है, जबकि पटना उच्च न्यायालय ने इस पर स्पष्ट आदेश भी पारित किया है।
फैक्टनेब पदाधिकारियों ने कहा कि सरकार यदि अब भी कोई ठोस निर्णय नहीं लेती है, तो यह आंदोलन एक राज्यव्यापी शिक्षा हड़ताल में भी परिवर्तित हो सकता है। बैठक में शामिल प्रमुख पदाधिकारी बैठक में राज्य के विभिन्न विश्वविद्यालयों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया, जिनमें प्रमुख रूप से:डॉ. धर्मेन्द्र कुमार चौधरी – बिहार विश्वविद्यालय, संयोजक व सिनेट सदस्य, डॉ. सत्येन्द्र कुमार सिंह – अध्यक्ष, मुंगेर विश्वविद्यालय इकाई, डॉ. अरविन्द कुमार यादव – अध्यक्ष, बीएन मंडल विश्वविद्यालय , मधेपुरा,डॉ. रामनरेश प्रसाद – अध्यक्ष, पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय,डॉ. पितृ कुमार और अन्य राज्य/जिला/महाविद्यालय स्तरीय पदाधिकारी क्या कहती है न्यायपालिका?
शिक्षाकर्मियों को भरोसा है कि पटना हाईकोर्ट के पूर्व आदेश के अनुसार, राज्य सरकार को उनकी सेवा शर्तों और पेंशन की दिशा में शीघ्र निर्णय लेना चाहिए। महासंघ ने सरकार से आग्रह किया है कि टालमटोल बंद कर जल्द से जल्द वेतन और पेंशन भुगतान को लेकर ठोस आदेश जारी करे।यह संघर्ष अब केवल वेतन का नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था की प्रतिष्ठा और स्थायित्व का सवाल बन गया है।

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