ग्रामीण इलाकों की सड़कों का हाल बेहाल , नहीं है सरकार का कोई इंतजाम

ग्रामीण इलाकों की सड़कों का हाल बेहाल , नहीं है सरकार का कोई इंतजाम


जे टी न्यूज, मधुबनी।

मिथिलांचल की धरती भारत नेपाल सीमा पर अवस्थित लदनियां प्रखंड क्षेत्र की एक अलग पहचान रही है। यहां के राजनेताओं ने जिस पार्टी से जीत दर्ज कर बिहार विधानसभा पहुंचे उस पार्टी की ही सरकार बनीं ‌। यहां के राजनेताओं ने बिहार के राजनीतिक क्षेत्रों में भी अपनी पहचान को खोने नहीं दिया।जिसे जब मौका मिला सभी ने अपने हिसाब से क्षेत्र के विकास में योगदान दिया, परंतु 1952 से मिथिलांचल के योद्धा पूर्व विधानसभा अध्यक्ष स्व देव नारायण यादव ने सिमित संसाधन के बाबजूद भी मिथिलांचल के विकास का एक अलग इतिहास लिखा। उन्होंने दूर्गम से दूर्गम इलाकों में आवश्यकता अनुसार नौनिहाल से लेकर उच्च शिक्षा व्यवस्था का जीर्णोद्धार किया। उपलब्ध संसाधनों के अनुसार सड़क, बिजली, पानी,पुल पुलिया का भी निर्माण कराया। किसानों के लिए समुचित सिंचाई व्यवस्था को धरातल पर उतारा। सरकार एवं सत्ता परिवर्तन ने कई महत्वपूर्ण जनसरोकारी योजनाओं के सफल क्रियान्वयन एवं प्रबंधन पर पानी फेर दिया।बीस साल के नीतीश कुमार की सरकार में ग्रामीण क्षेत्रों का तथाकथित विकास नेताओं, जनप्रतिनिधियों, एवं अधिकारियों के लूट खसोट का शिकार बनकर रह गया। ग्रामीण क्षेत्रों में अभियंता के द्वारा तैयार प्राक्कलन से तैयार सड़क,पुल पुलिया का निर्माण तो हुआ परंतु सड़क नाला में तब्दील हो गया। प्रखंड क्षेत्र के जिस भाग में नाला निर्माण कार्य पर करोड़ों रुपए खर्च किए गए जल-संरक्षण व्यवस्था को नजर अंदाज करने के कारण विफल साबित हो कर रह गया। परिणाम स्वरूप सड़क का पानी न तो नाला से बहता है, और न तो बगल से,बहता है तो मुख्य सड़क से। इतना ही नहीं अभियंता के द्वारा सड़क का उचित लेवलिंग कर सड़क निर्माण नहीं कराये जाने के कारण बरसात में सड़क टापू में तब्दील हो जाता है

लदनियां प्रखंड क्षेत्र में पथ निर्माण विभाग के अधिन जो सड़क है उससे होकर पथ निर्माण विभाग का ऐम्बुलेंस सप्ताह में दो से तीन दिन आता है, परंतु आज तक टूटी सड़कों पर या जलजमाव वाले स्थान पर मेटेरियल डाल कर सुविधा जनक नहीं बनाया गया। सम्प्रति विभाग एवं सरकार की इस नीति के कारण लोग किचड़ नुमा एवं जलजमाव वाली सड़क पर चलने को अभिशापित है। यहां के लोगों ने विधायक एवं सांसद के साथ साथ विभाग के अधिकारियों से भी शिकायत की, परंतु लोगों के चिरसंचित समस्या कीचड़ व जलजमाव वाली सड़क से मुक्ति नहीं मिली। मुख्य सड़क पर जलजमाव व कीचड़ के कारण विषैले कीड़े मकोड़े का बसेरा होने के कारण लोग गंभीर बुखार एवं बीमारी का शिकार हो रहे हैं।

स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने सैकड़ों बार पंचायत, प्रखंड पंचायत समिति, एवं जिला परिषद के अलावा बिहार सरकार के विधायक, मंत्री व भारत सरकार, सांसद एवं मंत्री को पत्र लिखकर समस्या समाधान का आग्रह किया गया। परंतु समस्या घटने के बजाय नासूर बन कर रह गयी है।

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