नकली दवा के दोषी मंत्री जिवेश मिश्रा बर्खास्त हो – सुप्रिया श्रीनेत
नकली दवा के दोषी मंत्री जिवेश मिश्रा बर्खास्त हो – सुप्रिया श्रीनेत
जे टी न्यूज, पटना:
बिहार में जेडीयू-एनडीए सरकार सजायाफ़्ता का राज और अपराधी गिरा रहे हैं गाज
बिहार कांग्रेस मुख्यालय सदाकत आश्रम में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में राष्ट्रीय प्रवक्ता और कांग्रेस के सोशल मीडिया एवं डिजिटल प्लेटफॉर्म की चेयरमैन सुप्रिया श्रीनेत ने बिहार सरकार के मंत्री जीवेश मिश्र के नकली दवा निर्माण में दोषी पाएं जाने और बिहार सरकार के गिरती कानून व्यवस्था पर संबोधन आकृति हुए कहा कि यह विषय केवल क़ानूनी नहीं है, बल्कि मानवीय, नैतिक और सार्वजनिक स्वास्थ्य से भी जुड़ा हुआ है। बिहार सरकार के नगर विकास मंत्री जीवेश मिश्रा और नकली दवा मामला
जीवेश मिश्रा “Alto Health Care Private Limited” नामक फार्मास्युटिकल कंपनी के निदेशक है। राजस्थान के राजसमंद जिले में हुई ड्रग इंस्पेक्शन में पाया गया कि उनकी कंपनी द्वारा सप्लाई की गई Ciproline‑500 टैबलेट्स गुणवत्ता के मानकों पर खरी नहीं उतरीं और मिलावटी पाई गईं। इस संबंध में जिन धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया, वे निम्न हैं:
(A) धारा 16(1)(a) – यह बताती है कि दवा तभी “मानक गुणवत्ता” की मानी जाएगी जब वह अधिनियम की द्वितीय अनुसूची के अनुसार हो।
➤ Ciproline‑500 दवा इस मानक पर खरी नहीं उतरी।
धारा 17A(f): नकली (Spurious) दवाएं – यदि दवा किसी दूसरी असली दवा के नाम से बेची जाए, तो उसे नकली माना जाता है।
➤ इस दवा में ब्रांडिंग को लेकर भ्रम फैलाने की आशंका सामने आई।
(B) धारा 18: निर्माण और बिक्री पर रोक
धारा 18(a)(i): कोई भी व्यक्ति ऐसी दवा नहीं बना सकता या बेच सकता जो, (a) मानक गुणवत्ता की न हो; (b) नकली, मिलावटी या गलत ब्रांडिंग वाली हो।
धारा 18(a)(vi) – जो दवाएं अधिनियम के नियमों का उल्लंघन करती हों, उनकी बिक्री व वितरण अवैध है।
धारा 18(b) – दवाओं पर उनके सही फार्मूला और सक्रिय घटकों की सूची देना अनिवार्य है।
धारा 18(c) – बिना वैध लाइसेंस के दवा का निर्माण, वितरण या बिक्री नहीं हो सकती।
धारा 18B – कंपनी को अपने सभी रिकॉर्ड रखने और जांच में सही जानकारी देने का दायित्व है।
(C) धारा 27(b)(i): घटिया दवा निर्माण की सजा
➤ 1 से 3 साल की सजा और ₹20,000 से अधिक का जुर्माना हो सकता है।
धारा 27(d): अन्य अपराधों की सजा
➤ 3 महीने से 1 साल की सजा और ₹20,000 से अधिक का जुर्माना।
(D) धारा 28A: जानकारी नहीं देने पर सजा
➤ रिकॉर्ड न देने या जानकारी छिपाने पर 1 साल की जेल या ₹1 लाख तक जुर्माना।
लेकिन क्या हुआ?
4 जून 2025 को राजस्थान की अदालत ने जीवेश मिश्रा सहित 9 लोगों को दोषी ठहराया। हालांकि अदालत ने उन्हें जेल भेजने के बजाय Probation of Offenders Act, 1958 की धारा 4 और 5 के तहत राहत दी।
प्रोबेशन ऑफ ऑफेंडर्स एक्ट, 1958
धारा 4 – पहली बार अपराध होने पर, यदि सुधार की संभावना हो, तो जेल न भेजकर प्रोबेशन पर छोड़ा जा सकता है।
धारा 5 – कोर्ट आरोपी को जुर्माना लगाकर भी प्रोबेशन पर छोड़ सकती है। इस अवधि में उसे कोई और अपराध नहीं करना होगा और समाजसेवी अधिकारी (Probation Officer) की निगरानी में रहना होगा।
जीवेश मिश्रा को सजा नहीं दी गई, बल्कि प्रोबेशन और जुर्माने के जरिए छोड़ा गया।
इसका मानवीय पक्ष क्या है?
सवाल सिर्फ कानून का नहीं है… सवाल है उन हजारों मरीज़ों का, जिन तक ये घटिया या मिलावटी दवाएं पहुंचीं।
· क्या कोई जान की कीमत पर व्यापार कर सकता है?
· क्या मंत्री पद पर बैठा व्यक्ति सार्वजनिक विश्वास के इस अपराध को “पहली बार का अपराध” कहकर बच सकता है?
· क्या जिनके परिजनों ने ऐसी दवाएं लीं, उनके जीवन के साथ खिलवाड़ हुआ या नहीं?
हमारी मांगें:
1. राजनीतिक जवाबदेही तय हो – ऐसे व्यक्ति को मंत्री पद पर बने रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।
2. स्वास्थ्य मंत्रालय और ड्रग कंट्रोल अथॉरिटी को स्पष्ट करना चाहिए कि उन्होंने इस मामले में क्या कदम उठाए हैं।
3. जनता के साथ पारदर्शिता – क्या अन्य दवाओं की भी जांच हुई? और क्या यह एकमात्र मामला है?
अंत में एक प्रश्न – यदि यह अपराध किसी आम नागरिक ने किया होता, तो क्या उसे भी इतनी ही राहत मिलती?
आज जब देश में दवाओं की गुणवत्ता को लेकर चिंताएं हैं, यह केस एक नज़ीर (precedent) बनेगा — या तो जवाबदेही तय होगी, या फिर मिलावटी दवाओं का कारोबार राजनीति की ढाल में पनपता रहेगा।

साथ ही सुप्रिया श्रीनेत ने सूबे में गिरती हुई कानून व्यवस्था और महिलाओं, बच्चियों, नाबालिगों और व्यवसायियों सहित अन्य लोगों की हत्याओं पर बोलते हुए कहा कि बिहार में गोलियां (G) उगलता (U) NDA राज स्थापित है जिसे बिहार में guNDAraj की संज्ञा बिहार की आम जनता दे रही है। बिहार में 6 महीने में 9 बड़े कारोबारियों की हत्या:
1. रमाकांत यादव – पटना में रानी बाजार थाना क्षेत्र के बालू कारोबारी रमाकांत यादव की 11 जुलाई 2025 को उनके घर के बाहर गोली मारकर हत्या कर दी गई। अपराधियों ने दिनदहाड़े वारदात को अंजाम दिया। यह घटना गोपाल खेमका की हत्या के कुछ ही दिनों बाद हुई, जिससे पटना में कारोबारी सुरक्षा को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
2. गोपाल खेमका – पटना के मगध अस्पताल के मालिक और बड़े बिजनेसमैन गोपाल खेमका की हत्या गांधी मैदान थाना क्षेत्र में पनाशा होटल के पास 4 जुलाई की देर रात 11 बजे गोली मारकर की गई।
3. अंजनी सिंह – पटना के जमीन कारोबारी अंजनी सिंह की पुनपुन के सोहगी-कुंदन पैक पर 22 जून 2025 की रात बदमाशों ने गोली मारकर हत्या कर दी। अपराधी हाईटेक हथियारों से लैस थे और वारदात के बाद फरार हो गए।
4. रजी अहमद उर्फ नन्हू मियां – 19 जून 2025 को मालेगांव के पनहस्सा गांव में जमीन कारोबारी रजी अहमद की गोली मारकर हत्या कर दी गई। पुलिस ने पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है और हथियार भी बरामद किए हैं।
5. विनय गुप्ता – भागलपुर के किराना व्यवसायी विनय गुप्ता की मई 2025 में नवगछिया बाजार में नकाबपोश अपराधियों ने गोली मारकर हत्या कर दी। अब तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है।
6. रमेश चंद्रा – मार्च 2025 में मुजफ्फरपुर में मिट्टी कारोबारी रमेश चंद्रा की घर के बाहर गोली मारकर हत्या कर दी गई। पुलिस ने दो संदिग्धों को पकड़ा, लेकिन मास्टरमाइंड फरार है।
7. संजय अग्रवाल – अप्रैल 2025 में गया के एक नामी ज्वेलर संजय अग्रवाल की दुकान लूटने के बाद हत्या कर दी गई। पुलिस इसे गंगवार से जोड़ रही है।
8. सुरभी – मार्च 2025 में एथिया हॉस्पिटल की संचालिका सुरभी की उनके चैंबर में गोली मारकर हत्या कर दी गई। उनके पति सहित कुछ लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
9. विनोद मेहता – जनवरी 2025 में भागलपुर के कपड़ा कारोबारी विनोद मेहता की गोली मारकर हत्या कर दी गई।
ADG लॉ एंड ऑर्डर की मौजूदगी में बिहार की राजधानी पटना में बोरिंग कैनाल रोड पर दिनदहाड़े 8 राउंड फायरिंग करते हैं। दूसरी ओर मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष के आवास के नजदीक अपराधी दिन दहाड़े फ़ायरिंग करते हैं। नाबालिग बच्चियों के साथ लगातार बलात्कार होता है, गैंगवार होता है, पुलिस वालों को सरे राह मौत के घाट उतार दिया जाता है।
अकेले पटना में इसी साल 116 हत्या, 41 बलात्कार हुए हैं, तो सोचिए पूरे बिहार का क्या हाल होगा। बीते वर्षों पुलिस मुख्यालय की ओर से जारी आंकड़ों में खुलासा, 151 दिनों में पुलिस पर 1297 बार हमले।
NCRB आँकड़ों से सामने आए सच्चाई के तथ्य (2006–2022):
1. वर्ष 2005 में जहाँ बिहार में कुल अपराध 1,07,664 हुए थे, वहीं 2022 में यह संख्या बढ़कर 3,47,835 हो गई — यानी 323% की वृद्धि।
2. बिहार राज्य हत्या के मामलों में उत्तर प्रदेश के बाद देश में दूसरे स्थान पर है। नीतिश शासन के 17 वर्षों में 53,150 हत्याएं दर्ज की गईं।
3. हत्या की कोशिशों में भी बिहार देश में दूसरे नंबर पर है। कुल 98,169 घटनाएं हुईं, जो 262% की वृद्धि दर्शाती हैं।
4. बिहार में जघन्य अपराध — जैसे हत्या, बलात्कार, अपहरण, फिरौती, डकैती — 206% बढ़े। 17 वर्षों में ऐसे 5,59,413 मामले दर्ज किए गए।
5. महिला अपराधों में 336% की वृद्धि हुई है। कुल 2,21,729 महिलाएं अपराधों का शिकार बनीं। इनमें से 1,17,947 मामले आज भी अदालतों में लंबित हैं, और लंबित मामलों की दर 98.2% है।
6. महिलाओं के अपहरण में 1,097% की भयावह वृद्धि हुई है।
7. बच्चों के विरुद्ध अपराधों में 7,062% की चौंकानेवाली वृद्धि दर्ज हुई है। कुल 62,830 मासूम इस दौर में अपराध के शिकार बने।
8. दलित उत्पीड़न के मामले में बिहार उत्तर प्रदेश के बाद दूसरे नंबर पर है।
2025 की ताज़ा ज़मीनी सच्चाई (मई-जून):
हत्या की घटनाएं:
1. बक्सर (24 मई): बालू व्यवसाय से जुड़े विवाद में एक ही परिवार के तीन भाइयों की हत्या।
2. सहरसा: जेडीयू नेता विनोद भगत और उनके साले को गोली मारी गई, नेता की मौके पर मौत।
3. पटना: दानापुर में युवक की बीच सड़क पर गोली मारकर हत्या; फतुहा और नदी थाना क्षेत्रों में एक सप्ताह में 3 हत्या।
4. नालंदा: मुख्यमंत्री के गृह जिले में दो लोगों की गोली मारकर हत्या।
5. आरा: 72 घंटों में अलग-अलग क्षेत्रों में 8 को गोली मारी गई — 3 की मौत, 5 घायल।
6. बेतिया: दिनदहाड़े मछली व्यवसायी की हत्या; गुस्साए लोगों ने पुलिस वाहन फूंका।
7. कटिहार: गाली-गलौच में कहासुनी पर 55 वर्षीय व्यक्ति को एयरगन से मार दिया गया।
8. मुंगेर में ASI संतोष कुमार सिंह- 14 मार्च 2025 को मुंगेर के नंदलालपुर गांव में ASI संतोष कुमार पर चाकू–डण्डे से हमला किया। उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया, लेकिन रास्ते में ही उनकी मृत्यु हो गई ।
9. अररिया में ASI राजीव रंजन – 13 मार्च 2025 को स्थानीय विवाह समारोह में ASI राजीव रंजन ने एक अभियुक्त को गिरफ्तार किया, तभी एक समूह ने उन पर हमला कर दिया और मौत के घाट उतार दिया।
बच्चियों के साथ हुए जघन्य अपराध (बीते 15 -20 दिन):
1. दो दिन पहले पटना में नाबालिग बच्ची के साथ गैंग रेप।
2. मुजफ्फरपुर: 5वीं की छात्रा के साथ बलात्कार, 20 से अधिक चाकू के निशान, गला रेता गया।
3. छपरा: स्कूल से लौटती छात्रा का अपहरण, सामूहिक बलात्कार और हत्या।
4. बेतिया: ढाई साल की बच्ची के साथ बलात्कार।
5. सीतामढ़ी, बगहा, अररिया, मुंगेर: 11–16 वर्ष की कई बच्चियों के साथ सामूहिक बलात्कार।
महिला अपहरण व अत्याचार:
• प्रत्येक दिन औसतन 28 महिलाओं का अपहरण।
• प्रतिदिन 55 महिला अपराध।
• लंबित मामलों की भरमार — (पेंडेंसी रेट ) 98% से अधिक मामले अभी न्याय के इंतज़ार में हैं।
अन्य अत्यधिक गंभीर घटनाएं:
1. सूरत-आरा कनेक्शन: व्यवसायी का अपहरण कर फिरौती के बाद हत्या, शव दो भागों में फेंका गया।
2. “तालिबानी सज़ा” (सीतामढ़ी): 5 बच्चों को नग्न कर सड़कों पर घुमाया गया।
3. कटिहार: महिला की हत्या, बच्ची गंभीर घायल;
4. मधेपुरा: पति की हत्या कर शव को फाँसी में लटकाया।
5. नालंदा: महिला की हत्या कर शव सूटकेस में फेंका; सूटकेस बाद में गायब पाया गया।
प्रमुख गैंग वार की घटनाएँ
1. बेगूसराय: दो गिरोहों में 24–25 राउंड फायरिंग
13 फरवरी 2025 को बीहट पीर थाना अंतर्गत बेगुसराय में दो गैंग‑गुट (सौरभ, गौरव और निलेश उर्फ नगा गैंग) के बीच जमकर 24‑25 राउंड तक गोलीबारी हुई ।
2. मोकामा (पटना के पास): पूर्व विधायक अनंत सिंह से जुड़ा गैंग वार
22–24 जनवरी 2025 के बीच जालालपुर नौरंगापुर गाँव में Sonu‑Monu गैंग और अनंत सिंह समर्थकों के बीच संघर्ष हुआ। एक बार भारी फायरिंग हुई, जिसमें लगभग 70–100 राउंड चले ।
3. पंडारक (पटना): घर के सामने क्रिमिनल की हत्या
14 मई 2025 को पंडारक क्षेत्र में गिरोहों ने आपसी दुश्मनी में अरुण यादव (35) को उसके घर के सामने गोली मार कर हत्या कर दी।
4. बांका: बालू माफिया के बीच गोलीबारी
24 मई 2025 की देर रात अमरपुर और रजौन थाना क्षेत्र में बालू माफिया गिरोहों के बीच अवैध रेत उत्खनन के मुद्दे पर हुई गोलीबारी में 3 लोग घायल हुए।

संवाददाता सम्मेलन में राष्ट्रीय मीडिया कॉर्डिनेटर व राष्ट्रीय प्रवक्ता अभय दुबे, कोषाध्यक्ष जितेंद्र गुप्ता, मीडिया विभाग के चेयरमैन राजेश राठौड़, सोशल मीडिया के प्रभारी प्रणव झा, सौरभ सिंहा, असित नाथ तिवारी, अचला सिंह सहित अन्य नेतागण मौजूद रहें।



