पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक को मरणोपरांत राजकीय सम्मान नहीं देना

देश, लोकतंत्र और संवैधानिक परंपराओं का अपमान -संयुक्त किसान मोर्चा

पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक को मरणोपरांत राजकीय सम्मान नहीं देना / देश, लोकतंत्र और संवैधानिक परंपराओं का अपमान -संयुक्त किसान मोर्चा जे टी न्यूज़, पटना : आर्थिक लूटमारों तथा देश के साथ गद्दारी करने वालो की यह सरकार है। सच कहना यहां बगावत है। सत्यमाल मलिक ने सच उगला तो अब मरणोपरांत भी बदला लिया जा रहा हैं। इसी देश के सबसे महत्त्वपूर्ण पदों में से एक भारत के उपराष्ट्रपति जगदीश धनकड़ द्वारा किसानों से किए वादे को पूरा करने के संबंध में दिए गए वक्तव्य की सजा उन्हें इस्तीफा करने के लिए मजबूर किया गया। देश संकट के दौर से गुज़र रहा है। देश में लोकतांत्रिक और संवैधानिक परंपराएं तार – तार हो रही है। किसानों के हरदिल अजीज सत्यपाल मलिक को श्रद्धा सुमन अर्पित करते हुए संयुक्त किसान मोर्चा,बिहार के नेता दिनेश कुमार, अशोक प्रसाद सिंह,अमेरिका महतो,अनिल कुमार सिंह,भूप नारायण सिंह,प्रो आनंद किशोर,आशीष रंजन,गोपाल कृष्ण, कल्लू सिंह,भोला यादव,राम प्रवेश सिंह,नरेश यादव,हरिलाल जी,पशुपतिनाथ सिंह ने संयुक्त ब्यान जारी कर कहा कि यह सरकार किसानों से खेती छीन कर अपने मित्र कार्पोरेट को देने के लिए दिन रात व्यस्त है। यहां सच कहना बगावत है। सत्यमाल मलिक ने सच उगला तो अब मरणोपरांत उनसे बदला लिया जा रहा हैं। कोरोना जैसे भयानक महामारी के दौर में जब देश के किसान अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे थे तब उस मुश्किल घड़ी में भी मोदी सरकार में रहते हुए अपनी अंतरात्मा की आवाज पर सत्यपाल मलिक जी ने सच बोलने की हिम्मत की। उन्होंने किसानों के पक्ष में अपनी सरकार को नसीहत दी।जिसकी सजा मरणोपरांत मोदी सरकार ने आज उन्हें दिया है।कृषि प्रधान भारत में कृषि से जुड़े हर लोग आज स्तब्ध और मर्माहत है।दुख की इस घड़ी में हम सभी शोकाकुल हैं। जबकि भाजपा सरकार मगन है।दुख इस बात की है कि उनको किस बात की सजा मिली।हमारी परंपरा और संस्कृति है कि हम मृत्युपरान्त सारी जिंदगी की दुश्मनी भूल जाते हैं।भारतीय परम्परा और संस्कृति का अपने को ठीकेदार समझने वाली भाजपा सरकार द्वारा सत्यपाल मलिक के साथ मृत्युपर्यन्त की गई इस घिनौनी हरकत से आज पूरा देश शर्मशार है।पांच राज्यों का जो व्यक्ति राज्यपाल रहा,तीन-तीन बार लोकसभा और राज्यसभा तथा एक बार विधानसभा का सदस्य रहा, केंद्र सरकार में मंत्री रहे, उनके साथ मोदी सरकार के इस निंदनीय हरकत से पूरे कृषि से जुड़े लोग अपने को अपमानित महसूस कर रहे है।सरकार की घटिया मानसिकता की यह द्योतक है। मोदी सरकार मरनोपरांत भी सत्यपाल मलिक जी के साथ दुश्मनी निभा रही है। देश में किसानों की आंखें खोलने वाली यह सबसे शर्मनाक और दर्दनाक घटना है।सत्यपाल मलिक जी के साथ भाजपा सरकार ने जो दुर्व्यवहार किया है।यह सत्यपाल मलिक को नजरअंदाज और अपमानित नहीं किया है बल्कि हर उस व्यक्ति के लिए धमकी है,जो किसानों के पक्ष में आज बोल रहे हैं या खड़े हो रहे हैं।किसानों एवं मजदूरों के लिए यह गंभीर संदेश है, जिसे आज सारा देश देख रहा है। किसान अपने अपमान को कभी भूलेगा नहीं,बल्कि वक्त पर माकूल जवाब देगा। जिन्होंने सारा जीवन सिद्धांतों के साथ खड़ा रहा,किसानों के दुःख दर्दों को समझा और उसके पक्ष में बोला, उन्हें जो सम्मान मिलना चाहिए। वह सरकार ने नहीं दिया। उल्टे अपमानित करने की हर कोशिश की गई। राम मनोहर लोहिया अस्पताल के जिस कमरे में उन्होंने अंतिम सांसें ली,उसे भी आधा घंटा में खाली करने का हुक्म हुआ,जैसे कि कोई लावारिस लाश हो।यह मोदी सरकार की कोई कृपा की बात नहीं थी,बल्कि हमारी संवैधानिक व्यवस्था है कि हम विधायकों एवं सांसदों को राजकीय सम्मान के साथ अंत्येष्टि करते हैं।जब वे अस्पताल में थे तो उन पर झूठा सीबीआई की ओर से एक मुकदमा दर्ज करवाया गया। उन्हें इस दुनिया से अपमानित कर विदा करने की मोदी सरकार की साजिश से खेतिहर समुदाय उद्वेलित है। ना तो सरकार की ओर से इस दुख की घड़ी में उनके परिजनों से कोई मिलने आया, ना ही कोई फोन किया। मोदी सरकार ने इस मामले में संविधान को भी तार-तार कर दिया। इसका कोई दूसरा मिसाल देश में नहीं मिल सकता है। सिर्फ मोदी सरकार ही ऐसा कर सकती है,क्योंकि मोदी है तो हर कुकर्म मुमकिन है। संयुक्त किसान मोर्चा ने संकल्प लिया है कि सत्यपाल मलिक के सपनों को पूरा करने और किसानों के जीवन में खुशहाली लाने के लिए हमेशा संघर्षरत रहेंगे। सत्यपाल मलिक किसानों के हर आंदोलन के लिए हमेशा प्रेरणा स्रोत बने रहेंगे। मोदी सरकार ने भले सम्मान नहीं दिया,मगर किसानों के दिलों पर वे हमेशा राज करेंगे।

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