रसोईया) यूनियन की बैठक आयोजित
रसोईया) यूनियन की बैठक आयोजित 
जे टी न्यूज, खगड़िया: रसोईया) यूनियन की बैठक आज खगड़िया में संपन्न हुई,जिसमें सैकड़ों की संख्या में रसोईया शामिल हुई।बैठक की अध्यक्षता यूनियन की जिला सचिव नीतू देवी ने की।यह बैठक एक सप्ताह पहले बिहार की नीतीश सरकार द्वारा रसोइए के मजदूरी में प्रति माह 1650/रुपए की मामूली बढ़ोतरी के बाद के स्थिति पर गौर करने के लिए हुई।बैठक को संबोधित करते हुए यूनियन के पूर्व जिलाध्यक्ष संजय कुमार ने कहा बिहार राज्य मिड डे मील वर्कर्स (रसोईया) यूनियन के लगातार संघर्षों का ही नतीजा है कि नीतीश सरकार को मामूली ही सही लेकिन स्कूली रसोईया के मजदूरी में बढ़ोतरी के लिए विवश होना पड़ा।उन्होंने कहा स्कूली रसोईया के मजदूरी में यह बढ़ोतरी ऊंट के मुंह में जीरा का फोरन जैसा है।वो भी नीतीश सरकार ने इस बढ़ोतरी को भी मानदेय वृद्धि नहीं बोला बल्कि इसे प्रोत्साहन राशि में वृद्धि बोल कर बिहार के इन लाखों रसोईया बहनों के साथ क्रूर मजाख करने का काम किया है।संजय कुमार ने कहा स्कूली रसोईया तो समाज के सबसे वेबस और लाचार महिलाएं हैं,जिनके सामने दो जून की रोटी भी बड़ी समस्या है,तभी तो इतनी कम मजदूरी पर भी काम करने को मजबूर है।रसोईया स्कूलों के अंदर 5 से 6 घंटे हाड़तोड़ मेहनत कर बच्चे को स्वच्छ और गरम भोजन एक मां की भांति पड़ोसती है,जिसके बदले सरकार का यह घोषित मेहनताना पुराने दिनों के साहूकारों द्वारा गरीबों पर शोषण करने वाली समय की याद दिलाता है।हमारे यूनियन की लड़ाई तो भारत सरकार के 46वें श्रम सम्मेलन के द्वारा किसी भी मजदूरों के लिए दिए गए सुझाव के अनुसार 26000/रुपए प्रति माह वेतन के लिए है,जो हासिल करने तक जारी रहेगा।उन्होंने कहा यूनियन लगातार संघर्षों के माध्यम से सरकार के सामने स्कूली रसोईया की वाजिब मांगों जिसमें प्रोत्साहन राशि के बजाय वेतन तय करने,तत्काल मानदेय को 10 महीने के बजाय 12 महीने करने,मानदेय 10000/रुपए प्रति माह करने की बात उठाया गया है।
जिला सचिव नीतू देवी ने कहा कि रसोईया को आकस्मिक अवकाश और महिला रसोईया को विशेषावकाश की सुविधा देने,मात्रिकावकाश देने,कार्यकाल में मृत रसोईया के आश्रितों को अनुकंपा का लाभ देने,काम के दौरान दुर्घटनाग्रस्त होने पर फ्री इलाज की सुविधा देने,स्कूलों में रसोईया से खाना बनाने के आलावे कोई दूसरा काम नहीं लेने,रसोईया को हर माह समय से मानदेय भुगतान करने और मृत रसोईया के आश्रितों को मिलने बाली सरकारी सहायतार्थ राशि के भुगतान को सुलभ बनाने जैसी सवालों पर हम सभी रसोईया अपनी आवाज उठाते रहे हैं,लेकिन रसोईया के इन समस्याओं पर नीतीश सरकार संवेदनशून्य बनी हुई है।ऐसे में रसोईया के अंदर भारी आक्रोश व्याप्त है।दोनों नेताओं ने कहा कि नीतीश सरकार बिहार विधानसभा चुनाव से पूर्व स्कूली रसोईया का मानदेय प्रति माह 10000/रुपए प्रति माह करे साथ ही रसोईया के सभी उपरोक्त मांगों पर सहानुभूति पूर्वक विचार करते हुए तत्काल आवश्यक कदम उठाए अन्यथा रसोईया के सामने बड़े आंदोलन तय करने के शिवा कोई और विकल्प नहीं बचेगा।यूनियन के संरक्षक सुरेन्द्र प्रसाद ने रसोईया को अपने हक अधिकार के लिए संगठित होकर अनवरत संघर्ष चलाने का आह्वान किया।बैठक में कुंती साहू,शारदा देवी,कृष्णा देवी,सीता देवी,अरविंद यादव, जफीरा खातून,राजेश कुमार,विमल देवी,दिनेश रजक,असरती खातून,लालबहादुर सिंह,रंजू देवी,रुना देवी,गीता देवी,रीता देवी,खुशबू देवी,रिंकू देवी,ललिता देवी,इंदु देवी,चनसुला देवी,हीरा देवी,इशरत खातून,जोगा देवी,अनीता देवी,वीणा देवी और अरविंद यादव सहित दर्जनों रसोईया ने विचार व्यक्त किया।


