VISTAS, चेन्नई में 108वें भारतीय आर्थिक संघ (IEA) सम्मेलन का भव्य शुभारंभ
VISTAS, चेन्नई में 108वें भारतीय आर्थिक संघ (IEA) सम्मेलन का भव्य शुभारंभ

जे टी न्यूज़/चेन्नई:: देश-विदेश से आए 2000 से अधिक प्रख्यात अर्थशास्त्रियों, शिक्षाविदों और शोधार्थियों की उपस्थिति में भारतीय आर्थिक संघ (Indian Economic Association – IEA) के 108वें वार्षिक सम्मेलन का भव्य उद्घाटन आज Vels Institute of Science, Technology & Advanced Studies (VISTAS), चेन्नई के शिवालय ऑडिटोरियम में हुआ। यह सम्मेलन एक तीन-दिवसीय अंतरराष्ट्रीय अकादमिक आयोजन है, जिसमें भारत की आर्थिक नीतियों, विकास रणनीतियों और विकसित भारत@2047 के रोडमैप पर गहन विचार-विमर्श किया जाएगा।
कार्यक्रम का शुभारंभ प्रार्थना एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। सम्मेलन का उद्घाटन तमिलनाडु सरकार के श्रम कल्याण एवं कौशल विकास मंत्री श्री सी. वी. गणेशन ने किया।
डॉ. ईशारी के. गणेश, संस्थापक चांसलर, VISTAS एवं मुख्य संरक्षक ने अपने स्वागत भाषण में कहा कि
भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने के लिए शिक्षा, कौशल विकास, डिजिटल तकनीक और अनुसंधान को आर्थिक नीति का आधार बनाना होगा।
प्रो. ए. डी. एन. बाजपेई, अध्यक्ष, IEA एवं कुलपति, अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय, बिलासपुर ने कहा कि IEA पिछले 108 वर्षों से भारतीय अर्थव्यवस्था पर वैज्ञानिक दृष्टिकोण से विचार और नीति सुझाव देता आ रहा है। विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने में अर्थशास्त्रियों की भूमिका निर्णायक होगी।
डॉ. बी. पी. चंद्रमोहन, लोकल ऑर्गेनाइजिंग सेक्रेटरी एवं अकादमिक समन्वयक, IEA ने सम्मेलन की थीम और उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए इसे भारत के आर्थिक भविष्य पर राष्ट्रीय मंथन बताया।
सम्मेलन में अतिविशिष्ट अतिथियों के रूप में
डॉ. सी. रंगराजन, पूर्व अध्यक्ष, प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद,
डॉ. कौशिक बसु, प्रोफेसर, कॉर्नेल विश्वविद्यालय (USA) एवं पूर्व मुख्य अर्थशास्त्री, विश्व बैंक, तथा
डॉ. जी. विश्वनाथन, चांसलर, VIT एवं संरक्षक, IEA उपस्थित रहे

उन्होंने विकसित भारत @2047 के संदर्भ में समावेशी विकास, उच्च आर्थिक वृद्धि, मानव पूंजी निर्माण और संस्थागत सुधारों की आवश्यकता पर बल दिया।
सम्मेलन के अध्यक्ष प्रो. ए. जोथी मुरुगन, प्रो-चांसलर, VISTAS ने अपने अध्यक्षीय भाषण में कहा कि यह सम्मेलन भारत के लिए 2047 तक एक मजबूत, आत्मनिर्भर और वैश्विक आर्थिक शक्ति बनने का बौद्धिक रोडमैप तैयार करेगा।
कार्यक्रम का धन्यवाद ज्ञापन प्रो. रविंद्र के. ब्रह्मे द्वारा प्रस्तुत किया गया।
यह तीन दिवसीय सम्मेलन भारत की विकास यात्रा, रोजगार, डिजिटल अर्थव्यवस्था, वित्तीय समावेशन और सतत विकास जैसे विषयों पर गहन अकादमिक संवाद का महत्वपूर्ण मंच बनेगा।
