रोसड़ा के 500 साल पुराने कबीर मठ की जमीन हड़पने का आरोप
रोसड़ा के 500 साल पुराने कबीर मठ की जमीन हड़पने का आरोप

जे टी न्यूज, रोसड़ा /समस्तीपुर :
रोसड़ा नगर परिषद के लक्ष्मीपुर स्थित लगभग 500 वर्ष पुराने ऐतिहासिक कबीर मठ की बहुमूल्य जमीन को कथित रूप से फर्जी तरीके से दूसरे व्यक्ति के नाम दर्ज कर रसीद काटने का मामला अब तुल पकड़ चुका है। इस मामले को बिहार सरकार के पूर्व मंत्री महेश्वर हजारी द्वारा दिशा की बैठक में उठाए जाने के बाद जिला प्रशासन हरकत में आया है। समस्तीपुर के जिलाधिकारी रोशन कुशवाहा ने पूरे प्रकरण की जांच के लिए एक उच्चस्तरीय जांच कमेटी का गठन किया है।जानकारी के अनुसार कबीर मठ के नाम 13 बीघा जमीन में से करीब तीन बीघा जमीन को रजिस्टर-2 एवं अन्य राजस्व अभिलेखों में कथित रूप से हेराफेरी कर दूसरे व्यक्ति के नाम रसीद काट दी गई। मठ प्रबंधन का आरोप है कि यह जमीन धार्मिक न्यास की संपत्ति है और इसे बिना किसी वैधानिक प्रक्रिया के किसी अन्य के नाम स्थानांतरित कर दिया गया।मामले को और गंभीर बनाता है यह तथ्य कि विवादित जमीन पर होटल का संचालन किया जा रहा है। जबकि मठ प्रबंधन के अनुसार, पूर्व में यह जमीन कबीर मठ की ओर से आयुर्वेद कॉलेज की स्थापना के उद्देश्य से लीज पर दी गई थी। लीज की शर्तों का उल्लंघन करते हुए व्यावसायिक गतिविधि संचालित की जा रही।इससे पहले वर्ष 2022 में भी कबीर मठ प्रबंधन ने शिकायत दर्ज कराई थी। उस समय तत्कालीन अपर समाहर्ता ने मामले की जांच कर अपनी रिपोर्ट प्रशासन को सौंपी थी, लेकिन कथित तौर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। कार्रवाई के अभाव में जमीन से जुड़े विवाद और गहराते चले गए।पूर्व सांसद प्रतिनिधि रविंद्र नाथ सिंह ने इस प्रकरण को लेकर सभी आवश्यक दस्तावेजों के साथ समस्तीपुर के जिलाधिकारी, राज्य के भूमि सुधार मंत्री एवं अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को लिखित आवेदन सौंपा है। उन्होंने मांग की है कि राजस्व अभिलेखों में की गई हेराफेरी की गहन जांच कर दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाए और कबीर मठ की जमीन को उसके मूल स्वरूप में बहाल किया जाए।

कबीर मठ के महंत दीप नारायण दास ने बताया कि जमीन को दूसरे के नाम किए जाने के खिलाफ मुख्यमंत्री, जिलाधिकारी, अनुमंडल पदाधिकारी और बिहार राज्य धार्मिक न्यास बोर्ड सहित कई संबंधित अधिकारियों को आवेदन दिया गया है, लेकिन अब तक किसी प्रकार की ठोस कार्रवाई या आधिकारिक सूचना प्राप्त नहीं हुई है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व की इस संपत्ति की रक्षा सुनिश्चित की जाए। जांच कमेटी से अब यह उम्मीद की जा रही है कि वह पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर सच्चाई सामने लाएगी और दोषियों के विरुद्ध विधिसम्मत कार्रवाई करेगी।

