यूरिया की जगह करें अमोनियम सल्फेट का करें प्रयोग: डॉ. नित्यानंद कृषि वैज्ञानिक
गेहूं और मक्का फसल में कैल्शियम नाइट्रेट,सल्फर और जिंक का उपयोग अति महत्वपूर्ण है।
यूरिया की जगह करें अमोनियम सल्फेट का करें प्रयोग: डॉ. नित्यानंद कृषि वैज्ञानिक
गेहूं और मक्का फसल में कैल्शियम नाइट्रेट,सल्फर और जिंक का उपयोग अति महत्वपूर्ण है

जे टी न्यूज, सुपौल(शिव शंकर प्रसाद): जिलेp मे रबी फसलो की बुवाई अब अंतिम चरण मे चल रहा है। पिछले महीने बुवाई की गयी फसलों मक्का औऱ गेंहू मे अब पटवन शुरू हो गया है औऱ इस समय रबी फसल की वृद्धि के लिए नाइट्रोजन तत्व की आवश्यकता होती है, जिसके लिए किसानों को यूरिया खाद की आवश्यकता होती है। गौरतलब है कि नाइट्रोजन पोषक तत्व के लिए यूरिया सबसे सस्ता विकल्प है, जो कि भारत देश मे पिछले कई दशको से लगातार प्रयोग किया जा रहा है। लेकिन हाल के सालो मे यूरिया खाद के उपयोग से फसलो औऱ वतावरण पर लाभ से ज्यादे हानिकारक प्रभाव दिखाई दे रहा है। किसानो की माने तो किसान करें भी तो क्या करें, क्योंकि किसानो को यूरिया का कोई विकल्प अब तक समझ में नहीं आ रहा है। इस सम्बन्ध मे सुपौल जिले के राघोपुर मे स्थित भारत सरकार की कृषि अनुसंधान केंद्र कृषि विज्ञान केंद्र के वरीय वैज्ञानिक सह प्रधान डॉ नित्यानंद किसानो को सलाह देते है कि यूरिया की जगह करें अमोनियम सल्फेट उर्वरक का प्रयोग। कृषि वैज्ञानिक डॉ नित्यानंद बताया कि फसलों के लिए आवश्यक नाइट्रोजन पोषक तत्व के लिएयूरिया और अमोनियम सल्फेट दोनों की अपनी जगह है, लेकिन अमोनियम सल्फेट अक्सर बेहतर विकल्प माना जाता है क्योंकि इसमें नाइट्रोजन के साथ सल्फर भी होता है, जो मिट्टी के स्वास्थ्य और उपज सुधारने में मदद करता है, खासकर क्षारीय मिट्टी और तिलहन फसलों के लिए, जबकि यूरिया क्षारीय मिट्टी और अधिक उपयोग से नुकसान कर सकता है। अमोनियम सल्फेट धीमी गति से नाइट्रोजन देता है और नाइट्रोजन की हानि कम होती है, जिससे यह अधिक प्रभावी हो सकता है।

*फसलों में अमोनियम सल्फेट के फायदे*
नाइट्रोजन लगभग 20.6% के साथ सल्फर लगभग 23% भी देता है, जो प्रोटीन और क्लोरोफिल के लिए जरूरी है, मिट्टी की अम्लता सुधारता है, नाइट्रोजन की हानि कम होती है और लंबे समय तक पोषण देता है।
*उपयुक्तता* :- सल्फर की कमी वाली मिट्टी, क्षारीय मिट्टी और तिलहन, फलदार व सब्जी फसलों के लिए बहुत अच्छा है।इसके अलावे जिले मे अभी किसानो को यूरिया खाद खरीदने औऱ उपयोग करने की होड़ लगी हुई है। किसानो की शिकायत रहती है कि यूरिया खाद के साथ उर्वरक बिक्रेता कैल्शियम नाईट्रेट, सलफर, माइकोरायज़ा (जैव उर्वरक)औऱ जींक लेने का भी दवाब डालते है, जो कि उनके खेतो औऱ फसलो के लिए आवश्यक नहीं है। इस संबंध में पूछने पर कृषि विज्ञान केंद्र के विषय वस्तु विशेषज्ञ वैज्ञानिक डॉ निलेश कुमार बताते है कि कैल्शियम नाईट्रेट, सलफर, माइकोरायज़ा(जैव उर्वरक) औऱ जींक रबी फसलो खासकर मक्का औऱ गेंहू के लिए काफी महत्वपूर्ण पोषक तत्व है लेकिन उर्वरक विक्रेता दुकान पर लगे भीड़ के कारण किसानों को समझाकर और बताकर इन आवश्यक पोषक तत्व की जानकारी बगैर ही किसानों को बिक्री कर देते हैं जिस कारण के किसानों में असंतुष्टि दिखाई पड़ रही है। इन सभी पोषक तत्वों के बारे में जानकारी देते हुए कृषि वैज्ञानिक बताते हैं कि रबी फसलों (जैसे गेहूं, सरसों) के लिए कैल्शियम नाइट्रेट, सल्फर और जिंक बहुत ज़रूरी हैं, जो प्रोटीन, क्लोरोफिल बनाने, जड़ों और तने की वृद्धि करने, और प्रकाश संश्लेषण को बढ़ाकर उपज और गुणवत्ता सुधारते हैं, लेकिन कैल्शियम नाइट्रेट और जिंक सल्फेट को अलग-अलग समय या विधियों से देना चाहिए।
*कैल्शियम नाइट्रेट का महत्व:* पौधों को कैल्शियम और नाइट्रोजन देता है, कोशिका भित्ति मजबूत करता है, फलों को फटने से बचाता है, और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है। गेंहू फसल मे 10 किलोग्राम प्रति एकर औऱ मक्का फसल मे 20 किलोग्राम प्रति एकर उपयोग करने से उपज मे वृद्धि औऱ फसल की क्वालिटी भी बेहतर दिखता है।
*सल्फर का महत्व:-* तेल वाली फसलों (सरसों), दलहन औऱ मक्का फसल के लिए आवश्यक, प्रोटीन (जैसे मेथियोनीन) और क्लोरोफिल बनाने में मदद करता है, जिससे पत्तियां हरी रहती हैं और प्रकाश संश्लेषण बढ़ता है।
*उपयोग:* गेहूं की रोटी बनाने की गुणवत्ता सुधारता है और सरसों जैसी फसलों में तेल की मात्रा बढ़ाता है। मक्का के फसल की उत्पादन औऱ क्वालिटी मे भी काफ़ी सुधार होता है।उपयोग की मात्रा 10 किलोग्राम प्रति एकड़ अनुमोदित है।
*जिंक का महत्व:-* पौधों की वृद्धि और विकास के लिए महत्वपूर्ण, हार्मोन और एंजाइम बनाने में सहायक, नाइट्रोजन और फास्फोरस के उपयोग में मदद करता है.
*उपयोग:-* जिंक की कमी से उपज कम हो सकती है, इसकी पूर्ति से फसल स्वस्थ रहती है और पैदावार बढ़ती है। उपयोग की मात्रा 10-15 किलोग्राम प्रति एकड़ है।
*रबी फसलों में माइकोराइजा (जैव उर्वरक )का महत्व,* *पोषक तत्व अवशोषण:* यह जड़ों को मिट्टी में गहराई तक फैलाकर फास्फोरस (जो अक्सर मिट्टी में स्थिर हो जाता है) और अन्य सूक्ष्म पोषक तत्वों को आसानी से उपलब्ध कराता है, जिससे पौधे की वृद्धि होती है। माइकोराइजा उपयोग की मात्रा 4 किलोग्राम प्रति एकड़ है।
*जल संरक्षण:* माइकोराइजा जल अवशोषण क्षमता बढ़ाता है, जिससे सूखे की स्थिति में भी पौधे स्वस्थ रहते हैं और पानी की कम आवश्यकता होती है।
*मिट्टी का स्वास्थ्य:* यह मिट्टी के कणों को जोड़कर उसकी संरचना (सरंध्रता) सुधारता है, जिससे जल-धारण क्षमता और वायु संचार बढ़ता है, और मिट्टी का कटाव कम होता है।

*रोग प्रतिरोधक क्षमता:* यह फसलों को जड़ रोगों और अन्य पर्यावरणीय तनावों (जैसे लवणता, भारी धातु) के प्रति अधिक प्रतिरोधी बनाता है। *उर्वरक दक्षता:* पोषक तत्वों की बेहतर उपलब्धता के कारण रासायनिक उर्वरकों, विशेषकर फास्फोरस युक्त उर्वरकों की जरूरत कम हो जाती है, जिससे किसानों की लागत घटती है और पर्यावरण प्रदूषण कम होता है।
कृषि विज्ञान केंद्र के कृषि वैज्ञानिको ने जिले के किसान बंधुओ से उम्मीद जताई है कि ऊपर दिए गए जानकारी को पढ़कर और समझ कर जिले के किसान भाई को सूक्ष्म पोषक तत्व और जैव उर्वरकों के बारे में सही जानकारी प्राप्त होगी और इन उत्पादों का सही उपयोग और इस्तेमाल किया जा सकेगा।कैल्शियम नाईट्रेट औऱ अमोनियम सल्फेट उर्वरक मे नाइट्रोजन की मात्रा पाई जाती है,यूरिया के अधिक उपयोग से मट्टी की ताकत बहुत कम हो रही है, ठंड के मौसम में 10 किलोग्राम प्रति एकड़ मे सल्फर(गंधक) मक्का और गेहूं फसल में यूरिया या अमोनियम सल्फेट के साथ कोटिंग करके इस्तेमाल किया जा सकता है।


