सांसद पप्पू यादव के पत्र पर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने लिया संज्ञान, सख्त कार्रवाई के संकेत
सांसद पप्पू यादव के पत्र पर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने लिया संज्ञान, सख्त कार्रवाई के संकेत
जे टी न्यूज, पूर्णिया :
पूर्णिया के लोकप्रिय सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव द्वारा जीएमसीएच पूर्णिया की बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर उठाए गए गंभीर सवालों पर अब केंद्र सरकार ने संज्ञान लिया है। सांसद के पत्र के बाद केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने इस मामले में संबंधित प्रभाग से परीक्षण कराने की जानकारी दी है। अपने पत्र में केंद्रीय मंत्री ने स्पष्ट किया है कि जीएमसीएच पूर्णिया में चिकित्सकों की भारी कमी, अधूरी स्वास्थ्य सुविधाओं एवं अन्य समस्याओं की गहन समीक्षा की जा रही है। इस त्वरित प्रतिक्रिया के लिए सांसद पप्पू यादव ने केंद्रीय मंत्री के प्रति आभार व्यक्त किया है।
गौरतलब है कि नवंबर 2025 में सांसद पप्पू यादव ने जीएमसीएच पूर्णिया की भयावह स्थिति को लेकर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री को विस्तृत ज्ञापन सौंपा था। उन्होंने बताया था कि पूर्णिया स्थित सरकारी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल सीमांचल क्षेत्र—पूर्णिया, कटिहार, अररिया, किशनगंज के साथ-साथ नेपाल सीमा से सटे इलाकों का एकमात्र प्रमुख तृतीयक स्वास्थ्य संस्थान है, जहाँ प्रतिदिन लगभग 3,000 से अधिक मरीज इलाज के लिए आते हैं। इसके बावजूद अस्पताल में 200 डॉक्टरों की आवश्यकता के मुकाबले मात्र 40 डॉक्टर ही कार्यरत हैं, जिससे स्वास्थ्य सेवाएं चरमरा गई हैं।
स्थिति को और भी अमानवीय बताते हुए सांसद पप्पू यादव ने NCC कंस्ट्रक्शन कंपनी की भूमिका पर कड़ी आपत्ति जताई थी। उन्होंने कहा था कि निर्माण कार्य कर रही कंपनी ने अस्पताल की लिफ्टों पर ताला लगा दिया है और कई वार्डों को बंद कर दिया गया है, जिसके कारण मरीज जमीन पर लेटकर इलाज कराने को मजबूर हैं। स्ट्रेचर और व्हीलचेयर की आवाजाही बाधित होने से गंभीर मरीजों को एक मंजिल से दूसरी मंजिल तक ले जाना असंभव हो गया है। सांसद ने सवाल उठाया कि यदि भुगतान या फंड को लेकर कोई विवाद है, तो किस अधिकार से कोई निजी कंपनी सार्वजनिक अस्पताल की सेवाएं ठप कर सकती है।

अपने ज्ञापन में सांसद पप्पू यादव ने केंद्र सरकार से पांच अहम मांगें रखी थीं—विशेषज्ञ डॉक्टरों व स्टाफ की त्वरित तैनाती, रुके निर्माण कार्यों के लिए फंड जारी करना, NCC कंपनी द्वारा बंद की गई सभी लिफ्टों और वार्डों को तत्काल खुलवाना, दोषी कंपनी या अधिकारियों पर दंडात्मक कार्रवाई/ब्लैकलिस्टिंग तथा फंड विवाद का प्रशासनिक समाधान ताकि मरीजों को नुकसान न हो। अब केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री द्वारा संज्ञान लिए जाने के बाद उम्मीद जगी है कि लाखों लोगों के स्वास्थ्य से जुड़े इस गंभीर मामले में शीघ्र ठोस और सख्त कार्रवाई होगी।

