केरल की सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था पर दुर्भावनापूर्ण हमले की पोलिट ब्यूरो ने की निंदा
केरल की सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था पर दुर्भावनापूर्ण हमले की पोलिट ब्यूरो ने की निंदा

जे टी न्यूज़, केरल : केरल की सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था पर दुर्भावनापूर्ण हमलों की भर्त्सना करते हुए,भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के पोलिट ब्यूरो ने 27 फरवरी को निम्नलिखित बयान जारी किया सीपीआइ (एम) का पोलिट ब्यूरो, केरल की सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था पर दुर्भावनापूर्ण हमलों की भत्र्सना करता है। वह राज्य की स्वास्थ्य तथा परिवार कल्याण मंत्री, वीणा जार्ज पर केएसयू के गुंडों के शारीरिक हमले की भर्त्सना करता है। ये हमले, कांग्रेस तथा अन्य तमाम वाम-विरोधी ताकतों की बौखलाहट को दिखाते हैं। इन ताकतों के पास एलडीएफ सरकार की उपलब्धियों जवाब नहीं है,
जो सत्ता में अपने लगातार दस वर्ष सफलता के सफलता के साथ पूरे कर रही है। सार्वजनिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में एलडीएफ सरकार की उपलब्धियों को दुनिया भर से पहचान तथा प्रशंसा मिली है। यहां तक कि भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार को भी, जो एलडीएफ सरकार की आलोचना करने का कोई मौका नहीं छोड़ती है, इस सचाई को स्वीकार करना पड़ा है और लगातार तीन वर्ष तक केरल को, देश में सबसे ज्यादा संख्या में मुफ्त उपचार मुहैया कराने के लिए पुरस्कृत करना पड़ा है। तिरुअनंतपुरम के रीजनल केंसर सेंटर को गैर-संचारी रोगों के खिलाफ अपनी विशेष पहल के लिए, संयुक्त राष्ट्र संघ से पुरस्कार मिला है। केरल में शिशु मृत्यु दर (इन्फेंट मोर्टेलिटी रेट–आइएमआर) कम कर के 5 पर ले आयी गयी है। यह दर अमरीका से भी बेहतर है, जहां यही दर 5.6 है, जबकि उसकी प्रति व्यक्ति आय कहीं अधिक है। यह सब स्पष्ट रूप से दिखाता है कि एलडीएफ सरकार ने केरल के सार्वजनिक स्वास्थ्य क्षेत्र को कैसे गंभीरता से और जिम्मेदारी से संभाला है।

ये उपलब्धियां, भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार द्वारा लादी गयी गंभीर वित्तीय सीमाओं के बावजूद, हासिल की गयी हैं। यूडीएफ के राज में (2011-16) स्वास्थ्य पर कुल खर्च 18,825.44 करोड़ रु0 रहा था। एलडीएफ सरकार में 2016-21 के दौरान यह दोगुना होकर 36,651.79 करोड़ रु0 हो गया। इसके ऊपर से पिछले चार वर्ष (2021-25) में एलडीएफ सरकार ने 41,510.43 करोड़ रु0 और खर्च किए हैं। यह बढ़ा हुआ व्यय, सार्वजनिक स्वास्थ्य के प्रति एलडीएफ सरकार की प्रतिबद्धता को दिखाता है। कांग्रेस और भाजपा, दोनों को ही सार्वजनिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में एलडीएफ की ये उपलब्धियां हजम नहीं हो रही हैं क्योंकि उनकी नीति तो स्वास्थ्य समेत सभी क्षेत्रों में निजी खिलाडिय़ों को आगे बढ़ाने की है। निजी क्षेत्र अगर राज्य में अपने निवेशों के बावजूद, केरल में गहराई तक पैठ नहीं बना पाया है, तो ऐसा बहुत हद तक राज्य में एक मजबूत सार्वजनिक क्षेत्र की मौजूदगी के चलते ही हुआ है। केरल की सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था पर हमलों का मकसद यही है कि इसे बदनाम करने के जरिए, निजी क्षेत्र के प्रसार के लिए जगह बनायी जाए। सीपीआइ (एम) इन हमलों की भत्र्सना करती है, जनता से आग्रह करती है कि इन कुटिल मंसूबों को पहचानें और केरल में सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था तथा एलडीएफ सरकार की हिमायत के लिए खड़े हों।


