जिला एवं अनुमंडल कृषि पदाधिकारी के झगड़ा में फसल क्षतिपुर्ति नहीं बँटे किसानों में भारी आक्रोश
जिला एवं अनुमंडल कृषि पदाधिकारी के झगड़ा में फसल क्षतिपुर्ति नहीं बँटे किसानों में भारी आक्रोश

जे टी न्यूज़, बेगूसराय : विदित हो कि 19 एवं 20 मार्च 2026 को बेमौसम भीषण वारिस,आँधी,तूफान और ओला गिरने से बड़े पैमाने फसलों एवं फलदार वृक्षों की बर्बादी से किसान मर्माहत एवं हताश थे।खेतों में फसलों की भारी तबाही से रो- रो कर उनका बुरा हाल था। फसल क्षति का मुआवजा देने के सरकारी घोषणा से किसानों में भरोसा पैदा हुई। इस क्रम में विगत 24 एवं 25 मार्च 26 को सभी प्रखंडों से फसल क्षति का रिपोर्ट जिला कृषि पदाधिकारी को प्राप्त हुआ। दो दिनों के अंदर उस रिपोर्ट को सत्यापित करने का निर्देश अनुमंडल कृषि पदाधिकारी को भी मिला। प्रखंड से प्राप्त फसल क्षति का रिपोर्ट को सत्यापित कर जिला कृषि पदाधिकारी को भेजने के निर्देश का अनुपालन शायद आज तक नही हुआ है।पुनः कृषि विभाग के वरीय पदाधिकारी के दबाव में फसल क्षति की वास्तविक रिपोर्ट को घटाकर शुन्य कर देने का मौखिक आदेश पर प्रखंड कृषि पदाधिकारी अपने वरीय पदाधिकारी के दबाव में फसल क्षति का झूठा रिपोर्ट शून्य कर भेजा।रिपोर्ट बदलने की सूचना पर किसानों में भारी रोष को देखते हुए पूर्व में प्रखंडों से प्राप्त हुए फसल क्षति रिपोर्ट के आधार पर जिला कृषि पदाधिकारी ने अपना रिपोर्ट पटना भेजा। उस रिपोर्ट के आधार पर किसानों को फसल क्षति का मुआवजा के लिए कृषि पोर्टल पर हर प्रखंड के पंचायत आधार पर फसल क्षति का रकवा को पोर्टल पर एलाॅट हुआ। जिसके आधार पर फसल क्षति का मुआवजा वितरण का आदेश डी ए ओ ने दिया।मगर अनुमंडल कृषि पदाधिकारी का कृषि समन्वयक और बी ए ओ पर दबाव है कि फसल क्षति का मुआवजा वितरण नहीं होना चाहिए।यदि किसानों के आवेदन का सत्यापन करेंगे तो आप पर हम कार्रवाई करेंगे।

कृषि निदेशक का लिखित आदेश है कि कृषि समन्वक पंचायत स्तरीय उर्वरक प्रतिष्ठानों का रजिस्टर जांच कर सकते हैं। बेगूसराय में लगभग 600 से ज्यादा खुदरा खाद विक्रेता है।हर साल विक्रेताओं को अपने रजिस्टर सत्यापन हेतु 3 से 5 हजार रुपया देना पड़ता था।

मगर इस साल जिला कृषि पदाधिकारी ने स्वयं संपूर्ण जिला के खुदरा विक्रेताओं को मुफ्त में बगैर किसी परेशानी के रजिस्टर सत्यापित कर दिया। फलतः जिनके आमदनी पर डी ए ओ ने डाका डाला वे काफी गुस्से में है।डी ए ओ एवं एस ए ओ के इस विवाद में जिले के किसानों को फसल मुआवजा का भुगतान नहीं होने से किसानों में भारी गुस्सा है। खिसियानी बिल्ली खंबा नोचे के तहत कृषि समन्वयक और बी ए ओ पर दबाव डाला जा रहा हैं कि आप किसानों को मुआवजा भुगतान नहीं होने दें। यदि किसानों को इनपुट मिलेंगे तो आप पर कार्रवाई होगी। डर के मारे सभी बी ए ओ और कृषि समन्वय दोनों अपने वरीय पदाधिकारी के बीच असमंजस की स्थिति में है और किसानों को मुआवजा भुगतान नहीं हो रहा हैं।अपने पदाधिकारी से भयभीत होने के कारण किसानों को फसल क्षति के आवेदनों का सत्यापन नहीं होने से किसानों में चारों ओर रोष व्याप्त है।संयुक्त किसान मोर्चा बिहार के संयोजक मंडल की ओर से किसान नेता अशोक प्रसाद सिंह और दिनेश कुमार ने जिला प्रशासन से अविलंब हस्तक्षेप कर किसानों को फसलक्षति का मुआवजा वितरण करवाने की मांग की। यदि एक सप्ताह में किसानों को भुगतान नहीं हुआ तो किसान सड़क पर उतरने को मजबूर होंगे।

