इनलेट नहर किनारे धंस रही दीवार, स्थानीय लोगों ने एएसआई और जिला प्रशासन से तत्काल मरम्मत व सुरक्षा घेराबंदी की मांग की
इनलेट नहर किनारे धंस रही दीवार, स्थानीय लोगों ने एएसआई और जिला प्रशासन से तत्काल मरम्मत व सुरक्षा घेराबंदी की मांग की

जे टी न्यूज, सासाराम (रोहतास) विश्व प्रसिद्ध शेरशाह सूरी मकबरा परिसर की सुरक्षा व्यवस्था पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। मकबरे के पश्चिमी छोर पर इनलेट नहर के ऊपर बनी चहारदीवारी तेजी से जर्जर होती जा रही है। दीवार के नीचे की मिट्टी कटने से उसका आधार कमजोर पड़ चुका है, जबकि कई स्थानों पर चौड़ी दरारें, उखड़ा प्लास्टर और बाहर निकलती ईंटें किसी बड़े हादसे की आशंका को बढ़ा रही हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते मरम्मत नहीं कराई गई तो यह ऐतिहासिक धरोहर और यहां आने वाले पर्यटकों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन सकती है। प्रत्यक्ष रूप से देखने पर स्पष्ट होता है कि चहारदीवारी के नीचे की भूमि का लगातार कटाव हो रहा है। कई जगहों पर दीवार का निचला हिस्सा हवा में लटका दिखाई देता है। पिलरों में दरारें पड़ चुकी हैं और किनारे का फर्श भी धंसने लगा है। इससे यह संकेत मिलता है कि लंबे समय से इस हिस्से की तकनीकी जांच और रखरखाव नहीं किया गया है। देश विदेश से आने वाले हजारों पर्यटकों की पहचान बने इस ऐतिहासिक स्मारक पर प्रतिदिन बड़ी संख्या में पर्यटक, मॉर्निंग वॉक करने वाले नागरिक और स्थानीय लोग पहुंचते हैं। क्षतिग्रस्त चहारदीवारी के बिल्कुल समीप से लोगों और वाहनों का लगातार आवागमन होता है। ऐसे में यदि दीवार का कोई हिस्सा अचानक गिरता है तो बड़ी जनहानि से इनकार नहीं किया जा सकता। स्थानीय नागरिकों ने आरोप लगाया कि लंबे समय से दीवार की खराब स्थिति बनी हुई है, लेकिन अब तक भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) और संबंधित विभाग की ओर से कोई ठोस पहल नहीं की गई। लोगों का कहना है कि विश्व प्रसिद्ध ऐतिहासिक धरोहर की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए और इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार्य नहीं है। स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन और एएसआई से मांग की है कि दुर्घटना की आशंका को देखते हुए सबसे पहले जर्जर हिस्से की घेराबंदी कर आम लोगों की आवाजाही रोकी जाए, इसके बाद विशेषज्ञों से तकनीकी जांच कराकर पूरी चहारदीवारी की स्थायी मरम्मत कराई जाए। साथ ही पूर्व में क्षतिग्रस्त हो चुके अन्य हिस्सों का भी पुनर्निर्माण कराया जाए, ताकि विश्व धरोहर की गरिमा सुरक्षित रहे और भविष्य में किसी अप्रिय घटना से बचा जा सके। लोगों का कहना है कि शेरशाह सूरी मकबरा केवल रोहतास ही नहीं, बल्कि पूरे देश की ऐतिहासिक पहचान है, इसलिए इसकी सुरक्षा और संरक्षण को लेकर तत्काल प्रभावी कदम उठाना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।


