शिक्षा के सवाल पर देशव्यापी छात्र आंदोलन को दबाने की हर कोशिश नाकाम होगी : दीपंकर भट्टाचार्य

छात्रों पर लाठीचार्ज के जिम्मेदार अमित शाह, धर्मेंद्र प्रधान के बाद उनका ही नंबर

शिक्षा के सवाल पर देशव्यापी छात्र आंदोलन को दबाने की हर कोशिश नाकाम होगी : दीपंकर भट्टाचार्य

छात्रों पर लाठीचार्ज के जिम्मेदार अमित शाह, धर्मेंद्र प्रधान के बाद उनका ही नंबर

जे टी न्यूज, पटना: शिक्षा में व्याप्त भ्रष्टाचार, पेपर लीक, फीस वृद्धि, विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता पर हमले तथा छात्र आंदोलनों पर दमन के खिलाफ बिहार एवं देशभर में चल रहे आंदोलन तथा कई अन्य सवालों पर पटना के गांधी मैदान के समीप IMA हॉल में भाकपा माले *महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य* ने प्रेस वार्ता को संबोधित किया।

प्रेस वार्ता को भाकपा माले विधायक संदीप सौरभ, आइसा अध्यक्ष धनंजय,उपाध्यक्ष सबा आफरीन, सचिव दीपांकर मिश्रा, आरवाईए के राष्ट्रीय अध्यक्ष अजीत कुशवाहा, राज्य सचिव शिवप्रकाश रंजन ने भी संबोधित किया

भाकपा (माले) के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि शिक्षा के सवाल पर आंदोलन लगातार आगे बढ़ रहा है। यह केवल जेन-ज़ेड का नहीं, बल्कि जेन-अल्फ़ा तक नई पीढ़ी का आंदोलन बन चुका है। जेन अल्फा भी अपने स्कूल के सवालों को लेकर आंदोलन कर रहा है।

भोजपुर में हमारी पार्टी के सड़क पर स्कूल चलाने जैसे प्रयोग और दिल्ली से लेकर बिहार तक छात्रों की सक्रिय भागीदारी इस संघर्ष की व्यापकता को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि इस आंदोलन में केवल छात्र ही नहीं, बल्कि मजदूर और मेहनतकश तबके भी उनके साथ खड़े हैं।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने पिछले दिनों वीडियो जारी कर के कहा कि छात्रों को हम माफ कर रहे हैं। लेकिन वीडियो से ऐसा लग रहा था कि प्रधानमंत्री मोदी माफ करने के बहाने रूढ़िवादी एवं पितृसत्तात्मक ताकतों को उकसा रहे हैं। एक 15 वर्षीय छात्रा तक को सुनियोजित तरीके से निशाना बनाया गया। नई पीढ़ी के साथ खड़ा होना लोकतंत्र की रक्षा का प्रश्न है और शिक्षा व्यवस्था में कारगर सुधार के लिए भाकपा (माले) छात्र आंदोलन के साथ मजबूती से खड़ी है।

दिल्ली में छात्रों पर हुए लाठीचार्ज के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को जिम्मेदार ठहराते हुए उन्होंने कहा कि शिक्षा मंत्री के बाद अब जवाबदेही गृह मंत्री की भी तय होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा मुकदमे वापस लेने की घोषणा के बावजूद आंदोलन से जुड़े सभी मामलों को वापस नहीं लिया जा रहा है, जो लोकतांत्रिक अधिकारों और मानवाधिकारों का उल्लंघन है।

भाकपा (माले) विधायक संदीप सौरभ ने कहा कि देशभर के छात्र-युवाओं में मोदी सरकार की नीतियों के खिलाफ गहरा आक्रोश है और नौजवान अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करने को तैयार हैं। उन्होंने कहा कि छात्र आंदोलन, विशेषकर छात्राओं को निशाना बनाकर उसे कमजोर करने की कोशिश की जा रही है। दूसरी ओर बिहार के विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता समाप्त की जा रही है और लगातार फीस वृद्धि के माध्यम से गरीब एवं वंचित तबकों के छात्रों को उच्च शिक्षा से बाहर धकेला जा रहा है।

*आइसा बिहार राज्य अध्यक्ष धनंजय एवं सचिव दीपांकर मिश्रा* ने कहा कि बिहार के सवालों को लेकर आइसा आगे बढ़ेगा। यह आंदोलन बिहार के शिक्षा एवं परीक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार के दिशा में आगे बढ़ेगा। बिहार में स्नातक को पढ़ाई में 7.5 सीजीपीए की बैरियर, पीएचडी में फीस वृद्धि को वापस लेने, नॉन नेट फेलोशिप को लागू करने की मांग को लेकर आंदोलन बिहार में आगे बढ़ेगा।

*आइसा बिहार राज्य उपाध्यक्ष सबा आफरीन* ने कहा कि जंतर-मंतर से पटना तक छात्रों का अभूतपूर्व उभार देखने को मिला है और दिल्ली से बिहार तक समाज के विभिन्न तबकों का व्यापक समर्थन आंदोलन को प्राप्त हुआ। उन्होंने कहा कि नफरत की राजनीति की आड़ में शिक्षा व्यवस्था में फैले भ्रष्टाचार को संरक्षण दिया जा रहा है जिसे इस बार देश का Genz ने चिन्हित कर लिया और निर्णायक लड़ाई लड़ी।

उन्होंने आरोप लगाया कि गांधी मैदान में शांतिपूर्ण आंदोलन पुलिसिया बर्बरता का शिकार हुआ। कई छात्रों और युवाओं को 24 घंटे से अधिक समय तक बिना किसी सूचना के हिरासत में रखा गया तथा जो लोग आंदोलन में शामिल भी नहीं थे, उन्हें भी उठाकर प्रताड़ित किया गया। उन्होंने कहा कि डराने-धमकाने और दमन की राजनीति का जवाब लोकतांत्रिक जनआंदोलन से दिया जाएगा।

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