लकीर पीटते रह गए एनडीए बाले,बाजी मारी ले गए नीतीश -तेजस्वी
लकीर पीटते रह गए एनडीए बाले,बाजी मारी ले गए नीतीश -तेजस्वी
ऐतिहासिक है बिहार में एक लाख युवाओं को सरकारी नौकरी

आलेख -प्रो अरुण कुमार
जेटी न्यूज, मधुबनी
युवाओं का दिल जीतने में वाकई बिहार की नीतीश तेजस्वी की सरकार बाजी मार ले गई है।इस मामले में वर्तमान इंडिया गठबंधन में शामिल बिहार की महागठबंधन की सरकार ने ऐतिहासिक काम किया है।इस मामले में केंद्र की मोदी सरकार वास्तव में पिछड़ गई है। मोदी सरकार का प्रति वर्ष एक करोड़ बेरोजगारों को रोजगार देने का वादा अभी तक सिर्फ चुनावी जुमला साबित हुआ है। जबकि बिहार के उप मुख्यमंत्री तेजस्वी का वादा हक़ीक़त बन एक ऐतिहासिक मिशाल साबित हो रहा है।यही कारण है कि एनडीए के लोग अब फरफरा रहे हैं।डोमिसायल ख़त्म करने के सरकार के फैसले पर सवाल उठाकर युवाओं को भरमा रहे हैं। एनडीए के लोग यह जानते हैं कि किसी भी आम चुनाव के वोटिंग में युवाओं की बड़ी भूमिका होती है। युवाओं की भीड़ जिधर होगी,जीत भी उधर ही होगी।और राज्य और देश के युवा वर्ग उसके जाएंगे जो वादे के मुताबिक रोजगार उपलब्ध करा रहे हैं।

भारत के आज तक के इतिहास में पहली बार तकरीबन एक लाख युवाओं को कोई सरकार एक साथ नियुक्ति पत्र देने का काम किया है।यह कार्य आज दो नवम्बर को पहली बार बिहार में नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार करने जा रही है।इस सरकार ने शिक्षकों की भर्ती के लिए 175000 रिक्तियों के विरुद्ध विज्ञापन निकाला था। एक लाख बीस – बाइस हजार बेरोजगारों ने उत्तीर्णता हासिल की।20-22हजार किसी न किसी कारणों से योगदान नहीं ले सकते हैं। मोटा-मोटी एक लाख युवाओं को आज बिहार की सरकार नियुक्ति पत्र सौंपेगी। 25 हजार नियुक्ति पत्र मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा पटना के गांधी मैदान में बांटे जाएंगे जबकि शेष उम्मीदवारों को उनके अपने जिला मुख्यालय में जिला शिक्षा पदाधिकारी नियुक्ति पत्र वितरित करेंगे।
कहा जा रहा है कि इसके पहले किसी सरकार चाहे केंद्र की हो या फिर राज्यों की हो। इतने बड़े ब्यापक पैमाने शिक्षित युवाओं को सरकारी नौकरी देने का काम नहीं किया है।हां सन् 1978 में बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री कर्पूरी ठाकुर ने पटना के गांधी मैदान मैदान में एक साथ 6000कनीय अभियंताओं को नियुक्ति पत्र देकर सरकारी नौकरी पर लगाया था।उस वक्त भी समाजवादियों की सरकार थी और आज भी बिहार में समाजवादियों की सरकार है।

बिहार में नीतीश – तेजस्वी द्वारा 100000 युवाओं को सरकारी नौकरी देने की बात एनडीए नेताओं को पच नहीं रही है। क्योंकि इस मुद्दे पर केंद्र की मोदी सरकार बुरी तरह पिछड़ गयी है। प्रति वर्ष एक करोड़ युवाओं को सरकारी नौकरी देने का वादा कर उसे पूरा नहीं करने से मोदी सरकार के प्रति युवाओं में भारी रोष है।इधर नीतीश – तेजस्वी की जय-जयकार हो रही है।इसी से फड़फड़ा रहे एनडीए के नेता लोग शिक्षकों की वहाली में डोमिसाइल खत्म करने को मुद्दा बनाकर युवाओं को भरमाने का कुत्सित प्रयास शुरू किया है। बिहार के युवा भी रह मानते हैं जाति , धर्म भाषा और क्षेत्र के आधार पर भारत के किसी भी नागरिक को नौकरी के वंचित करने का अधिकार संविधान किसी को नहीं है। बिहार के युवाओं का यह मानना है कि बिहार की सरकार ने शिक्षकों की भर्ती में डोमिसाइल खत्म कर संविधान का पालन किया है। इसलिए बिहारी युवा एनडीए के किसी चाल में फंसने वाले नहीं हैं। बिहार सरकार की इस बार की शिक्षक भर्ती युवाओं के भविष्य और राज्य लिए विकास के लिए मील का पत्थर तो साबित होगा ही,यह समूचे भारत के लिए ऐतिहासिक भी होगा।



