26 से 28 नवंबर पटना राजभवन पर किसान,मजदूरों का महापड़ाव
26 से 28 नवंबर पटना राजभवन पर किसान,मजदूरों का महापड़ाव

जे टी न्यूज़, पटना : बिहार राज्य किसान सभा के उपाध्यक्ष तथा केन्द्रीय किसान कमिटी के सदस्य प्रभुराज नारायण राव ने कहा कि संयुक्त किसान मोर्चा ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वादा खिलाफी तथा किसान विरोधी नीतियों के खिलाफ राष्ट्रव्यापी अभियान छेड़ा है। यह अभियान दिल्ली से हटकर देश के सभी राज्यों के राजधानियां में राजभवन के सामने 72 घंटे का महापड़ाव डालने का है।संयुक्त किसान मोर्चा देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी केंद्रीय सरकार को बतलाना चाहता है कि आपकी कारर्पोरेट परस्ती देश के सभी किसानों को पता चल गया है। आप देश के किसानों के कितने बड़े शत्रु हैं ।यह अभी किसानों को पता चल गया है ।

आप किसानों की जमीनों को कारर्पोरेट के हाथों में दे देना चाहते हैं ।भयभीत किसान संघर्ष को थान लिया है और आपको यह बतलाना चाहता है कि देश के किसान सिर्फ दिल्ली के इर्द गिर्द नहीं है। बल्कि हिंदुस्तान के हर राज्यों के सुदूर इलाकों में धरती के सीने को चीर कर उसमें पानी और बीज डालकर अनाज उपजाते हैं और समस्त देश की जनता को खिलाते हैं। अब आपकी किसान विरोधी नीतियों को ले जाएंगे खेतों तक, कारखानो तक , पसीना रोपते हाथों तक ।अब यह लिख डालेंगे और किसानो के मस्तिष्क में डाल देंगे की 2024 का लोकसभा चुनाव हमारा है । हमारे खिलाफ और कॉरपोरेट परस्त काम करने वाली सरकार का सफाया है। यह अभियान जाएगा एक-एक किसानों तक हर खलिहानों तक, मजदूरों के हाथों तक।क्योंकि अब किसान अकेले नहीं ।उनके साथ जुड़ चुके हैं अपनी पसीना और खून को जलाकर देश को संवारने वाले मेहनतकश मजदूर ।

इतिहास इस बात की साक्षी है कि जब भी देश का हुक्मरान किसान और मजदूर विरोधी हो जाता है । तो वह जन विरोधी कहलाता है ।अधिनायक वादी कहलाता है ।तानाशाह कहलाता है और उसकी आयु ज्यादा दिनों की नहीं होती मिट्टी में मिल जाता है। संयुक्त किसान मोर्चा और केंद्रीय ट्रेड यूनियनों की एकजुटता देश के अंदर एक नई बुनियाद डालेगी ।क्योंकि इन दोनों के श्रम के अलावे विकास का कोई दूसरा रास्ता नहीं होता। शोषण और उत्पीड़न की व्यवस्था नहीं चलेगा ।अब यह देश को खुशहाल करने वाली व्यवस्था को लाना पसंद करेंगे ।जो श्रम और श्रम संसाधनों के प्रति वफादार हो और इस रास्ते ही विकास का उसका लक्ष्य हो । संयुक्त किसान मोर्चा और केंद्रीय ट्रेड यूनियन इतिहास के पन्नों को पढ़ने के बाद फासीवादी ताकत को जिस तरीके से सोवियत संघ के प्रधानमंत्री कामरेड जे बी स्टालिन ने दुनिया को मुट्ठी में करने वाले फासीवादी तानाशाह हिटलर की दुर्दशा की थी ।जिसको अपने ही हाथों समाप्त होने के शिवाय दूसरा कोई मार्ग नहीं होता। 26 से 28 नवंबर तक का राजभवन पर महापड़ाव एक ऐतिहासिक पहलू है ।

क्योंकि ब्रिटिश हुक्मरानों को इस देश से खदेड़ने के बाद पहला मौका है जब देश के किसान और मजदूर की एकजुटता हो रही है ।दुनिया के किसी देश में कांति हुई है ,तो उसमें किसान और मजदूर की महत्वपूर्ण भूमिका हुई है ।बल्कि निर्णायक भूमिका इनका ही हुआ है। यह महापड़ाव देश को एक नई दिशा देगा । जिसमें किसानो और मजदूरों को धोखा देने वाली नीतियों को समाप्त कर विकास का मार्ग प्रशस्त होगा।
