नारी सशक्तिकरण के बगैर विश्वगुरु की कल्पना असंभव : डॉ. नंद कुमार
नारी सशक्तिकरण के बगैर विश्वगुरु की कल्पना असंभव : डॉ. नंद कुमार
जे टी न्यूज, पटना:
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर जयनगर के डी. बी. कॉलेज में डॉ. शैलेश कुमार सिंह के नेतृत्व में 21वीं सदी में नारी और उसके सशक्तिकरण की प्रासंगिकता विषयक विचार-गोष्ठी का भव्य शुभारंभ किया गया।
गोष्ठी का शुभारंभ मुख्य अतिथि सह क्षेत्रीय निदेशक इग्नू डॉ. संतन राम, विशिष्ट अतिथि डॉ. पुष्पा कुमारी, डॉ. बरखा अग्रवाल, मुख्य वक्ता प्रकाश प्रियांशु, प्रधानाचार्य डॉ. नंद कुमार, परीक्षा नियंत्रक डॉ. बुद्धदेव प्रसाद सिंह व आयोजक डॉ. शैलेश कु० सिंह ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया, गोष्ठी का शुभारंभ संगीत-शिक्षक गुड्डू गुलशन के द्वारा माँ सरस्वती की वंदना ‘जयति जय-जय माँ सरस्वती’ के साथ हुआ।
तदुपरांत वाणिज्य विभागाध्यक्ष डॉ. शैलेश कुमार सिंह ने विषय प्रवेश कराते हुए कहा कि नारी और उसके सशक्तिकरण की प्रासंगिकता पर चर्चा अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि जिस लड़ाई की शुरुआत 1909 में हुई वह 100 वर्षों के बाद भी अपने अधिकारों के लिए भटक रही है।
विशिष्ट अतिथि डॉ. पुष्पा कुमारी ने नारी सशक्तिकरण के लिए आर्थिक, सामाजिक मजबूती के साथ वैचारिक शुद्धता पर बल दिया।
महाविद्यालय की पुराछात्रा डॉ. रानी पुरुषोत्तमा ने कहा कि वर्तमान परिवेश में नारी के साथ-साथ पुरुष सशक्तिकरण का समन्वय जरूरी। हमें किससे, कहाँ और किस रूप में आजादी चाहिए, यह नारी को तय करना होगा।
डी.बी. कॉलेज की वरिष्ठ शिक्षाविद् डॉ. बरखा अग्रवाल ने कहा कि महिला आदिकाल से सशक्त थी, सशक्त है और सशक्त रहेगी। अब महिला सशक्तिकरण की बजाय उसकी भूमिका पर चर्चा होनी चाहिए।
डी.बी. कॉलेज के परीक्षा-नियंत्रक एवं हिन्दी विभागाध्यक्ष डॉ. बुद्धदेव प्रसाद सिंह ने कहा कि सामाजिक संतुलन के साथ विकसित राष्ट्र के लिए महिला सशक्तिकरण अत्यंत जरूरी है।
गोष्ठी को संबोधित करते हुए मुख्य वक्ता कलकत्ता के युवा शिक्षाविद् डॉ. प्रकाश प्रियांशु ने कहा कि महिला सशक्तिकरण के लिए उन्हें स्वयं न केवल राजनैतिक, आर्थिक स्वतंत्रता की जरूरत है बल्कि उन्हें भारतीय सांस्कृतिक स्तर पर मनोवैज्ञानिक व सामाजिक रूप से मजबूत होने की आवश्यकता है।इग्नू के के क्षेत्रीय निदेशक सह मुख्य अतिथि डॉ. संतन राम ने कहा कि भारतीय परिदृश्य में नारी को जगत् जननी का दर्जा दिया गया है। हमारे यहाँ नारी वैदिक काल से लेकर आजतक कभी अशक्त हुई ही नहीं, वह सशक्त थी, सशक्त है और सशक्त रहेगी। उसके सशक्तिकरण की चर्चा पाश्चात्य सभ्यता से अंगीकृत किया गया है; गार्गी, मैत्रेयी, रानी लक्ष्मीबाई, कल्पना चावला, सुनीता विलियम्स से लेकर द्रौपदी मुर्मू तक की यात्रा नारी सशक्तिकरण का प्रतिबिंब है।
अध्यक्षता करते हुए प्रधानाचार्य डॉ. नंद कुमार ने कहा कि नारी सशक्तिकरण के बगैर भारत को विश्वगुरु बनाने की कल्पना असंभव है। इसलिए नारी को सामाजिक, आर्थिक और मनोवैज्ञानिक रूप से सशक्त होना होगा।
इस दौरान नारी सशक्तिकरण के क्षेत्र में कार्य करने के लिए पटना की संगीत शिक्षिका सुरभि शिवानी, दरभंगा के युवा शिक्षाविद् डॉ. जमील हसन अंसारी, डॉ. जयशंकर सिंह तथा सिवान के संगीत-शिक्षक गुड्डू गुलशन को अतिथिगण के द्वारा पाग व प्रतीक चिन्ह प्रदान कर ‘नारी-शक्ति-सम्मान’ से सम्मानित किया गया।
संचालन राजनीति विज्ञान विभाग के युवा शिक्षाविद डॉ. अखिलेश श्रीवास्तव और धन्यवाद ज्ञापन भूगोल विभागाध्यक्ष डॉ. राम कुमार सिंह ने किया।
इस दौरान मुख्य रूप से इग्नू के क्षेत्रीय निदेशक डॉ. संतन राम, डॉ. नंद कुमार, डॉ. बुद्धदेव प्रसाद सिंह, डॉ. पुष्पा कुमारी, डॉ. बरखा अग्रवाल, डॉ. रानी पुरुषोत्तमा, डॉ. रूबी कुमारी साह, डॉ. जमील हसन अंसारी, डॉ. जयशंकर सिंह, डॉ मानस वर्मा, डॉ. कोमल कुमारी, डॉ. रामप्रवेश निराला, डॉ. चंदन सिंह, डॉ. श्यामरूप चौधरी, डॉ. आनंद राज, डॉ. भोलानाथ ठाकुर, निक्की कुमारी, सपना ठाकुर, सौम्या ठाकुर सहित सैकड़ों छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे।


