आसान नहीं है भूमि का सर्वे कराना

आसान नहीं है भूमि का सर्वे करानाजे टी न्यूज, मधुबनी : बिहार सरकार के आदेशानुसार मधुबनी जिला के लदनियां प्रखंड में सर्वे का काम शुरू हो चूका है । सभी जगहों की हालत जो भी हो परंतु लदनिया अंचल के किसानों की हालत ठीक नहीं है। किसानों को अपनी जमीन पर दखल से सम्बंधित दस्तावेज , सर्वे पैमाइस , भूमाक, कानूनगो के पास जमा करना होता है, जो अशान नहीं है। पूर्वजों से प्राप्त भूमि जिसका कागजात या तो घर में नहीं है,या फिर आपदा के समय अग्नि की भेंट चढ़ गया।आज इस महत्वपूर्ण समय में दस्तावेज संग्रह करने मे रैयतों को मायूस होना परता है । जब की सरकार के द्वारा डिजिटाइजेशन किया गया है, जो अधिकारी एवं कर्मचारी के उदासीनता का शिकार हो कर रह गया है। डिजिटाइजेशन जमाबंदी मे भूस्वामी के भूमि का खेसरा वार प्रविष्टि नहीं होने के कारण उचित साक्ष्य नहीं दे पा रहे है। किसानों का आरोप है कि खेसरा वार रकवा कि प्रविष्टि के लिये परिमार्जन के तहत आवेदन करना होता है। जब किसान उस कार्य के लिए आवेदन करते हैं तो अंचल कार्यालय से उनसे जमाबंदी कि शुद्धि पत्र मांगा करते हैं। किसी किसी रैयत कि भूमि बीस बर्ष पहले खारिज हुआ था।और उस समय अंचल कार्यालय से उन्हें शुद्धि पत्र नहीं हुआ या हुआ भी तो संभाल कर रखने वाले लोग स्वर्ग सुधार गये। ऐसी स्थिति मे अंचल कार्यालय से उन किसानो का आवेदन को अस्वीकृत कर दिया जाता है । संप्रति किसानों को सरकार के इस महत्वाकांक्षी योजना से वंचित होने का डर सता रहा है तो सरकार के इस महत्वाकांक्षी योजना पर प्रश्न चिन्ह उत्पन्न हो गया है । किसान नेता लाला झा , लाल बिहारी सिंह, भाकपा नेता राम खेलावन यादव, राम चन्द्र यादव ,कारी कामत,बिल्टू यादव ने बताया कि लदनिया अंचल कार्यालय मे बिचौलिया हावी है अगर मेल जोल का भाव नहीं मिलता तो दाखिल ख़ारिज भी ठंडे बस्ते मे दल दिया जाता है भाव नहीं मिलने से किसी दर्ज जमाबंदी मे भी खेसरा अद्यतन करने मे बकास्त कह कर आवेदन को निरस्त कर दिया जाता है ।कोई भी काम समय पर कर्यालय से ये कह कर विलम्ब करते है ,कि कर्मी का अभाव है , किसानों की इस स्थिति के लिए जल्द ही हम लोग राजस्व मंत्री को अपना मांग पत्र समर्पित कर आंदोलन की रूप रेखा तैयार करने के लिए बैठक करने का निर्णय लिया है।

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