विकसित भारत बढ़ता बिहार विषय पर संगोष्ठी का आयोजन

विकसित भारत बढ़ता बिहार विषय पर संगोष्ठी का आयोजन जे टी न्यूज, सासाराम (रोहतास) शांति प्रसाद जैन महाविद्यालय के राजनीतिक शास्त्र विभाग द्वारा बुधवार को विकसित भारत, बढ़ता बिहार विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी की अध्यक्षता विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर डॉ अलाउद्दीन अजीजी एवं संचालन सहायक प्रोफेसर डॉ अखिलेश कुमार ने किया। संगोष्ठी के मुख्य अतिथि वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय के राजनीतिक शास्त्र के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रोफेसर डॉ गांधी जी राय, विशिष्ट अतिथि अवधूत भगवान राम महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ विनोद कुमार सिंह, पटना हाई कोर्ट के अधिवक्ता इनामुल हक थे। संगोष्ठी को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि प्रोफेसर डॉ गांधी जी राय ने कहा कि अमेरिका, रूस एवं चीन द्वारा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की बढ़ती हुई साख को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तरफ दोस्ती का हाथ बढ़ा रहे हैं। प्रधानमंत्री की सर्वव्यापी, सर्वस्पर्शी ,समावेशी नीतियां आज भारत दुनिया के लिए उपयोगी बना है और इसीलिए सर्वथा सभी देश भारत के साथ अपना संबंध स्थापित कर रहे हैं। विशिष्ट अतिथि अवधूत भगवान राम महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ विनोद कुमार सिंह ने कहा कि विकसित भारत हर पीढ़ी के भारतीयों का सपना रहा है। भारत को 2047 तक विकसित बनाने के लक्ष्य को आत्मसात करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसकी दिशा दिखाई है। बिहार सरकार द्वारा आयोजित विभिन्न कार्यक्रम के तहत हमें अभी तक 300 से ज्यादा अलग-अलग उद्योगों के लिए 50,530 करोड़ से ज्यादा के निवेश प्रस्ताव मिल चुके हैं। पटना हाई कोर्टके अधिवक्ता इनामुल हक ने कहा कि बिहार में औद्योगिक ढांचा 1990 से 2005 के बीच पूरी तरह समाप्त हो चुका था। केंद्र एवं राज्य सरकार कुछ वर्षों से सतत प्रयास कर रही है कि इस ढांचे को पुनर्जीवित किया जाए। इस दिशा में हमें सफलता भी मिली है क्योंकि बिहार में उद्योग के विकास के लिए सकारात्मक माहौल बन रहा है। संगोष्ठी के अध्यक्ष राजनीति शास्त्र विज्ञान विभाग के प्रोफेसर अलाउद्दीन अजीज जी ने कहा कि भारत के युवाओं में हर वह शक्ति है जो इसे एक विकसित राष्ट्र के रूप में स्थापित कर सकती है। एबीआर कॉलेज के भौतिक विज्ञान विभाग के प्रयोगशाला सहायक ओम प्रकाश सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री जी ने बिगत 10 वर्षों में विकसित भारत के आधारशिला रखी है और उसका ही प्रभाव है कि हम आत्मनिर्भरता हासिल करने की दिशा में एक कदम बढ़ा दिए हैं। संगोष्ठी में महाविद्यालय के शिक्षक_ शिक्षकेतर कर्मचारीतथा छात्र छात्राएं उपस्थित थे।

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