श्री श्री 1008 श्री मद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के तीसरे दिन श्रद्धालु श्रोता मंत्रमुग्ध
श्री श्री 1008 श्री मद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के तीसरे दिन श्रद्धालु श्रोता मंत्रमुग्ध
जे टी न्यूज, खगड़िया: जब पुत्र सफल कर जाता है तो उसका श्रेय पिता खुद लेते हैं किंतु जब असफल हो जाते हैं तो भगवान पर दोष ठहराते हैं। मैं का अहं गौण करने की जरूरत है। तभी सच्चे अर्थों में कर्म की प्रधानता होगी, कर्म ही पूजा कहलाएगी, कर्म ही धर्म होगा। अन्यथा कर्म पाखंड बन कर रह जायेगा।
उक्त अमृतवाणी सीताराम शास्त्री महाराज ने उतरी रेलवे कॉलोनी टेंपू स्टैंड निकट खगड़िया में आयोजित साप्ताहिक भागवत कथा ज्ञान यज्ञ को संबोधित करते हुए कहा।
उन्होंने महाभारत का संदर्भ को रेखांकित करते हुए कहा कि जब अर्जुन ने सामने देख अपने पर तीर चलाने से गांडीव रख दिया तब उन्हें श्री कृष्ण ने अन्याय के खिलाफ कर्तव्य बोध कराने का कार्य किया। कहा कि पाप पुण्य, अपना पराया, कुछ नहीं होता, अधिकार और न्याय के लिए संघर्ष करना ही कर्तव्य कर्म है।
जब जब द्रोपदी के साथ अन्याय, तुम्हारे अधिकार का हनन हो रहा था तो सामने कौरव के सभी पक्षधर मौन क्यों थे ? इसलिए कर्म की मर्म को समझने की जरूरत है।
शून्य से श्रृष्टि हुई। जल अग्नि पृथ्वी वायु आकाश प्रकृति का निर्माण हुआ। आज प्रदूषित कर विकृत कर अतिक्रमण कर जनमानस से अधिकार विमुख किया जा रहा है। विश्व व जन कल्याण हेतु कर्म करना होगा।
कार्यक्रम में सरपंच संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष किरण देव यादव, जदयू नेता राजू फोगला, अधिवक्ता ओमप्रकाश अग्रवाल, देश बचाओ अभियान के महासचिव उमेश ठाकुर, महिला विकास सेवा संस्थान के संरक्षक मधुबाला, समाजसेवी बालकृष्ण, तितली भारती, सार्जन कुमार आदि ने भाग लिया।
सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालुओं ने मंत्रमुग्ध होकर कथावाचन का रसास्वादन किया। कार्यक्रम में जय श्री कृष्ण, राधे राधे, का जयकारा गूंजायमान रहा।
जय कृष्णा , मिटाओ तृष्णा ,
कोई ना रहे आधे आधे, बोलो राधे राधे,,,, कीर्तन ने सभी दर्शक श्रोताओं को झूमने को विवश कर दिया।
