जेई/एईएस नियंत्राणार्थ दिया गया प्रशिक्षण सुपौल चमकी के लक्षण मिलते ही बच्चों को तुरंत सरकारी अस्पताल ले आएं देरी न करें
जेई/एईएस नियंत्राणार्थ दिया गया प्रशिक्षण
सुपौल चमकी के लक्षण मिलते ही बच्चों को तुरंत सरकारी अस्पताल ले आएं देरी न करें

जे टी न्यूज, सुपौल:
जिले में एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम (एईएस) और जापानी इंसेफेलाइटिस (जेई) बीमारी की रोकथाम और प्रभावी नियंत्रण को लेकर बुधवार को सदर अस्पताल परिसर में एकदिवसीय प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया. प्रशिक्षण शिविर का आयोजन सिविल सर्जन डॉक्टर ललन कुमार ठाकुर की अध्यक्षता में हुई. जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी सह प्रशिक्षण मास्टर ट्रेनर दो दीप नारायण राम एवं डॉ. चंद्रभूषण मंडल के द्वारा दिया. प्रशिक्षण सभी प्रखंड के एमओआईसी,बीएचएम ,बी सी एम ,भीबीडीएस को दिया गया.

गर्मियों में बढ़ जाते हैं एईएस के मामले:
जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी ने कहा कि गर्मी बढ़ने के साथ ही जिले में एईएस/जेई का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए इससे बचाव हेतु स्वास्थ्य विभाग एवं प्रभावित प्रखंडों के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी व आशा, आईसीडीएस, जीविका के साथ ही अन्य विभाग अलर्ट मोड में रहे। ताकि एईएस/जेई के प्रभाव से बच्चों को सुरक्षित किया जा सके। उन्होंने बताया एईएस/जेई से ग्रसित बच्चों को अस्पतालों में 24 घण्टे इमरजेंसी इलाज की सुविधा उपलब्ध करने का निर्देश दिया गया है साथ ही प्रत्येक प्रखंड में एईएस का दो बेड अनुमंडलीय अस्पताल में चार बेड तथा सदर अस्पताल में 10 बेड सुरक्षित किया गया है। व्यापक पैमाने पर प्रचार प्रसार कराना सुनिश्चित करें।
एईएस के मामलों से बच्चों को बचाने के लिए सभी पीएचसी के प्रभारियों व स्वास्थ्य अधिकारियों को अलर्ट रहना होगा। उन्होंने बताया कि अप्रैल से जुलाई तक के महीने में छह माह से 15 वर्ष तक के बच्चों में चमकी की संभावना ज्यादा होती है। बच्चों को सुरक्षा के लिए धूप में निकलने से बचना चाहिए। अधपके कच्चे फल का सेवन नहीं करना चाहिए। साथ ही साफ सफाई का पूरा ध्यान रखना चाहिए। चमकी से प्रभावित बच्चों का सही समय पर तुरंत इलाज होना जरूरी है। उन्होंने बताया कि चमकी के लक्षण मिलते ही बच्चों को तुरंत सरकारी अस्पताल ले आएं, बिल्कुल भी देरी न करें।
प्रचार प्रसार के साथ जागरूकता है जरूरी:
पीएचसी स्तर पर कोआर्डिनेशन प्लान तैयार कर ग्रास रूट लेवल पर मरीजों की इलाज सुनिश्चित की जाए। गोल्डन आवर में मरीजों के लिए एंबुलेंस, आवश्यक दवा की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। विशेषकर महादलित टोला में अभियान चलाकर विकास मित्र, आंगनबाड़ी सेविका/ सहायिका, स्थानीय जनप्रतिनिधि छोटे बच्चे एवं उनके माताओं को जागरूक करना सुनिश्चित करें। उन्होंने निर्देश देते हुए कहा कि 24 x 7 नियंत्रण कक्ष हर हाल में क्रियाशील रखें ।
मौके पर जिला मलेरिया कार्यालय से जिला वेक्टर रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ दीपनारायण राम, वेक्टर रोग नियंत्रण पदाधिकारी सिकन्दर कुमार , अनिशा भारती , vbdc उदय शंकर मौजूद थे । सभी प्रखंड से MOIC , BHM , BCM , VBDS उपस्थित थे। इस दौरान Piramal , WHO , UNICEF के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे।


