समकालीन उपन्यास और कथाकार दीर्घ नारायण के उपन्यास पर चर्चा गोष्ठी

समकालीन उपन्यास और कथाकार दीर्घ नारायण के उपन्यास पर चर्चा गोष्ठीजे टी न्यूज़, पटना : हिंदी उपन्यास के समकालीन परिदृश्य में जो उपन्यासकार बेहतरीन लेखन कर रहे हैं उनमें दीर्घ नारायण एक महत्वपूर्ण उपन्यासकार हैं। उनका नया उपन्यास अधभूतल छियानवे रियल स्टेट के माध्यम से अपने समय की पेचीदगियों को सशक्त ढंग से सामने लाता है। ये बातें ‘समकालीन उपन्यास और कथाकार दीर्घ नारायण’ विषयक संगोष्ठी में शामिल वक्ताओं ने कहीं। पटना के श्रीअरविंद महिला कॉलेज में आयोजित इस एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का उद्घाटन लखनऊ से आये वरिष्ठ लेखक शैलेन्द्र सागर, महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति कृष्ण कुमार सिंह, इंदौर से आए वीणा के संपादक राकेश शर्मा और ‘नई धारा’ के संपादक शिवनारायण ने समवेत रूप से की। संगोष्ठी के इस पहले सत्र की अध्यक्षता शिवनारायण ने की और स्वागत भाषण कालेज की प्राचार्या डा साधना ठाकुर ने की। कार्यक्रम का संचालन डा ध्रुव कुमार ने किया। इस सत्र में धन्यवाद ज्ञापन डा बलिराजी मौर्या ने किया। महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति कृष्ण कुमार सिंह ने कहा कि दीर्घ नारायण रेणु जी के अंचल से आनेवाले अपने समय के संभावनाशील लेखक हैं। इस उपन्यास में गांधीवादी दर्शन और क्रांतिकारिता की पुट है। कथाकार शैलेन्द्र सागर ने कहा कि यह अपने समय का दीर्घ और पठनीय उपन्यास है। उन्होंने कहा कि लेखक ने गहराई से विषय की विवेचना की है। नई धारा के संपादक शिवनारायण ने कहा कि समकालीन उपन्यासों में हाशिए का जीवन आज के समकालीन उपन्यासों में व्यापक रूप में आ रहा है। उन्होंने कहा कि दीर्घ नारायण में अपने समय की त्रासदी को पकड़ने का हुनर है। इस अवसर पर रचनाकार दीर्घ नारायण ने उपन्यास की रचना प्रक्रिया पर अपना अनुभव साझा करते हुए कहा कि गांधीजन जीवन दर्शन और आशावाद उनकी रचना की धुरी रहा है। संगोष्ठी के दूसरे सत्र की अध्यक्षता कृष्ण कुमार सिंह ने की और संचालन प्रियंका के. जायसवाल ने किया। संगोष्ठी के इस सत्र में शिवदयाल, संतोष दीक्षित,अरुण नारायण, संजीव चंदन, डा वंदना भारती, डा मनीष भारती आदि ने संबोधित किया। शिवदयाल ने बहुत विस्तृत ढंग से उपन्यास पर अपनी बात रखी। उन्होंने माना कि दीर्घ नारायण में अपने समय की विडंबना को आंकने की अचूक क्षमता है। संजीव चंदन ने स्त्रीवादी नजरिये से उपन्यास के संपूर्ण गठन पर अपने विचार रखे। कार्यक्रम में उपस्थित वक्ताओं के अलावा प्राचार्या डा साधना ठाकुर के साथ त सत्यकृति शर्मा को भी अंगवस्त्र और बुके देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में चितरंजन भारती, प्रियंवद जायसवाल, वीरेंद्र झा, रणविजय, सतीश पांडेय,सहित बड़ी संख्या में कालेज की छात्राओं की भी अच्छी उपस्थिति रही।
इस कार्यक्रम का आयोजन अखिल भारतीय प्रगतिशील लघु कथा मंच और बागडोर के सौजन्य से श्री अरविंद महिला कॉलेज के हिंदी विभाग द्वारा किया गया।

Related Articles

Back to top button