विधान सभा की हांट सीट मधुबनी में होगा कांटे का संघर्ष

क्या राजद लगायगा जीत का हैट्रिक, या होगा एनडीए का कब्जा

विधान सभा की हांट सीट मधुबनी में होगा कांटे का संघर्ष

क्या राजद लगायगा जीत का हैट्रिक, या होगा एनडीए का कब्जा

जे टी न्यूज,मधुबनी(अरुण कुमार)

मिथिला की हृदय स्थली मधुबनी जिला मुख्यालय विधान सभा सीट चुनावी दंगल में हांट मानी जाती है. यहाँ हमेशा से राजद और भाजपा में कडा संघर्ष होता रहा है.पिछले दो चुनावों से इस सीट पर राजद का कब्जा है. देखना यह है कि आगामी चुनाव में राजद जीत कर हैट्रिक बनाती है या फिर से इस सीट कब्जा जमाने में एनडीए कामयाब होता है.माना जा रहा है कि इस बार राजद अपने पुराने पहलवान पूर्व उद्योग मंत्री समीर कुमार महासेठ को फिर से मैदान में उतार सकती है. जबकि एनडीए गठबंधन की ओर से यह सीट एलजेजेआर के खाते में गई है. माना जा रहा है कि उपेंद्र कुशवाहा इस सीट से पार्टी के कथित फाइनेंसर माधव आनंद को मैदान में उतार सकते है.यही बात राजद के पक्ष में बताई जा रही है. माधव आनंद वाहरी हैं. दूसरी बात भाजपा के टिकट के दावेदार स्थानीय नेताओं का आक्रोश भी है. यही दोनो बाते 2020 के इतिहास को दोहराने का कारण बन जा सकता है.


अभी फिलहाल इस सीट पर राजद का कब्जा है. 2020 के चुनाव में राजद प्रत्याशी समीर कुमार महासेठ 6814 मतों से इस सीट पर जीत दर्ज की थी.उस समय उन्होंने एनडीए समर्थित वीआईपी प्रत्याशी सुमन महासेठ को हराया था.उस वक्त भी भाजपा के स्थानीय टिकट दावेदारों का आक्रोश एनडीए प्रत्याशी को झेलना पडा था. रही सही कमी लोजपा प्रत्याशी अरविन्द कुमार पूर्वे ने पूरी कर दी थी.उन्हें तब 15818 मत प्राप्त हुआ था. विजयी प्रत्याशी समीर कुमार महासेठ को 71332 मत प्राप्त हुआ था जबकि एनडीए प्रत्याशी सुमन कुमार महासेठ को 59556 मत मिला था.
इसके बाद सुमन महासेठ 2024 के लोकसभा चुनाव में इंडिया गठबंधन समर्थित वीआईपी कैंडिडेट के रुप में झंझारपुर लोकसभा सीट से चुनाव लडा था.कहा जा रहा है इस बार भी 2015 की तरह इस बार भी कोई न कोई भाजपा कार्यकर्त्ता बगाबत कर विरोध में नोमिनेशन कर सकता है. 2015 में भाजपा के निवर्तमान विधायक रामदेव महतो ने निर्दलीय मैदान में उतरकर एनडीए का खेल खराब कर दिया था.उनहें तब 8287 मत प्राप्त हुआ था. यही एनडीए कैंडिडेट की हार का करण बना था.इस बार भी विरोध का स्वर मुखर होने लगा है.


मधुबनी ओल्ड दरभंगा जिला से 1972 में अलग हुआ था. मधुबनी जिले में फिलहाल पांच अनुमंडल, इक्कीस प्रखंड और1115 गांव है.यह धरती कम्युनिस्टों और समाजवादियों की रही है. कभी शहीद सूरज नारायण सिंह यहाँ का प्रतिनिधित्व किया था.
मिथिला पेंटिंग या मधुबनी पेंटिंग और दुल्हा बाजार सौराठ सभा गाछी के लिए प्रसिद्ध मधुबनी विधान सभा का परिणाम तो 14 नवम्बर को निकलेगा लेकिन लोगों की नजर अभी से इस बात पर लगी हुई है कि राजद के कद्दावर नेता पूर्व उद्योग मंत्री समीर कुमार महासेठ जीत की हैट्रिक लगाते हैं या फिर एनडीए फिर से इस सीट पर कब्जा जमाने में कामयाब होता है.

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