कर्पूरी ठाकुर की राजनीति: सत्ता नहीं, संघर्ष की शैली

कर्पूरी ठाकुर की राजनीति: सत्ता नहीं, संघर्ष की शैली

जे टी न्यूज, समस्तीपुर: आज के युवाओं के लिए जननायक कर्पूरी ठाकुर केवल इतिहास नहीं, बल्कि राजनीति की एक जीवित सीख हैं। उनकी राजनीति सत्ता पाने की नहीं, बल्कि अन्याय से टकराने की शैली थी। वे कुर्सी से नहीं, अपने विचारों से ताक़त लेते थे। उनके लिए राजनीति का अर्थ था—सच बोलने का साहस और ग़लत के सामने चुप न रहना।
कर्पूरी ठाकुर जी ने दिखाया कि नेता वही है जो गरीब, छात्र, किसान और मज़दूर के साथ खड़ा हो। उन्होंने आरक्षण, हिंदी भाषा और सामाजिक न्याय जैसे मुद्दों पर बिना समझौते के राजनीति की।

जब दबाव बढ़ा, तब भी वे झुके नहीं—यही उनकी सबसे बड़ी राजनीतिक पहचान थी।
आज के दौर में, जब राजनीति को शॉर्टकट और दिखावे से जोड़ा जाता है, कर्पूरी ठाकुर की सादगी और ईमानदारी युवाओं के लिए प्रेरणा है। वे सिखाते हैं कि राजनीति करियर नहीं, चरित्र का इम्तिहान है—और वही नेता याद रखे जाते हैं जो उस इम्तिहान में खरे उतरते हैं।
प्रो. (डॉ.) कुशेश्वर यादव
प्रधानाचार्य
बिलट महथा आदर्श महाविद्यालय, बहेड़ी

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