प्रकृति की गोद में
- प्रकृति की गोद में
जे टी न्यूज
प्रकृति की गोद में मिलती है असीम खुशियाँ,
नीलाभ शिखर से उतरती है प्रेमिल रश्मियाँ।
उर्जा का संचार करती खिलखिलाती है कलियाँ।
हर्षित धरा, फूलों की घाटी कल कल बहती नदियाँ।
उँचे उँचे पर्वत श्रृंखला मधुर प्रेम राग सुनाते झरने,
झूमती है हरी भरी लताएँ महकती है फिजाएँ।
मन की डाली डाली सुरभित है हरसिंगार सी,
दूब सी जीने की जिजीविषा जगाती उमंगें भरती,
हृदय में प्रेम रस घोलती ये मदमस्त महकती हवाएँ।
जीवन को मधुमास बनाती उर में नव प्यास जगाती,
ये प्राजक्ता, परिजात पुष्प सी महकती है फिजाएँ।।
ओस की शफ्फाक बूँदें पत्तों पे बनाती आकृतियाँ,
तन मन को जन जन को प्रफुल्लित पुलकित करती,
फूलों कलियों पे मँडराती ये रंग बिरंगी तितलियाँ।
मिट्टी की सौंधी सौंधी खुशबू से महकती है फिजाएँ।।
प्रकृति की गोद में मिलती है शीतलता असीम खुशियाँ।
स्वरचित
अनुपमा सिंह सोनी


