जयनगर रेलवे स्टेशन पर पोलियो अभियान में भारी लापरवाही बच्चों की सुरक्षा से खिलवाड़
जयनगर रेलवे स्टेशन पर पोलियो अभियान में भारी लापरवाही बच्चों की सुरक्षा से खिलवाड़

जे टी न्यूज, सुरेश कुमार गुप्ता (जयनगर) : सरकार द्वारा पोलियो उन्मूलन को लेकर लगातार जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। देश को पोलियो मुक्त बनाए रखने के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड और सार्वजनिक स्थानों पर विशेष पोलियो टीमों की तैनाती की जाती है ताकि यात्रा करने वाले छोटे बच्चों को भी पोलियो की खुराक समय पर दी जा सके। लेकिन जयनगर रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म संख्या-1 पर पोलियो अभियान में गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया है, जिसने स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय लोगों के अनुसार प्लेटफार्म संख्या-1 पर ड्यूटी पर तैनात पोलियो दलकर्मी अपने कार्य के प्रति लापरवाह नजर आए। आरोप है कि ड्यूटी के दौरान दलकर्मी आपस में गप्प लड़ाने और मोबाइल फोन देखने में व्यस्त रहते हैं। इस दौरान कई छोटे बच्चे उनके सामने से गुजर जाते हैं, लेकिन उन्हें पोलियो की दवा तक नहीं पिलाई जाती। यात्रियों का कहना है कि रेलवे स्टेशन जैसे संवेदनशील स्थान पर इस तरह की लापरवाही बेहद चिंताजनक है।स्थानीय लोगों ने बताया कि कई बार बच्चों के अभिभावकों को स्वयं पोलियो टीम को आवाज देकर दवा पिलाने के लिए कहना पड़ता है। बावजूद इसके टीम के कुछ सदस्य उदासीन बने रहते हैं। लोगों का कहना है कि सरकार करोड़ों रुपये खर्च कर पोलियो उन्मूलन अभियान चला रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर कुछ कर्मियों की लापरवाही से अभियान की गंभीरता प्रभावित हो रही है।सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई है कि बिना बच्चों को दवा पिलाए ही टैली सीट भर दी जाती है। सूत्रों का कहना है कि कई बार दलकर्मी केवल कागजों पर बच्चों को दवा पिलाने का आंकड़ा पूरा कर देते हैं, जबकि वास्तविकता कुछ और होती है। यदि यह आरोप सही साबित होता है तो यह न केवल सरकारी रिकॉर्ड के साथ खिलवाड़ है, बल्कि बच्चों के स्वास्थ्य के साथ भी गंभीर लापरवाही मानी जाएगी।

इसके अलावा पोलियो दवा के रखरखाव को लेकर भी गंभीर अनियमितता की बात सामने आई है। स्वास्थ्य विभाग के नियमों के अनुसार बच्चों को दवा पिलाने के बाद वैक्सीन को तुरंत आइस बॉक्स में सुरक्षित रखा जाना चाहिए, ताकि उसका तापमान नियंत्रित रहे और दवा खराब न हो। लेकिन आरोप है कि यहां दलकर्मी घंटों तक दवा की शीशी हाथ में लेकर घूमते रहते हैं। इससे दवा की गुणवत्ता प्रभावित होने और उसके खराब होने की संभावना बढ़ जाती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार पोलियो वैक्सीन तापमान के प्रति बेहद संवेदनशील होती है और लापरवाही बरतने पर उसका प्रभाव कम हो सकता है।मामले को लेकर स्थानीय लोगों ने संबंधित सुपरवाइजर से शिकायत भी की। शिकायतकर्ताओं ने ड्यूटी में लापरवाही, बच्चों को बिना दवा दिए निकल जाने और टैली सीट में गड़बड़ी की जानकारी दी। आरोप है कि शिकायत के बावजूद सुपरवाइजर स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। इससे लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।इसी बीच एक पोलियो दलकर्मी ने नाम नहीं प्रकाशित करने की शर्त पर कई गंभीर आरोप लगाए। दलकर्मी ने दावा किया कि ड्यूटी लगाने में पैसों का लेन-देन होता है। उन्होंने बताया कि कुछ लोगों द्वारा पैसा लेकर ड्यूटी दी जाती है। हालांकि इस आरोप की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इस खुलासे ने स्वास्थ्य विभाग की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।सामाजिक संगठनों और स्थानीय नागरिकों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। लोगों का कहना है कि रेलवे स्टेशन जैसे महत्वपूर्ण स्थानों पर तैनात कर्मियों की नियमित मॉनिटरिंग होनी चाहिए। साथ ही लापरवाही बरतने वाले कर्मियों और शिकायतों को नजरअंदाज करने वाले अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

अब देखना यह होगा कि स्वास्थ्य विभाग इस गंभीर मामले को कितनी गंभीरता से लेता है। क्योंकि पोलियो उन्मूलन जैसे राष्ट्रीय अभियान में थोड़ी सी भी लापरवाही बच्चों के भविष्य के लिए बड़ा खतरा बन सकती है।

