कारगिल युद्ध के जांबाज योद्धा नायक परमानंद सिंह अब हमारे बीच नहीं रहे

कारगिल युद्ध के जांबाज योद्धा नायक परमानंद सिंह अब हमारे बीच नहीं रहे


जे टी न्यूज़, खगड़िया : जिले के पसरहा थाना अंतर्गत गांधीनगर (खोरालाव) निवासी मित्तन प्रसाद सिंह के पुत्र नायक परमानंद सिंह का लखनऊ स्थित कमांड हॉस्पिटल (सेंट्रल कमांड) में लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। उनके निधन की खबर मिलते ही पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है। आज खगड़िया की धरती गम और गर्व दोनों ही भावनाओं से सराबोर है। ​वर्ष 1969 में जन्मे नायक परमानंद सिंह सिर्फ एक नाम नहीं, बल्कि देशभक्ति, शौर्य और कर्तव्यनिष्ठा की जीवंत मिसाल थे। वर्ष 1988 में भारतीय सेना में भर्ती होने वाले परमानंद सिंह ने कारगिल युद्ध के दौरान दुश्मनों के खिलाफ मोर्चे पर डटकर मुकाबला किया और अपनी वीरता से देश का गौरव बढ़ाया। वर्ष 2010 में सेना से सेवानिवृत्त होने के बाद वे देश सेवा के जज्बे के साथ दोबारा डीएसी (डिफेंस सिक्योरिटी कोर) के माध्यम से फौज में शामिल हो गए थे और इसी वर्ष नवंबर में उनका अंतिम अवकाश होना था। ​नायक परमानंद सिंह का पूरा परिवार आज भी देश सेवा और प्रतिभा का अनूठा संगम बना हुआ है।

उनके बड़े पुत्र राजीव रंजन भारतीय सेना से सेवानिवृत्त होकर पिता की विरासत को आगे बढ़ा चुके हैं, जबकि छोटे पुत्र धीरज कुमार एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर के रूप में कार्यरत हैं। उनके बड़े भाई अधिक लाल सिंह और छोटे भाई व पूर्व सूबेदार धनिक लाल सिंह ने भावुक होकर कहा कि परमानंद सिंह का पूरा जीवन मातृभूमि को समर्पित रहा और उनका परिवार हमेशा राष्ट्र सेवा को ही सर्वोपरि मानता आया है। ​जैसे ही शहीद का पार्थिव शरीर उनके पैतृक गांव पहुंचा, ग्रामीणों, परिजनों और पूर्व सैनिकों की आंखें नम हो गईं। सभी ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके बाद निकाली गई अंतिम शव यात्रा में भारी संख्या में लोगों ने भाग लिया और ‘भारत मां के वीर सपूत अमर रहे’ के गगनभेदी नारे लगाए।

बुधवार को उनके पार्थिव शरीर को अगुवानी घाट लाया गया, जहां पूरे सैन्य सम्मान के साथ उन्हें ‘गार्ड ऑफ ऑनर’ दिया गया और नम आंखों से अंतिम विदाई दी गई। नायक परमानंद सिंह का जाना सिर्फ एक परिवार की नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र की अपूरणीय क्षति है। उनकी वीरगाथा आने वाली पीढ़ियों को हमेशा देश रक्षा का संदेश देती रहेगी

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