किसान संघठन मुख्यमंत्री और विपक्ष के नेता से मिला

किसान संघठन मुख्यमंत्री और विपक्ष के नेता से मिला


जे टी न्यूज़, पटना : संयुक्त किसान मोर्चा ने बिहार के मुख्यमंत्री सम्म्राट चौधरी और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव को किसानों का ज्ञापन सौंपा संयुक्त किसान मोर्चा के प्रतिनिधिमंडल ने बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव को किसानों का ज्ञापन और मांगों का चार्टर सौंपा। दोनों नेताओं ने मांगों पर उचित एवं समयबद्ध कार्रवाई का आश्वासन दिया। मांगों के चार्टर में संयुक्त किसान मोर्चा की राष्ट्रीय मांगें शामिल हैं, जिनमें न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी, किसानों को कर्ज मुक्ति और किसान आत्महत्याओं के मामलों में मुआवजे का प्रावधान, जबरन भूमि अधिग्रहण पर रोक और LARR 2013 को सख्ती से लागू करना, जन-विरोधी मुक्त व्यापार समझौतों को अस्वीकार करना, मनरेगा की बहाली, चार श्रम संहिताओं को रद्द करना, तथा राज्यों के लिए विभाज्य कर-कोष में हिस्सेदारी को 31% से बढ़ाकर 50% करना शामिल हैं। प्रतिनिधिमंडल ने बिहार के किसानों के स्थानीय मुद्दों को भी उठाया। इनमें एपीएमसी मंडियों की बहाली, बटाईदारों और काश्तकार किसानों का पंजीकरण तथा उन्हें सभी सरकारी योजनाओं का लाभ देना, सिंचाई परियोजनाओं का जीर्णोद्धार, फसल बीमा योजना का क्रियान्वयन, सैटेलाइट टाउनशिप परियोजना के तहत जबरन भूमि अधिग्रहण पर रोक तथा दियारा (नदी क्षेत्र) की भूमि को “टोपोलैंड” (असर्वेक्षित भूमि) घोषित कर बिना मुआवजे के अधिग्रहण पर रोक शामिल हैं। प्रतिनिधिमंडल में संयुक्त किसान मोर्चा, बिहार की ओर से विधायक अजय कुमार, अध्यक्ष, बिहार राज्य किसान सभा, जमाल रोड), विनोद कुमार (महासचिव, बिहार राज्य किसान सभा, जमाल रोड), पूर्व विधायक रामबली सिंह (अध्यक्ष, अखिल भारतीय किसान महासभा, बिहार), राम चंद्र महतो (महासचिव, बिहार राज्य किसान सभा, अजय भवन), अशोक बैठा (राज्य सचिव, अखिल भारतीय खेत मजदूर किसान सभा), इंद्रदेव राय (संयुक्त सचिव, अखिल भारतीय किसान खेत मजदूर संगठन, बिहार) और ऋषि आनंद (महासचिव, जय किसान आंदोलन) शामिल थे।

प्रतिनिधिमंडल ने नेताओं को अवगत कराया कि यदि इन मांगों की केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा लगातार उपेक्षा जारी रहती है, तो देशभर के किसानों के पास 26 नवंबर 2026 से बड़े पैमाने पर, देशव्यापी और निरंतर संघर्ष को पुनः शुरू करने के अलावा कोई अन्य विकल्प नहीं बचेगा।

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