गया :वट वृक्ष की पूजा अर्चना महिलाओं ने बड़े धूमधाम मनाया।

जेटी न्यूज

शेरघाटी ,गया :  कोरोना काल में भी महिलाओ ने अपने – अपने पति की दीर्घायु और अपने परिवार में सुख-शांति समृद्धि की कामना लिय वट वृक्ष की पूजा अर्चना बड़े धूम – धाम से करती हुई नजर आई। ज्येष्ट माह की अमावस्या तिथि को वट सावित्री व्रत करने की परम्परा है। वही कितने जरूरतमंद लोगों को समय पर ब्लड उपलब्ध करवा कर लोगों की जीवन बचाने वाले मानव रक्षा अभियान के अध्यक्ष सह संस्थापक कवि मुकेश की पत्नी ने भी उनके लम्बी आयु और परिवार में सुख शांति समृद्धि हेतु दिन भर उपवास रह कर वट सावित्री व्रत पूरे आस्था के साथ की, इसके साथ ही एस कुमार की पत्नि और निरंजन की नई नवेली दुल्हन ने भी वट सावित्री व्रत कर अपने-अपने पति की लम्बी आयु की इस्वर से कामना की। वट सावित्री व्रत में ‘वट’ और ‘सावित्री’ दोनों का खास महत्व माना जाता है। पुराणों की माने तो वट वृक्ष में ब्रम्हा विष्णु और महेश तीनों का वास होता है। इस व्रत में बरगद के पेड़ के नीचे चारों ओर घूमकर सुहागि रक्षा सूत्र बांधकर पति की लम्बी आयु की कामना करती हैं। ऐसी मान्यता है कि वट वृक्ष के नीचे ही सावित्री ने बैठ कर अपने पति सत्यवान की प्राण को यमराज लोक से वापस लौटा कर दोबारा जीवित कर लिया था। तब से ऐसी मान्यता है की वट सावित्री व्रत की कथा सुनने से सुहागिन महिलाएं अखण्ड सौभाग्य प्राप्ति के साथ साथ परिवार के लिए भी सुख समृद्धि प्राप्त होती हैं। इस व्रत का महत्व करवा चौथ जैसा ही माना जाता है। दूसरी कथा के अनुसार मार्कण्डेय ऋषिको भगवान् शिव के वरदान से वट वृक्षके पत्ते में पैर का अंगूठा चूसते हुए बालमुकुंद के दर्शन हुए थे, तभी से वट वृक्ष की पूजा की जाती है।

 

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