बिहार को सूखाग्रस्त क्षेत्र घोषित कर किसानों को 70 हजार रुपए प्रति एकड़ मुआवजा दे सरकार – प्रभुराज नारायण राव , उपाध्यक्ष बिहार राज्य किसान सभा
बिहार को सूखाग्रस्त क्षेत्र घोषित कर किसानों को 70 हजार रुपए प्रति एकड़ मुआवजा दे सरकार
– प्रभुराज नारायण राव , उपाध्यक्ष बिहार राज्य किसान सभा
जे टी न्यूज

बेतिया: बिहार में मानसून की वर्षा मात्र 30 प्रतिशत होने के चलते धान , गन्ना तथा अन्य फसलों का भारी नुकसान हुआ है । बिहार के किसान धान का बिचड़ा तैयार करने में पटवन करने को विवश हुआ है । धान की रोपनी करने के समय खेतों में पंपिंग सेट से पटवन किया गया और रोपनी हो जाने के बाद सुख रहे धान को बचाने के लिए अनेक बार पटवन किया जा रहा है । यह काम सभी किसानों के द्वारा कर पाना संभव नहीं था । नतीजा 30% लगभग धान की रोपनी बिहार में नहीं हो सका ।स्थिति यह है कि मानसून की थोड़ी वर्षा होने से फसलों को मिली पर्याप्त से जो फसल सूख गए , उनका विकास संभव नहीं दिख रहा है ।
यह सब जानते हैं कि आज किसान घाटे की खेती कर रहे हैं । धान या गन्ने की खेती करने में भारी खर्च करना पड़ता है । खेतों में बिचड़ा डालने , रोपनी करने और उसे तैयार करने तक अनेक बार खेतों की जोतनी , कोढ़नी करके महंगे खाद तथा बीज लगाना पड़ता है । सभी कार्यों में मजदूरी देनी पड़ती है।
इस साल किसानों के सामने सुखाड़ की समस्या भारी संकट के रूप में आया है । इससे उबरने के लिए किसान सभी प्रकार के प्रयास कर रहे हैं । लेकिन फसल का निकलना संकट में है । ऐसी स्थिति में किसानों को केंद्र तथा राज्य सरकार के द्वारा अनुदान मिलना न्याय संगत होगा । पिछले दिनों संयुक्त किसान मोर्चा के माध्यम से किसानों ने फसल में लागत का डेढ़ गुना दाम देने के लिए स्वामीनाथन कमीशन के अनुशंसाओं को सरकार द्वारा लागू करने के लिए , एमएसपी को कानूनी दर्जा देने के लिए 13 महीने तक दिल्ली जाने वाले सभी सड़कों पर धरना प्रदर्शन किया था । किसानों के जमीन को कॉरपोरेट के हाथों दे देने के लिए मोदी सरकार ने तीन काले कानून लाए थे । लेकिन किसानों की एकजुट संघर्ष ने सरकार के मंसूबों को चकनाचूर कर दिया और नरेंद्र मोदी को तीनों काले कानून को वापस लेना पड़ा था। आज फिर नरेंद्र मोदी की सरकार किसानों की जमीनों को कॉरपोरेट को दे देने की मुहिम में लगी हुई है । इसी का नतीजा है की खेती के सारे औजार , खाद तथा बीज महंगे होते जा रहे हैं या फिर भारी कालाबाजारी का शिकार किसान हो रहे हैं । किसानों को खेती से मुंह मोड़ने के लिए यह सारी कार्रवाई केंद्र सरकार कर रही है ।

संयुक्त किसान मोर्चा ने इस बात को गंभीरता से लिया है और उसके खिलाफ एकजुट संघर्ष खड़ा करने के लिए कार्यक्रम तय कर रहा है। बिहार राज्य किसान सभा बिहार ने किसानों को भारी सुखाड़ से राहत दिलाने के लिए लगातार संघर्ष कर रहा है । 9 अगस्त को संयुक्त किसान मोर्चा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनकर बिहार राज्य किसान सभा अनेक जिलों को सूखाग्रस्त क्षेत्र घोषित करने की मांग किया है ।
बिहार राज्य किसान सभा जिला स्तर से लेकर पंचायत स्तर तक किसानों को गोलबंद करने का और अपनी हक के लिए आंदोलन में शामिल होने का योजना बनाया है । आगामी एक सितंबर से 7 सितंबर तक पूरे बिहार में किसानों को तथा खेत मजदूर को गोलबंद किया जाएगा । 1 से 3 सितंबर तक सभी पंचायत में किसानों की सभाए की जाएगी । चार तथा पांच सितंबर को बिहार के सभी प्रखंड पर बिहार को सूखाग्रस्त क्षेत्र घोषित करने के लिए प्रदर्शन किए जाएंगे । इतना ही नहीं फिर भी सरकार अगर किसानों की समस्याओं पर ध्यान नहीं दिया तो राज्यव्यापी एकजुट आंदोलन चलाया जाएगा ।बिहार राज्य किसान सभा ने केंद्र की मोदी सरकार तथा बिहार सरकार से मांग किया है कि बिहार के सुखाड़ को देखते हुए और कई हिस्सों में बाढ़ को ध्यान में रखते हुए 70 हजार रुपए किसानों को प्रति एकड़ मुआवजा दिया जाए । साथ ही धान और गन्ने को बचाने के लिए किसानों को 80 रुपए लीटर डीजल अनुदान दिया जाए । इतना ही नहीं बिहार सरकार से किसान सभा ने यह भी मांग किया है कि पर्याप्त मात्रा में सस्ते दर पर किसानों को डीएपी तथा यूरिया खाद की आपूर्ति किया जाए और खेतों में लगाने के लिए अनुदानित दर पर बेहतर बीज उपलब्ध कराया जाए ।

साथ ही बिहार राज्य किसान सभा ने यह मांग किया है कि बिहार में बढ़ रहे बेरोजगारी तथा किसानों को नगदी फसल का लाभ दिलाने के लिए बिहार में बंद पड़े सभी 20 चीनी मिलों को अविलंब चालू किया जाए । इससे बिहार जैसे कृषि प्रधान राज्य में इस कृषि आधारित उद्योग से किसानों को भारी लाभ मिलेगा । साथ ही बेरोजगारी की समस्या भी दूर होगी । किसान सभा ने बिहार सरकार को चेतावनी दिया है कि किसी भी स्थिति में बिहार में इथनौल प्लांट नहीं लगाया जाए । क्योंकि खाने के अनाज से इथनौल बनाना बिहार के लिए आत्मघाती होगा ।


