जिसको मिला लोकतंत्र चलाने का बागडोर*वह संविधान का ही गला मरोड़ रहा प्रभुराज नारायण राव

जिसको मिला लोकतंत्र चलाने का बागडोर*वह संविधान का ही गला मरोड़ रहा
प्रभुराज नारायण राव

जे टी न्यूज़,
भारत जब गुलाम था ।ब्रिटिश हुकूमत यहां की सारी संपत्ति लूट कर लंदन ले जा रही थी। तब यहां के लाखों जांबाज युवाओं ने अपना शहादत देकर इस देश को आजादी दिलाई उसमें शहीद ए आजम भगत सिंह, राजगुरु ,सुखदेव, अमर सहित चंद्रशेखर आजाद ,अशफाक उल्ला खां ,रामप्रसाद बिस्मिल ,रौशन सिंह, राजेंद्र लाहिड़ी ,खुदीराम बोस जैसे लाखों सुर्खियों में है । उनका शहादत रंग लाया ।अंग्रेजों को भारत छोड़ना पड़ा और देश को आजादी भी मिली। फिर देश में एक नई संविधान बनाने के लिए बाबा साहब भीमराव अंबेडकर के नेतृत्व में संविधान निर्मात्री समिति भी बनी और अंग्रेजों की संविधान से लोकतांत्रिक मूल्यों को शामिल कर भारत का संविधान बनाया गया। इस संविधान का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा था लोकतंत्र ।जिसमें देश की जनता को बोलने का अधिकार,सरकार बनाने के लिए वोट का अधिकार के साथ-साथ हर क्षेत्र में अधिकार दिया गया। आज इस देश पर हिटलर के अनुयायियों की हुकूमत है। वह फासीवादी व्यवस्था को इस देश में लागू करना चाहते हैं। जिस तरीके से यहूदियों के खिलाफ नाजियों को संगठित करके हिटलर ने नाट्सी पार्टी बनाया और बहु संख्यक धर्म वाली पार्टी के सहारे जर्मनी पर अपना हुकूमत कायम किया। ठीक उसी तरीके से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के दिशा निर्देशन में भारतीय जनता पार्टी के नेता नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हिंदू और मुसलमान के बीच धार्मिक तनाव पैदा करके हिंदू बहुल हिंदुत्व के आधार पर सरकार कायम करने की मुहिम चला रहे हैं ।
अब सवाल उठता है कि जिस देश की आजादी के लिए अपने जान को न्योछावर करने वालों में सभी धर्म के जाबाजों की समान भागीदारी रही। ठीक इसके विपरीत 1904 सावरकर द्वारा बनी यांग इंडिया सोसाइटी या पंडित मदन मोहन मालवीय द्वारा 1915 बनी हिंदू महासभा तथा 1925 में स्थापित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ। जिसने एक कतरा खून तक इस देश की आजादी में नहीं बहाया। वह आरएसएस आज इस देश में हिंदुत्व पर आधारित राजसत्ता काम करना चाहती है। जिसका मकसद है धर्म के बीच तनाव पैदा कर एक धर्म मानने वालों के विरुद्ध दूसरे धर्म के लोगों को भड़काना, दंगा फसाद कराना।हत्याओं का सिलसिला चलाना और उसी आधार पर राजसत्ता अपने हाथ में रखना इनका मुख्य मकसद है।


तो इतिहास के पन्नों को देखने से यह भी मिलता है कि जिस हिटलर ने नाजियों को संगठित करके यहूदियों के खिलाफ हत्या का सिलसिला चलाया और वह दुनिया के अन्य देशों पर कब्जा करने का नीयत बनाए रखा ।तो सोवियत संघ पर भी निशाना साध लिया।नतीजा यह हुआ कि उसकी राज्य सत्ता और उसकी जीवन का आखिरी दौर भी सामने आ गया। वह अपने राज्य सत्ता को तो नहीं बचा सका। बल्कि अपने जीवन को भी बचाने में असफल होकर पेट्रोल छीड़क कर अपने को आग के हवाले कर दिया।

यह धर्म पर आधारित हुकूमत की परिणति रहा है और इसी दिशा में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आरएसएस के दिशा निर्देशन में भारतीय जनता पार्टी आगे बढ़ रही है। जो इस देश की सभ्यता, संस्कृति,अनेकता में एकता, जो इस देश की रही है हमेशा से विशेषता, गंगा और यमुना का मिलन और उसके आधार पर बनी तहजीब, सब को समाप्त करने में लगी हुई है।

जिसका परिणति भी इतिहास बताता है। तो फिर इस देश के जनवाद पसंद, सभ्यता और संस्कृति में जीने वाले इस देश के लोगों पर यह गंभीर जिम्मेदारी आ जाती है कि लाखों जाबाजों की शहादत के बाद हमें मिली यह आजादी, बाबा साहब भीमराव के नेतृत्व में बनी यह संविधान और इस लोकतंत्र का हिफाजत करने के लिए एक बार फिर हमें सड़कों पर आना होगा और सत्ता के लोभी, धर्म के नशे में अंधे, इस देश ल तोड़को को मिटाना होगा अन्यथा यह देश मिट जाएगा।

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