जिला कृषि पदाधिकारी चौकीदार को देते दिखे भद्दी-भद्दी गालियां,पैर छुआकर/पकड़वा कर मंगवाई माफी।

 

संजीव मिश्रा

भागलपुर/पुर्णिया/अररिया:

देश में अभी लॉकडाउन पार्ट-2 चल रहा है।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की स्थिति भांपते हुए पहले लॉकडाउन के बाद लॉकडाउन-2 की घोषणा की। बिहार सहित पूरा देश लॉकडाउन रूपी हथियार से कोरोना से लड़ रहा है।इस लड़ाई को सफल बनाने में स्वास्थ्य कर्मी,पुलिस कर्मी व मीडिया कर्मी अपनी-अपनी महती भूमिका निभा रहे हैं।लॉकडाउन के बीच अररिया जिले में हुई घटना ने बिहार में सुशासन के गाल पर जोड़दार तमाचा मारा है।पुलिस विभाग के निचले स्तर के एक चौकीदार को अपनी ड्यूटी ईमानदारी से करना महंगा पड़ा।

पूरा मामला बैरगाछी चेकपोस्ट का है, जहाँ देश मे लॉकडाउन की वजह से पुलिस बल को तैनात किया गया है। सरकार का सख्त निर्देश है कि सड़कों पर वाहन न चले और हर आने जाने वाले वाहन की जाँच सुनिश्चित हो। उच्च अधिकारी द्वारा मिले इस काम को चेकपोस्ट पर तैनात चौकीदार गोनू ततमा बखूबी निभा रहे थे।इसी बीच अररिया जिले के कृषि पदाधिकारी मनोज कुमार अपने वाहन से गुजर रहे थे।वाहन को आता देख चौकीदार गोनू ततमा ने हाथ का इशारा देकर रोक लिया और वाहन पास की माँग कर दी।इतना कहना ही था कि अंदर बैठे कृषि पदाधिकारी मनोज कुमार अपना आपा खो बैठे और गाड़ी से उतरकर चौकीदार को गालियों की बौछार शुरू कर दी।चेकपोस्ट पर तैनात हरेंद्र कुमार दरोगा ने भी चौकीदार का साथ देने के बजाय कृषि पदाधिकारी की जी हजूरी शुरू कर दी और उल्टे चौकीदार को ही डांटना शुरू कर दिया।

न सिर्फ बुजुर्ग चौकीदार से उठक-बैठक कराया गया बल्कि पैर पकड़ कर माफी भी मँगवाई गई।उस शर्मनाक स्थिति की कल्पना की जा सकती है,जब बुजुर्ग चौकीदार से पैर पर गिरवाकर माफ़ी मंगवाई होगी।क्या वो अधिकारी हैं तो वो ईमानदारी से ड्यूटी कर रहे निचले स्तर के चौकीदार को जलील करेंगे?आखिर ये अधिकार उन्हें किसने दिया?
अभी हाल के एक वाकया की मैं चर्चा करना चाहूंगा।प्रदेश के डीजीपी गुप्तेस्वर पांडेय भागलपुर दौरे पर पहुँचे थे।पुलिस लाइन गेट पर तैनात महिला सिपाही ने डीजीपी को अंदर जाने से रोक दिया था।जब डीजीपी ने अनजान बनते हुए कहा कि मैं अगर अंदर जाऊ तो?उसी वक्त बेफिक्र डीजीपी को नहीं पहचान पा रही महिला सिपाही ने डीजीपी के ऊपर पिस्टल तान दी और बोली जाके तो दिखाओ।

डीजीपी मुस्कुराते हुए दिखे और अपनी पहचान बताई और आईडी कार्ड दिखाया।बाद में डीजीपी ने उक्त महिला सिपाही की काफी प्रशंसा की और महिला सिपाही की ईमानदारी से प्रसन्न होकर इनाम की भी घोषणा की।आखिर इनकी हनक कहाँ गयी? प्रदेश के डीजीपी इस तरह अपने सिपाहियों का मनोबल बढ़ाते हैं।उन्हें तब कहाँ गुस्सा आया ?


कई बार भागलपुर के एसएसपी आशीष भारती रात में गस्ती पर निकले,सिपाहियों ने उन्हें रोका किन्तु एसएसपी को खुशी हुई कि उनके सिपाही ईमानदारी से ड्यूटी कर रहे है।आखिर उन्होंने ऐसा अभद्र व्यवहार कहाँ किया ?फिर आखिर क्या कृषि पधाधिकारी,अररिया के मनोज बाबू के लिए अलग कानून है, जो इन्होंने बुजुर्ग चौकीदार को इतना जलील किया?आखिर ये हक उन्हें किसने दिया?
जब यह घटना घट रही थी तभी आसपास के लोगो ने पूरी घटना को अपने मोबाइल में कैद कर वीडियो वायरल कर दिया।

क्यl इन दोनों अधिकारियों के ऊपर कानूनी कारवाई होगी? जिन्होंने, इतना घृणित कार्य किया।चाहे कृषि पदाधिकारी मनोज कुमार हो या थाना प्रभारी हरेंद्र कुमार हो।

बहरहाल खबर लिखे जाने तक बिहार के डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय ने पूरी घटना की जानकारी होने की बात कहीं,साथ-साथ उन्होंने कहा कि ये घटना दुर्भाग्यपूर्ण है।हमने जाँच के आदेश दे दिए है।अब देखना यह है कि अपने पद के गुरूर में चूर कृषि पदाधिकारी व थानेदार पर क्या कारवाई होती है?वायरल वीडियो में तो साफ दिख रहा है किस तरह से ये बरबर्ता पूर्ण हरकत की गईं हैं।बहरहाल ये जांच का विषय है।

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