शिरोमणि महर्षि मेंही परम् हंस जी महाराज के 141 वी जयंती धूमधाम से मनाया गया

शिरोमणि महर्षि मेंही परम् हंस जी महाराज के 141 वी जयंती धूमधाम से मनाया गयाजे टी न्यूज,खगड़िया: संतमत सत्संग मंदिर महद्दीपुर खगड़िया से परम् पूज्य आनंद स्वामी जी महाराज व्यवस्थापक, स्वामी सेवानंद सत्यार्थी, डॉ शशि शेखर, डॉ राज किशोर, मणिकांत सिंह,फुचो यादव,विनेश साह, सीता राम यादव के नेतृत्व में परम् पूज्य गुरुदेव संत शिरोमणि महर्षि मेंही परम् हंस जी महाराज के 141 वी जयंती धूमधाम से मनाया गया,गाजे बाजे के साथ सभी सत्संगी महद्दीपुर,सोणडीहा , काली चकला बंदेहरा , बिहार का गौरव महद्दीपुर दुर्गा मंदिर का भ्रमण कर जब तक सुरज चांद सितारे —अमर रहे गुरुदेव हमारे,आज क्या है महर्षि- मेंही जनमदिवस इत्यादि नारे से गुंजायमान करके,सत्संग मंदिर आकर संत स्तुति बिनती, मालार्पण पुष्पांजलि के बाद परम् पूज्य आनंद स्वामी जी महाराज ने गुरुदेव के मुल उपदेश को समझाया
संतमत के परम प्रकाशपुंज, महान तपस्वी, ध्यानयोगी, और आत्मकल्याण के दिव्य पथप्रदर्शक परम पूज्य गुरुदेव, परमाराध्य संत सद्गुरु महर्षि जयंती केवल एक महापुरुष के जन्मदिन की औपचारिकता नहीं होती। यह उस प्रकाश का उत्सव है, जिसने अंधकारमय संसार को आत्मबोध, भक्ति और मोक्ष के मार्ग से आलोकित किया।
महर्षि मेँहीँ परमहंस जी महाराज ने अपने संपूर्ण जीवन को साधना, सेवा, त्याग और सत्य के प्रचार में अर्पित कर दिया। वे न केवल एक महान ध्यानयोगी थे, बल्कि एक ऐसे जाग्रत सद्गुरु थे जिन्होंने अनगिनत आत्माओं को अंदर के मार्ग की ओर प्रेरित किया। उनकी शिक्षाएँ केवल पठन-पाठन की वस्तु नहीं, बल्कि आत्मिक क्रांति का आह्वान हैं।
जयंती का उद्देश्य है—
उनके जीवन और सिद्धांतों को स्मरण करना।
उनके उपदेशों को जन-जन तक पहुँचाना।
उनके दिखाए मार्ग पर चलने का संकल्प लेना।
आत्मिक उन्नति की प्रेरणा प्राप्त करना।
संत-जयंती पर्व है, जागरण का सार।
चेतनता के दीप जलें, मिटे मोह अंधकार॥
सद्गुरु महर्षि मेँहीँ परमहंस जी महाराज का जीवन संदेश देता है—
सत्य का मार्ग ध्यान और भक्ति से होकर जाता है।
आत्मा का कल्याण इसी जीवन में संभव है, यदि सही मार्गदर्शन मिले।
. सद्गुरु के वचनों पर श्रद्धा, और साधना में निरंतरता, ही सच्चा धर्म है।
इसलिए हमें उनकी जयंती पर केवल उत्सव नहीं, बल्कि आत्मनिरीक्षण करना चाहिए। क्या हम उनके दिखाए मार्ग पर चल पा रहे हैं? क्या हमारे भीतर वह प्रेम, शांति और ध्यान की लौ जल रही है?
गुरु सम नहीं उपकारी, जगत में कोई और।
संत पथ दिखलाय जो, भवसागर से ठौर॥
इस जयंती पर हम सभी संकल्प लें —
हम ध्यान, संयम और सेवा के मार्ग पर चलेंगे।
हम सद्गुरु के उपदेशों को जीवन में आत्मसात करेंगे।
इस कार्यक्रम में लगभग 500 सत्संगी ने भाग लिया जिसमें सोणडीहा में डां सीता राम यादव, मुनि लाल ठेकेदार के द्वारा भक्त जन के लिए लस्सी का व्यवस्था हुआ जिसमें सहयोग जय चंद्र कुमार पंचायत समिति, अखिलेश कुमार, योगेन्द्र सिंह का सहयोग रहा, पुनः बाबू चकला में शुशील सिंह शिक्षक के द्वारा भक्त जन को शर्बत पिलाया एवं महद्दीपुर में झाबो दास, ऋषि दास के द्वारा ठंडा पिलाया गया, महद्दीपुर आश्रम में सत्संग समारोह के बाद महाप्रसाद हुआ, इसमें जमीन दात्री प्रमिला देवी, मणिकांत सिंह,फुचो यादव, विनेश साह, माता द्रोपदी देवी, रौशन कुमारी, साधना कुमारी एवं ग्रामीण एवं क्षेत्रीय सत्संगी का महत्वपूर्ण योगदान रहा

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