पूर्व प्रधानमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह की जयंती पर बिशेष

पूर्व प्रधानमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह की जयंती पर बिशेष जे टी न्यूज़,
आज पूर्व प्रधानमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह जी का जयंती है। इन्हें देश की लगभग 60% आबादी पिछड़े वर्ग की अपना मसीहा मानते हैं। जिन्होंने, पिछड़े ओबीसी वर्ग के केन्द्रीय सरकारी सेवाओं में आरक्षण नीति 1952 से तात्कालीन सरकार 1989 तक टालमटोल करती रही थी, 1990 में मंडल कमीशन लागू करने की घोषणा की। ऐसे महापुरुष को जयंती के अवसर पर देश के पिछड़ों की ओर से समाजवादी विचारक राम सुदिष्ट यादव ने कोटि-कोटि प्रणाम सलाम किया। ज्ञातव्य है कि वीपी सिंह की सरकार को वामपंथी दलों और बीजेपी बाहर से समर्थन दे रही थी। यह अगस्त 1990 में वीपी सिंह ने ओबीसी पिछड़े वर्ग के लिए केन्द्रीय सरकारी सेवाओं में 27% आरक्षण देने केलिए मंडल कमीशन लागू करने की घोषणा की। इसके बाद वीपी सिंह से बीजेपी अपना समर्थन वापस ले लिया। भाजपा ने मंडल कमीशन के खिलाफ में सरकार से समर्थन वापस ले लिया । सरकार को लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव का सामना करना पड़ा, इस प्रकार सरकार गिर गई। वीपी सिंह ने प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया।

भाजपा ने मंडल कमीशन को रोकने केलिए गुजरात के नागपुर से “राम रथयात्रा” निकाला। इस “राम रथ” पर सबार भाजपा के तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष लालकृष्ण आडवाणी थे। राम रथयात्रा का मैनेजमेंट नरेन्द्र मोदीजी देख रहे थे। यह “राम रथ यात्रा” जिन-जिन राज्यों के शहरों से गुजरा वहां-वहां साम्प्रदायिक गंदे फसाद भरकाने लगे। यह “राम रथयात्रा” साम्प्रदायिक दंगा-फसाद कराते-कराते उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल इलाके में पहूंच गई।

उन दिनों बिहार में समाजवादी चिंतक डॉ राम मनोहर लोहिया के अनुयायि और जननायक कर्पूरी ठाकुर के उत्तराधिकारी बिहार के “करक” मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव मौजूद था। उन्होंने भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष माननीय लालकृष्ण आडवाणी को बारम्बार बिहार राज्य में न प्रवेश करने की चेतावनी दे रहे थे। लेकिन उन पर इसका कोई असर नहीं पड़ा और बिहार में पश्चिमी छोर से प्रवेश कर समस्तीपुर जिला में आ गए। तब लालू प्रसाद यादव ने कहा था कि देश में एक प्रधानमंत्री की जान की कीमत जितनी है, उतनी ही एक आम आदमी की जान की कीमत है। हम साम्प्रदायिक दंगा-फसाद बिहार में नहीं होने देंगे, चाहे हमारी सरकार रहे या चली जाए।” लालू प्रसाद यादव ने “राम रथयात्रा” पर सबार लालकृष्ण आडवाणी साहब को गिरफ्तार करने का फैसला ले लिया और आडवाणी जी को गिरफ्तार कर तात्कालीन झारखंड एरिया के मसानजोर सरकारी आईबी में सम्मान के साथ बंदी बना कर रख दिया था। जब देश में भाजपा द्वारा फैला रहे साम्प्रदायिक दंगा फसाद धीरे धीरे शान्त हो गया था।

ज्ञातव्य है कि:-
1989 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को भारी नुकसान हुआ था और किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला था। वी.पी. सिंह के नेतृत्व में राष्ट्रीय मोर्चा को 146 सीटें मिली थीं, जबकि भाजपा के 86 और वाम दलों के 52 सांसद थे, जिन्होंने राष्ट्रीय मोर्चा को समर्थन देने का फैसला किया था। इस तरह, राष्ट्रीय मोर्चा को 284 सदस्यों का समर्थन प्राप्त हुआ और वी.पी. सिंह प्रधानमंत्री बने थे।

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