अब्दुल हमीद की जयंती पर विशेष
परमवीर चक्र विजेता एवं अमर शहीद अब्दुल हमीद हर अमन पसंद नागरिकों के दिल में हमेशा जिन्दा रहेंगे - हृदयानंद मिश्र।
अब्दुल हमीद की जयंती पर विशेष /परमवीर चक्र विजेता एवं अमर शहीद अब्दुल हमीद हर अमन पसंद नागरिकों के दिल में हमेशा जिन्दा रहेंगे – हृदयानंद मिश्र।
जे टी न्यूज
अब्दुल हमीद बचपन से ही सेना की वर्दी बहुत पसंद थी। गांव के बड़े बुजुर्ग जब देश की कहानियाँ सुनाते, तो वह चुपचाप सुनते रहते । आंखों में एक चमक होती, जैसे मन ही मन कुछ ठान रखा हो। स्कूल की छुट्टी के बाद वो अक्सर अपने दोस्तों के साथ खेलते हुए टहनियों से बंदूक बनाता और कहता, “एक दिन मैं भी फौज में जाऊंगा।”
1954 में वे भारतीय सेना की चौथी ग्रेनेडियर्स बटालियन में शामिल हुए। उनका स्वभाव शांत था, लेकिन काम के प्रति बेहद जिम्मेदार।
1965 में भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध छिड़ गया। अब्दुल हमीद उस समय पंजाब के केम करन सेक्टर में तैनात थे। यह इलाका रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण था। 8 से 10 सितंबर के बीच असल उत्ताड़ गांव के पास पाकिस्तानी सेना ने भारी हमला किया। उनकी सेना के पास अमेरिकी बनाए गए पैटन टैंक थे, जो उस समय काफी उन्नत माने जाते थे।
अब्दुल हमीद की टुकड़ी को recoilless राइफल से लैस जीपों के साथ भेजा गया था। उनका काम था टैंकों को रोकना। उन्होंने खेतों के किनारे से स्थिति संभाली और सटीक निशाने से कई टैंकों को नष्ट किया।
10 सितंबर को लड़ाई के दौरान उनकी जीप पर दुश्मन का गोला गिरा, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हुए और वहीं शहीद हो गए। उनके साहस और रणनीति ने भारतीय सेना को महत्वपूर्ण बढ़त दिलाई।अब्दुल हमीद को मरणोपरांत परम वीर चक्र से सम्मानित किया गया। उनकी बहादुरी को याद रखने के लिए धामुपुर और असल उत्ताड़ में स्मारक बनाए गए हैं। उनका नाम राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर भी अंकित है।उसका गांव, उसका परिवार, और पूरा देश गर्व से भर गया। वह वापस नहीं आया, लेकिन उसका नाम देश के सबसे बहादुर सपूतों में दर्ज हो गया।लेखक हृदयानंद मिश्र एडवोकेट, वैचारिक विश्लेषक एवं सदस्य हिन्दू धार्मिक न्यास बोर्ड झारखंड सरकार।

